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17 राज्यों, केंदशासित प्रदेशों में अब SSR, जानें SIR से कैसे है यह अलग, क्या होगी इसकी प्रक्रिया

SSR का मूल मकसद है मौजूदा मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना। इसका लक्ष्य पात्र मतदाताओं, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों को सूची में जोड़ना, प्रविष्टियों की गलतियां सुधारना और सूची की शुद्धता बढ़ाना है। अर्हता तिथि का मतलब सरल है। जो नागरिक 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष के हो जाएंगे।

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Photo : PTI
चुनाव आयोग ने राज्यों के दिए SSR कराने के निर्देश।
Written by: आलोक कुमार राव
Updated Oct 16, 2026, 14:28 IST
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Special Summary Revision: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर देश में बहस थमी नहीं है। इसी बीच चुनाव आयोग (ECI) ने एक और प्रक्रिया की घोषणा कर दी है, जिसका नाम है विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (स्पेशल समरी रिवीजन, SSR)। नाम मिलते-जुलते हैं, इसलिए आम लोग अक्सर दोनों को एक ही समझ लेते हैं। जबकि दोनों का तरीका, दायरा और असर अलग है। इस लेख में समझते हैं कि SSR क्या है, क्यों कराया जा रहा है, इसकी प्रक्रिया क्या होगी और यह SIR से किस तरह अलग है।

आयोग का निर्देश: कहां-कहां होगा SSR?

भारत निर्वाचन आयोग ने 15 अक्टूबर को 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मतदाता सूची के SSR का निर्देश दिया है, जिसकी अर्हता तिथि 1 जनवरी 2027 रखी गई है। इस चरण में अंडमान-निकोबार, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा जैसे वे राज्य भी हैं जहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। आयोग ने यह भी साफ किया है कि जिन राज्यों में SIR चल रहा है या हाल में पूरा हुआ है, जैसे आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और दिल्ली, वहां SSR का कार्यक्रम अलग से घोषित होगा। कानूनी आधार की बात करें तो यह कवायद जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत होगी। आयोग ने यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत जारी किया है।

SSR कराने का उद्देश्य क्या है?

SSR का मूल मकसद है मौजूदा मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना। इसका लक्ष्य पात्र मतदाताओं, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों को सूची में जोड़ना, प्रविष्टियों की गलतियां सुधारना और सूची की शुद्धता बढ़ाना है। अर्हता तिथि का मतलब सरल है। जो नागरिक 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष के हो जाएंगे, वे नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने आगे की तीन तिमाहियों की अर्हता तिथियों के लिए भी अग्रिम आवेदन की सुविधा दी है। आयोग का निर्देश यह भी है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं 16 व 19 के अनुसार हर पात्र व्यक्ति मतदाता के रूप में दर्ज हो। यानी जोर नए नाम जोड़ने और छूटे हुए पात्र लोगों को शामिल करने पर है।

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चुनावी लिहाज से भी इसका महत्व है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में फरवरी 2027 तक चुनाव होने हैं, और यह आदेश SIR को लेकर जारी विवाद के बीच आया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार SSR का फोकस नए मतदाताओं और SIR में छूट गए लोगों को शामिल करने पर है। इस नाते यह उन राज्यों के लिए खास अहम है जहां SIR के बाद सूची छोटी हुई थी।

क्या होगी SSR की प्रक्रिया?

पूरी प्रक्रिया की समय-सारणी तय है। मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 2 नवंबर तक होगा। प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची 12 नवंबर को प्रकाशित होगी। दावे और आपत्तियाँ 11 दिसंबर तक दाखिल हो सकेंगी, उनका निपटारा 28 दिसंबर तक होगा और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को आएगी।

