केवल ड्रोन ही नहीं, PAK को भरपूर सैन्य मदद देता आया है तुर्किये, दोनों के बीच है दशकों पुरानी सैन्य साझेदारी

तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं सैन्य सहयोग कई दशक पुराना है। तुर्किये पाकिस्तानी सेना के लिए एक तरह से दूसरा 'चीन' है। वह पाकिस्तान के साथ युद्धाभ्यास करता आया है। उसने पाकिस्तान के पायलटों को प्रशिक्षित और लड़ाकू विमानों को उन्नत किया है। दोनों के बीच रणनीतिक एवं सैन्य सहयोग काफी मजबूत हैं।

Turkiye-Pakistan Defence Cooperation : 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपने सोंगर ड्रोन भेजकर पाकिस्तान की मदद करने वाला तुर्किये चर्चा में है। तुर्किये ने समय-समय पर पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति, उसके पुराने पड़ चुके हथियारों का आधुनिकीकरण और लड़ाकू विमानों के पायलटों को प्रशिक्षण देते आया है। दोनों देश एक साथ सैन्याभ्यास भी करते हैं। पाकिस्तान जब कभी भी मुसीबत में फंसता है तो चीन की तरह तुर्किये भी उसे बचाने के लिए आगे आता रहा है। वह कूटनीतिक रूप से उसका खुलकर समर्थन करता है। खासकर, कश्मीर मुद्दे पर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन हमेशा पाकिस्तान का साथ देते आए हैं। दोनों देशों के बीच दशकों से एक मजबूत और दीर्घकालिक रक्षा संबंध है। पाकिस्तान के साथ तुर्किये के रिश्ते, सैन्य एवं कूटनीतिक सहयोग को देखते हुए अगर उसे PAK का 'दूसरा चीन' कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा।

turkiye and pak

तुर्किये और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग काफी मजबूत है।

पाक-तुर्किये के बीच दशकों पुराना संबंध

पाकिस्तान और तुर्किये के संबंध दशकों से चले आ रहे हैं। दोनों अमेरिका-समर्थित बगदाद संधि और इसके बाद के केंद्रीय संधि संगठन (CENTO) का हिस्सा थे। तुर्किये और पाकिस्तान दोनों को अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा विभिन्न कारणों से हथियारों पर प्रतिबंधों और सीमाओं का सामना करना पड़ा है। इससे दोनों देशों को रणनीतिक रूप से एक-दूसरे के करीब आने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

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