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क्या है EU का 'ट्रेड बाजूका'? ट्रंप के ग्रीनलैंड टैरिफ पर पलटवार करने को तैयार हैं यूरोपीय देश

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईयू को अपना 'एंटी कोअर्सन इंस्ट्रूमेंट' जिसे 'ट्रेड बाजूका' कहते हैं, उसे लागू करने के लिए तैयार रहने को कहा है। इस 'ट्रेड बाजूका' के तहत यूरोपीय देश अपने यहां अमेरिकी सामानों के आयात पर रोक लगा सकते हैं। 'ट्रेड बाजूका' कोई आधिकारिक नियम नहीं है।

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Photo : AP
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप और ईयू के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
Written by: Alok Rao
Updated Jan 20, 2026, 13:32 IST
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What is trade Bazooka : ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और नाटो जिसमें ज्यादातर यूरोप के देश हैं, उनमें तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रंप की टैरिफ की धमकियों के बाद भी यूरोपीय देश झुके नहीं रहे बल्कि वे तनकर खड़े हो गए हैं। उन्होंने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। दरअसल, टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने वाले ट्रंप ने बीते शनिवार को एक और धमकी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रीनलैंड पर उनका साथ नहीं देने वाले देशों पर वह 10 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे। यानी जो देश ग्रीनलैंड को हासिल करने वाले उनके प्लान का समर्थन नहीं करेंगे, उन देशों के उत्पादों पर वह 10 प्रतिशत का शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। जाहिर है कि 10 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद यूरोपीय देशों के सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे और इससे उनके व्यापार को नुकसान होगा। ट्रंप ने जिन आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है, उनमें डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं।

धमकियों से यूरोप ब्लैकमेल नहीं होगा-फ्रेडेरिक्सन

ट्रंप के इस ऐलान के बाद डेनमार्क सहित इन सभी देशों ने मिलकर रविवार को एक संयुक्त बयान जारी किया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन ने साफ तौर पर कहा कि टैरिफ की धमकियों से यूरोप ब्लैकमेल नहीं होगा। साथ ही इन देशों ने कहा कि ट्रंप यदि 10 प्रतिशत टैरिफ लगाते हैं तो अमेरिका के साथ उनके रिश्तों पर इसका बहुत बुरा असर होगा और यह खतरनाक मोड़ की तरफ जा सकता है। ट्रंप के इस टैरिफ से यूरोपीय देशों में खलबली मची है। वे आपात बैठकें कर रहे हैं। रविवार को ईयू के 27 देशों के एंबेसडर मिले और ग्रीनलैंड एवं ट्रैरिफ की धमकियों पर चर्चा की। यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया है कि ट्रंप ने यदि उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया तो वे भी शांत नहीं बैठेंगे, जैसे को तैसा जवाब देंगे। टैरिफ पर अमेरिका को जवाब देने में फ्रांस सबसे आगे है।

क्या है EU का 'ट्रेड बाजूका'?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईयू को अपना 'एंटी कोअर्सन इंस्ट्रूमेंट' जिसे 'ट्रेड बाजूका' कहते हैं, उसे लागू करने के लिए तैयार रहने को कहा है। इस 'ट्रेड बाजूका' के तहत यूरोपीय देश अपने यहां अमेरिकी सामानों के आयात पर रोक लगा सकते हैं। 'ट्रेड बाजूका' कोई आधिकारिक नियम नहीं है बल्कि व्यापार के जरिये शक्तिशाली और आक्रामक जवाबी कार्रवाई का एक विकल्प और कारोबार नियंत्रित करने की एक व्यवस्था है।

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EU ने दिसंबर 2021 में इस एसीआई का प्रस्ताव किया और नवंबर 2023 में इस व्यवस्था को अपनाया। यह 'ट्रेड बाजूका' 27 दिसंबर 2023 से प्रभाव में आ गया। ट्रंप की इस 10 प्रतिशत वाली धमकी को, काउंटर करने के लिए यूरोपीय देश तैयार हैं।

2024 में ईयू-US के बीच 1.7 ट्रिलियन यूरो का व्यापार

टैरिफ पर ट्रंप यदि आगे बढ़े तो वे भी 'ट्रेड बाजूका' लगाएंगे। जाहिर है कि इससे ईयू और ट्रंप के बीच तनाव और बढ़ेगा। अमेरिका जो कि बहुत सारे उत्पाद यूरोप में बेचता आया है, वहां उसकी पहुंच होना बंद हो जाएगी। इससे ट्रंप पर दबाव बनना शुरू हो जाएगा। यूरोप और अमेरिका के बीच कारोबार की अगर बात करें तो यह बहुत ज्यादा है। साल 2024 में ईयू और अमेरिका के बीच 1.7 ट्रिलियन यूरो का व्यापार हुआ। व्यापार के लिहाज से यह बहुत बड़ा फिगर है क्योंकि कुल वैश्विक कारोबार में अमेरिका और ईयू की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है।

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एक साथ कई मोर्चा खोल रहे ट्रंप

ब्रिटेन ईयू में नहीं हैं लेकिन यूरोप का हिस्सा है, यूरोपीय देशों में वह अमेरिका का सबसे करीबी और भरोसेमंद साथी है। ट्रंप ने उसे भी नहीं छोड़ा है। वह उस पर भी 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कह चुके हैं। इस पर ब्रिटेन के पीएम किएर स्टार्मर ने सोमवार को कहा कि अपने सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाना पूरी तरह से गलत है और गठबंधन के अंदर मतभेदों का दूर करने का यह सही तरीका नहीं है और न ही इससे ग्रीनलैंड की सुरक्षा मजबूत होगी। ट्रेड वार किसी के हित में नहीं है लेकिन ट्रंप किसी की सुनने को तैयार नहीं है। वह दनदनाते फिर रहे हैं। खासकर वेनेजुएला में एक्शन के बाद वह और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। वह एक साथ कई मोर्चा खोल रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही नाटो और यूरोप के ज्यादातर देश अमेरिका के अच्छे-बुरे कर्मों में उसका साथ देते आए हैं। इराक, सीरिया, अफगानिस्तान, लीबिया में वे जाकर उसके लिए लड़े, अपना खून बहाया। फिर भी ट्रंप दोस्तों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव कर रहे हैं। अब वह ईयू को अपना दुश्मन बना रहे हैं।

ग्रीनलैंड में अपनी सेना भेज रहे EU के देश

दक्षिण अमेरिकी देशों मैक्सिको, ब्राजील, कोलंबिया को वह पहले ही धमका चुके हैं। कनाडा जिसके यूएस के साथ बहुत ही गहरे संबंध रहे हैं, उसे अपना 51वां राज्य बनाने की धमकी देकर उसे दूर कर दिया है। कनाडा चीन के पास जा रहा है। कारोबार के लिए उससे डील कर रहा है तो यूरोप के देश ग्रीनलैंड में यूएस के खिलाफ अपने सैनिक भेज रहे हैं। यह अलग बात है कि अमेरिकी सेना का मुकाबला यूरोप के सभी देश मिलकर भी नहीं कर सकते लेकिन ग्रीनलैंड पर वे सरेंडर करने के मूड में नहीं हैं। वे लड़ने को तैयार हैं। कहने का मतलब है यह है कि भले ही आप बहुत ताकतवर हैं लेकिन एक साथ कई मोर्चा खोलने से आप फंस जाते हैं। ट्रंप वही काम कर रहे हैं।

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