Hormuz Crisis: ईरान की सैन्य ताकत कभी भी अमेरिका और इजराइल का मुकाबला नहीं कर सकती थी। इसलिए उसने अपने पास मौजूद एक बेहद प्रभावी हथियार का सहारा लिया — भूगोल। होर्मुज ने दुनिया को कई सबक दिए हैं। सबसे बड़ा सबक ये है कि आज के दौर में जेट-मिसाइल नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से सबसे सटीक स्थिति ही आज का 'सबसे बड़ा हथियार' है। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई है। इससे कच्चे तेल की कीमत दोगुनी हो गई है, जिसका असर दुनिया भर में ईंधन, हीटिंग, खाने-पीने की चीजों से लेकर छुट्टियों तक हर चीज की कीमत पर पड़ रहा है। इससे डोनाल्ड ट्रंप को भी अपने फैसले पर फिर से सोचने पर मजबूर होना पड़ा। अब पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि होर्मुज का क्या होगा, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरती है।
ईरान के लिए होर्मुज बना ट्रंप कार्ड
ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य एक बेहद महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संपत्ति रहा है। इसकी हैरान करने वाली मजबूत स्थिति खेल सिद्धांत यानी गेम थ्योरी के एक क्लासिक सिद्धांत को दर्शाती है, जो एक तरह से रणनीतिक कार्रवाई का गणितीय अध्ययन है। इस सिद्धांत के अनुसार, जिसे कभी-कभी ‘रुबिनस्टीन बार्गेनिंग’ कहा जाता है, किसी भी संघर्ष में दोनों पक्षों की ताकत दो बातों पर निर्भर करती है- समाधान न होने पर उन्हें कितना नुकसान होगा, और वे समाधान पाने के लिए कितने अधीर हैं।
युद्ध जारी पहने पर ईरान को नुकसान
अगर युद्ध जारी रहता है, तो ईरान को निश्चित रूप से भारी नुकसान होगा। उसके मिसाइल और ड्रोन के भंडार खत्म होंगे और उसकी बुनियादी ढांचे पर बमबारी होती रहेगी। लेकिन तानाशाही शासन धैर्य रख सकता है और असंतोष को दबा सकता है। अमेरिका के लिए, संघर्ष जारी रखने का मतलब है करदाताओं के अरबों डॉलर और खर्च करना, वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी का खतरा है, जिसका बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों को देखते हुए, संभव है कि व्हाइट हाउस जल्दी ही धैर्य खो दे।
होर्मुज के कारण अमेरिका पड़ा कमजोर
इस तरह, होर्मुज जलडमरूमध्य ने अब तक के इस संघर्ष में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। दुनिया के लिए अपरिहार्य इस जलमार्ग की वजह से अमेरिका की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है जितनी पहले समझी जा रही थी। गेम थ्योरी यह भी संकेत देती है कि मजबूत स्थिति हासिल करने ने के लिए देशों और क्षेत्रों को अपने-अपने जलडमरूमध्य की तरह कुछ विकसित करना होगा—ऐसी चीज जिसकी दूसरों को जरूरत हो और जो उनकी बातचीत की स्थिति को मजबूत बनाए। यह जरूरी नहीं कि वह कोई समुद्री मार्ग ही हो। उदाहरण के लिए, चीन के पास वैश्विक विनिर्माण में दबदबा है। अधिकांश देशों के लिए चीन द्वारा बनाए गए उत्पादों के बिना रहना बेहद मुश्किल होगा। सब-सहारा अफ्रीका की ताकत उसके प्राकृतिक संसाधन हैं, जैसे कि दुनिया का अधिकांश कोबाल्ट कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में खनन किया जाता है। भविष्य में, यह महाद्वीप अपनी युवा और बढ़ती आबादी का भी लाभ उठा सकता है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्से तेजी से बूढ़े हो रहे हैं।
Hormuz ने दुनिया को क्या सिखाया?
यूरोपीय संघ की ताकत उसका एकल बाजार
इस बीच, यूरोपीय संघ (EU) की ताकत उसके एकीकृत एकल बाजार के बड़े आकार में रही है। उसने इस बाजार का इस्तेमाल करते हुए अपने उत्पादों और निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सुविधाएं हासिल कीं। साथ ही, वह दुनिया भर में खाद्य पदार्थों और अन्य उत्पादों पर यूरोपीय मानकों को लागू करने में भी सफल रहा। हालांकि, EU की यह ताकत बिल्कुल सुनिश्चित नहीं है। अब अधिकांश आर्थिक विकास चीन, भारत या इंडोनेशिया जैसे देशों से आने की उम्मीद है, जिससे यूरोप की बातचीत की स्थिति कमजोर पड़ रही है। शोध बताते हैं कि इस ताकत को वापस पाने का एकमात्र तरीका यूरोपीय बाजारों को और अधिक एकीकृत करना और EU का और विस्तार करना है। इसी वजह से, संभव है कि यूनाइटेड किंगडम (UK) जल्द ही किसी न किसी रूप में फिर से यूरोपीय एकल बाजार में लौट आए। ब्रेक्सिट ने UK और EU दोनों की अंतरराष्ट्रीय बातचीत की स्थिति को काफी कमजोर कर दिया है।
सभी देश एक-दूसरे पर निर्भर
होर्मुज जलडमरूमध्य जैसा अपना प्रभाव क्षेत्र होना अब और भी महत्वपूर्ण लगता है, क्योंकि वैश्विक गठबंधन और विभाजन पहले जितने स्पष्ट नहीं रह गए हैं। पुराने गठबंधन और वादे काफी हद तक अपना महत्व खो चुके हैं। अमेरिका ने NATO छोड़ने की धमकी दी है और कनाडा और ग्रीनलैंड को अपने में मिलाने की बात कही है। लेकिन एक ऐसी दुनिया में जहां भरोसेमंद गठबंधन कम हो गए हैं, सभी देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं। सप्लाई चेन इतनी जुड़ी हुई हैं कि किसी एक देश में छोटा सा बदलाव भी दुनिया के दूसरे हिस्से में बड़ा असर डाल सकता है। उदाहरण के तौर पर, ईरान के पास तेल टैंकरों की आवाजाही रुकने से इस गर्मी में ब्रिटेन के ग्रोसरी स्टोर्स में पोर्क सॉसेज की कमी हो सकती है।
सब कुछ “फायदे” का खेल
इन हालात में, गेम थ्योरी बताती है कि सफलता के लिए दो चीजें जरूरी हैं: किसी एक साझेदार पर निर्भर न रहना, और ऐसी चीज पेश करना जिसके बिना दूसरे काम न चला सकें। जब सब कुछ “फायदे” (leverage) पर निर्भर हो, तो असली ताकत उस स्थिति से आती है जिसे नजरअंदाज करना संभव न हो। आने वाले दशकों में वही देश आगे बढ़ेंगे, जो होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी अपनी रणनीतिक ताकत विकसित कर पाएंगे और यह भी सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें किसी और के रास्ते से गुजरने की जरूरत न पड़े।