आम नागरिक के लिए इसका व्यावहारिक मतलब ये है-

ड्राफ्ट सूची में नाम जांचें। 12 नवंबर के बाद अपना नाम, पता और बाकी विवरण देखें। सही फॉर्म भरें। SSR में नाम जोड़ने, हटवाने या सुधार के लिए फॉर्म 6, 7 और 8 जैसे वैधानिक आवेदन भरे जाते हैं। नए नाम के लिए आमतौर पर फॉर्म 6 है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक पात्र नागरिक फॉर्म 6 आयोग के वोटर सर्विसेज पोर्टल या ECINET मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। पता बदला हो तो अपडेट करें। यानी जो मतदाता घर बदल चुका है, उसे नया पता दर्ज कराने के लिए खुद फॉर्म भरना होगा। 11 दिसंबर की समय-सीमा याद रखें। दावे-आपत्तियों की अवधि इसी दिन खत्म होगी। प्रशासनिक स्तर पर आयोग ने सख्ती भी दिखाई है। मुख्य सचिवों को सुनिश्चित करना है कि DEO, ERO और AERO का कोई पद खाली न रहे। साथ ही ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन से अंतिम सूची तक इस काम से जुड़े किसी अधिकारी का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं होगा।

SSR और SIR में अंतर क्या है?

यही सबसे अहम सवाल है। आसान शब्दों में, SSR मरम्मत है और SIR नए सिरे से निर्माण

1. मूल तरीका। SSR में पहले से मौजूद सूची को आधार मानकर उसमें नाम जोड़े, हटाए या सुधारे जाते हैं। इसके उलट SIR में मतदाता सूची का लगभग पूरा पुनर्निर्माण होता है, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है।

2. घर-घर सर्वे। SIR में सूची नए सिरे से बनती है और उसमें बूथ-स्तरीय अधिकारी घर-घर जाते हैं, जबकि SSR के बाद की सूचियां SIR से बनी अंतिम सूची पर ही आधारित रहती हैं। SSR में सक्रिय पहल ज्यादातर नागरिक की ओर से होती है, यानी आवेदन और आपत्ति के जरिए।

3. दस्तावेज और बोझ। बिहार के SIR में 2003 के बाद पंजीकृत लोगों को पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज देने पड़े थे। SSR में ऐसी पूरी सूची को शुरू से साबित करने की शर्त नहीं होती।

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4. नियमितता। SSR साल में चार बार होता है और हर बार सूची प्रकाशित कर जनता से आपत्तियां मंगाई जाती हैं। दूसरी ओर आयोग ने SIR का आदेश 24 जून 2025 को दिया था, यानी दो दशकों से चली आ रही सालाना SSR परंपरा से हटकर। कानूनी तौर पर निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 आयोग को सूची का गहन, संक्षिप्त या दोनों का मिश्रित पुनरीक्षण करने की छूट देते हैं।

5. नतीजे का असर। SIR में सूची का आकार बड़ा बदल सकता है। मिसाल के तौर पर बिहार की अंतिम सूची में 7.42 करोड़ मतदाता रहे, जबकि पहले यह संख्या 7.89 करोड़ थी। SSR आमतौर पर इतने बड़े उलटफेर वाली प्रक्रिया नहीं मानी जाती।

विवाद और सवाल

SSR की घोषणा का समय राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। विपक्षी प्रतिनिधियों ने आयोग से कड़े संस्थागत जांच-बिंदु बनाने को कहा है ताकि संक्षिप्त पुनरीक्षण में कमजोर वर्गों के नाम मनमाने ढंग से न कटें। उत्तर प्रदेश में तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही आशंका जता चुके थे कि चुनाव से पहले एक और पुनरीक्षण हो सकता है, और कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने को कहा था। दूसरी ओर आयोग का रुख है कि वह मनमाने तरीके से नाम हटाने के आरोपों को खारिज करता है और 'कोई मतदाता छूटे नहीं' अभियान चला रहा है। SSR मूल रूप से एक नियमित, कानूनसम्मत और अपेक्षाकृत हल्की प्रक्रिया है। इसके केंद्र में नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना और मौजूदा सूची को दुरुस्त करना है। इसकी असली परीक्षा 12 नवंबर को ड्राफ्ट सूची आने के बाद शुरू होगी, जब देखा जाएगा कि कितने पात्र लोग जुड़ पाए और दावे-आपत्तियों का निपटारा कितनी पारदर्शिता से हुआ। नागरिकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ड्राफ्ट सूची में अपना नाम जांचें और 11 दिसंबर से पहले जरूरी फॉर्म भर दें।

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