- हिज्बुल्लाह के खिलाफ एक 'बफर जोन' बनाने की तैयारी कर रहा इजरायल।
- बाइबिल की किताब 'जेनेसिस' में है ग्रेटर इजरायल बनाने का जिक्र।
- इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने 'ग्रेटर इजरायल' का एक नक्शा दिखाया था
"असली जीत, लड़ाई से पहले ही तय हो जाती है, जब आप पूरी तैयारी, सही जानकारी और मजबूत रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं।" सन त्जू द्वारा लिखित 'द आर्ट ऑफ वॉर' की यह एक प्रसिद्ध लाइन है।
28 फरवरी से ही अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) जारी है। इस सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया को मैदान-ए-जंग बना दिया। तेल और गैस की आपूर्ति ठप्प हो गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने ऐसी नाकाबंदी की है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की नैय्या डगमगा रही है। लेकिन, इस भीषण सैन्य संघर्ष के बीच भी इजरायल एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसने अरब देशों की नींद उड़ा दी है। युद्ध के बीच 'ग्रेटर इजरायल' के निर्माण की सुगबुगाहट बढ़ गई है।
क्या है 'ग्रेटर इजरायल' की कल्पना?
'ग्रेटर इजरायल' के तहत एक ऐसे यहूदी देश बनाने की कल्पना की गई है, जो मिस्र में नील नदी से लेकर इराक में यूफ्रेट्स नदी तक फैला हो और जिसमें फिलीस्तीन, लेबनान और जॉर्डन के साथ-साथ सीरिया, इराक, मिस्र और सऊदी अरब के भी बड़े हिस्से शामिल होंगे।
इस विचार का आधार हिब्रू बाइबिल में दी गई यहूदी भूमि की परिभाषा के मुताबिक है। 19वीं सदी में यहूदी विद्वान थियोडोर हर्जल ने पहली बार इस विचार को रखा था।
ग्रेटर इजरायल को दर्शाते नक्शे की एआई इमेज। AI IMAGE
गॉड का यहूदियों से वादा...
बाइबिल की किताब 'जेनेसिस' के अध्याय 15:18–21 में दिए गए ईश्वर के वादे की याद दिलाता है। 4,000 साल से भी पहले बाइबिल में लिखा गया था कि भगवान ने इब्राहिम को एक जमीन देने का वादा किया था। इसमें ईश्वर अब्राम से कहते हैं "मैं तुम्हारे वंशजों को यह जमीन देता हूं। मिस्र की नदी से लेकर उस महान नदी यूफ़्रेट्स तक, यह जमीन केनी, केनिजी, कद्मोनी, हित्ती, पेरिजी, रेफाई, अमोरी, कनानी, गिर्गाशी और येबूसी लोगों की है।"
कई यहूदी विद्वान बाइबिल में बताए गए वादे के अनुसार “मिस्र की वादी” को नील नदी की पूर्वी शाखा मानते हैं। वहीं यूफ्रेट्स नदी, जो मध्य पूर्व या पश्चिमी एशिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है, लगभग 2,800 किलोमीटर लंबी है और तुर्की से शुरू होकर सीरिया और इराक के माध्यम से फारस की खाड़ी तक बहती है। यहूदी इस नील नदी की शाखा से लेकर यूफ्रेट्स नदी तक फैले क्षेत्र को “प्रॉमिस्ड लैंड” कहते हैं।
इजरायल सहित खाड़ी देशों के नक्शे की एआई इमेज। AI IMAGE
जब दुनिया ने पहली बार देखी 'ग्रेटर इजरायल' की झलक
ग्रेटर इजरायल की कल्पना की पहली झलक दुनिया ने साल 1967 में देखी। जब इजरायल ने एक साथ 6 अरब देशों के साथ युद्ध किया। इस युद्ध के बाद इजरायल ने गाजा पट्टी, सिनाई प्रायद्वीप, वेस्ट बैंक और गोलान हाइट्स पर कब्जा कर लिया।
बात की जाए मौजूदा समय की तो साल 2022 में 'नेसेट' (संसद) के चुनावों के बाद से ये एक आम विचार बन चुका है। वहीं, 2023 में Axios ने रिपोर्ट किया था कि इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने पेरिस में एक भाषण देते समय 'ग्रेटर इजरायल' का एक नक्शा दिखाया था जिसमें जॉर्डन और कब्जे वाले वेस्ट बैंक को इजरायल का हिस्सा बताया गया था।
सबसे बड़ा सवाल है कि युद्ध के समय इजरायल के इस प्रोजेक्ट का जिक्र क्यों हो रहा है?
