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Operation Sindoor: कब हमला करना है और कब सीजफायर? भारत के ऑपरेशन सिंदूर से सीख सकती है दुनिया

आधुनिक जंग में दुनिया, भारत के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से काफी कुछ सीख सकती है, खासकर, कब हमला करना है और कब सीजफायर इसकी समझ, आज की तारीख में होना जरूरी है।

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ऑपरेशन सिंदूर से सीख सकती है दुनिया बड़ी जंगी रणनीति
Authored by: Shishupal Kumar
Updated May 8, 2026, 14:43 IST

आज जब दुनिया के कई हिस्सों में जंग हो रही है, अमेरिका- ईरान में उलझा है, इजराइल- लेबनान, फिलिस्तीन, और ईरान के साथ, रूस- यू्क्रेन के साथ जंग में है, तब ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के समय के एक फैसले की बहुत याद आ रही है। भारत जब पाकिस्तान (Pakistan) के गिड़गिड़ाने पर सीजफायर के लिए सहमत हुआ था तो सरकार की जमकर आलोचना हुई। विपक्ष के साथ-साथ कई विश्लेषकों ने भी यह कहा कि सीजफायर नहीं होना चाहिए था, पाकिस्तान को पूरी तरह से बर्बाद कर देना चाहिए। आज जब ईरान के साथ अमेरिका की जंग के तीन महीने होने को हैं, रूस-यू्क्रेन युद्ध तो पांचवे साल में चल रहा है, ऐसे में यह समझना कि कब हमला करना है और कब सीजफायर? ये दुनिया को भारत सीखा सकता है। आइए समझते हैं कैसे?

जब शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर?

भारत के पहलगाम में जब आतंकी हमला हुआ और 26 निर्दोष लोग मारे गए, तब सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंदूर को हरी झंडी दी गई। थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ हमला बोला, अपने तेज और सटीक हमलों से पाकिस्तान को चौंका दिया। इस हमले में भारत को हल्का सा भी नुकसान नहीं हुआ, जबकि भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तानाबूद कर दिया। इन्हीं आतंकी ठिकानों पर पहलगाम आतंकी हमले की योजना और उसे अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी हुई थी। भारत का मकसद पहलगाम का बदला लेना था और वो 7 मई 2025 को ही पूरा हो गया।

हमला आतंकियों के खिलाफ

7 मई को जब भारतीय सेना ने 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया, तब भारत की तरफ से साफ कहा गया कि ये हमला आतंकी ठिकानों पर की गई है, ये आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई है। हमले के बाद भारत ने अपनी प्रतिक्रिया को केंद्रित, संयमित और गैर-आघातकारी बताया। यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना नहीं बनाया गया था। भारत की जवाबी कार्रवाई सावधानीपूर्वक बनी योजना और खुफिया जानकारी पर आधारित थी, जिसने सुनिश्चित किया कि ऑपरेशन न्यूनतम अतिरिक्त क्षति के साथ अंजाम तक पहुंचे। मिशन में ऑपरेशन से जुड़ी नैतिकता पर जोर दिया गया था और नागरिकों को संभावित क्षति से बचने के लिए संयम बरता गया था।

7 मई 2026 को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था- "आज सुबह, जैसा कि आपको ज्ञात होगा, भारत ने इस तरह के सीमा पार हमलों का जवाब देने और उन्हें रोकने तथा उनका प्रतिरोध करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया है। यह कार्रवाई नपी-तुली, नॉन-एस्केलेटरी, आनुपातिक और जिम्मेदारी पूर्ण है। यह आतंकवाद की इंफ्रास्ट्रक्चर को समाप्त करने और भारत में भेजे जाने वाले संभावित आतंकवादियों को अक्षम बनाने पर केंद्रित है।"

कर्नल सोफिया कुरैशी ने 7 मई की प्रेस कांफ्रेंस में ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देते हुए कहा- " इन लक्ष्यों का चयन विश्वसनीय इंटेलिजेंस सूचनाओं के आधार पर हुआ ताकि आतंक गतिविधियों की रीढ़ तोड़ी जा सके। और यह खास ध्यान दिया गया कि निर्दोष नागरिकों और सिविलियन इंस्टॉलेशनों को नुकसान न पहुंचे।"

पाकिस्तान का पलटवार और फिर भारत ने कर दिया धुआं-धुआं

पहले ही दिन भारत के स्पष्ट रुख के बाद भी 7-8 मई 2025 की रात को पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोला। पाकिस्तान के हथियार हवा में ही रह गए। जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों को ऐसा निशाना बनाया कि आजतक मरम्मत के विज्ञापन जारी हो रहे हैं। यहां भी भारत ने सटीक लक्ष्यों पर निशाना साधा। उनके एयरबेस, आर्मी बेस, सैन्य हवाई पट्टी को निशाना बनाया। पाकिस्तान सिर्फ 88 घंटों में ही घुटनों पर आ गया और समझौते के लिए गिड़गिड़ाने लगा। 10 मई को भारत ने सीजफायर पर सहमति दे दी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हमले में तबाह आतंकी ठिकाने (फोटो-AP)

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हमले में तबाह आतंकी ठिकाने (फोटो-AP)

ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को सीख

ये तो थी ऑपरेशन सिंदूर की संक्षिप्त में कहानी, अब इस सवाल पर आते हैं कि दुनिया इससे क्या सीख सकती है। आज की तारीख में जंग काफी खर्चिली और टेक्नोलॉजी आधारित हो गयी है। जंग लंबा खींचा तो मतलब विजय होने पर भी, उसका नुकसान होना तय है। हथियार आधुनिक हो चुके हैं, कई मोर्चों पर जंग लड़ी जाने लगी है, जैसे ईरान वॉर में हम देख रहे हैं कि ईरान, अमेरिका के खिलाफ हमले तो कर ही रहा है, साथ ही होर्मुज भी बंद करके रखा, अमेरिका के दोस्त खाड़ी देशों को भी निशाना बना रहा है। ऐसे में किसी भी देश के लिए ये तय करना जरूरी है कि जंग में उसका लक्ष्य क्या है और उसे वो कितनी तेजी और सटीकता से हासिल कर सकता है? बस अटैक के पहले चरण में ही इसे हासिल करने की कोशिश करे और फिर जब बात सीजफायर पर आए तो सहमति दे। ताकि नुकसान कम से कम हो और लक्ष्य सभी हासिल हो जाएं, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कर दिखाया था। इस ऑपरेशन ने दिखाया कि आज के दौर में युद्ध सिर्फ सीमा पर गोलियां चलाने का नाम नहीं रह गया, बल्कि तकनीक, राजनीतिक संदेश, अंतरराष्ट्रीय दबाव और नियंत्रित सैन्य रणनीति का मिश्रण बन चुका है। आधुनिक दौर में सीजफायर केवल “शांति की अपील” नहीं, बल्कि रणनीतिक गणना का हिस्सा होता है। इससे अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी बना रहता है और आर्थिक दबाव भी कम होता है।

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