दरअसल, एक तरफ जहां अमेरिका, ईरान से सीधी टक्कर ले रहा है। वहीं, दूसरी ओर इजरायल, लेबनान में घुसकर हमला कर रहा है। इजरायल का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि किसी भी हाल में ईरान के भीतर सत्ता परिवर्तन के साथ खामेनेई शासन का खात्मा हो। ईरान में एक ऐसी सत्ता स्थापित की जाए जो भले इजरायल का दोस्त न हो, लेकिन दुश्मन भी न हो।
वहीं,इजरायल का एक मकसद ईरान के प्रॉक्सी संगठन हिज्बुल्लाह को खत्म करना है। इजरायल अब हिज्बुल्लाह के खिलाफ एक 'बफर जोन' बनाना चाह रहा है। इसके बाद ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या इजरायल ने अपने 'ग्रेटर इजरायल' प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
इजरायली हमले के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत की तस्वीर।
समय के साथ इजरायल का हो रहा विस्तार
इजरायल के विस्तारवाद नीति को दुनिया खासकर खाड़ी देश कभी हल्के में नहीं लेती। दरअसल, इतिहास में झांके तो साल 1948 से लेकर अब तक इजरायल का लगातार विस्तार होता जा रहा है।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इजरायल का क्षेत्रीय विस्तार काफी चौंकाने वाला माना जाता है। जिस देश की शुरुआत लगभग 14,000 वर्ग किलोमीटर के दायरे से हुई थी, उसका आधिकारिक क्षेत्रफल आज करीब 22,072 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच चुका है। इसमें गोलन हाइट्स जैसे वे क्षेत्र भी शामिल हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय विरोध के बावजूद इजरायल अपने नक्शे का हिस्सा मानता है।
नेतन्याहू की 'गहराई से जुड़ी' वाली बात
यह जानना जरूरी है कि इजरायल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस प्रोजक्ट को लेकर कितना सिरियस हैं। साल 2025 में उन्होंने एक इंटरव्यू में कुछ ऐसा कहा था, जिसकी चर्चा आज भी होती है।
बातचीत के दौरान होस्ट शेरोन गैल (Sharon Gal) ने उन्हें एक ताबीज भेंट किया, जिस पर एक खास नक्शा बना था। यह नक्शा सामान्य इजरायल के नक्शे जैसा नहीं था, बल्कि इसमें तथाकथित “ग्रेटर इजरायल” की अवधारणा दिखाई गई थी, जिसमें जॉर्डन, सीरिया और मिस्र के कुछ हिस्सों को भी शामिल बताया जाता है। जब होस्ट ने उनसे पूछा कि क्या वे इस विजन से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, तो नेतन्याहू ने कहा कि वे इससे “गहराई से जुड़े” हैं और इसे एक ऐतिहासिक व आध्यात्मिक मिशन के रूप में देखते हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की फोटो।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका काम केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि यहूदी समुदाय के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और पीढ़ियों से जुड़ा मिशन है। विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान केवल विचार तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी कुछ ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिन्हें इसी दिशा में बढ़ता हुआ माना जाता है। इस प्रक्रिया को “डी-फैक्टो एनेक्सेशन” कहा जाता है, जिसमें बिना औपचारिक घोषणा के धीरे-धीरे किसी क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया जाता है।
क्यों अलर्ट हैं खाड़ी देश?
गाजा के बाद इजरायल का टारगेट लेबनान बन चुका है। इजरायल की ओर से साफ तौर पर कहा जा चुका है कि लेबनान के दक्षिणी हिस्से में लितानी नदी तक एक बफर जोन बनाया जाएगा और इजराइली सेना सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखेगा। मतलब, साफ है कि लेबनान में इजरायल का कब्जा होगा। युद्ध के बीच लेबनान में लाखों लोग विस्थापित होने पर मजबूर हो चुके हैं।
मोटे तौर पर समझें तो एक तरफ जहां दुनिया अमेरिका-ईरान युद्ध में उलझी है, वहीं, दूसरी ओर इजरायल चुपचार खुद को 'ग्रेट'बनाने के मकसद में जुटा हुआ है। भले ही ट्रंप इस युद्ध के उद्देश्य को हर दिन अपने कपड़ों की तरह बदलते रहते हैं, लेकिन इजरायल अपना हर कदम पूरे प्लानिंग और दूर्दर्शिता के साथ आगे बढ़ा रहा है।
