चांद पर इंसान के जूतों की छाप, कुछ याद आया? जो तस्वीर आपके दिमाग में बन रही है वह 1969 की है। विज्ञान की किताबों की रोचकता में इजाफा करने वाली उस तस्वीर को 50 साल से भी अधिक हो गए हैं। 1972 में NASA के अपोलो 17 मिशन के करीब आधी सदी बाद चांद से जुड़ी ऐसी तैयारी चल रही है कि यह घटना ऐतिहासिक होने वाली है। इंसान एक बार फिर चांद की ओर रुख कर रहा है। आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के जरिए चार अंतरिक्ष यात्री उस रास्ते की जांच करेंगे, जो आने वाली पीढ़ी के लिए चांद पर बसने की नींव रखेगा। यह सिर्फ विज्ञान या तकनीक की उड़ान नहीं है, बल्कि मानवीय साहस, सपनों और पारिवारिक बलिदानों की एक अनूठी दास्तां है।
Artemis II की ऐतिहासिक लॉन्चिंग
अपोलो मिशन के बाद पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर नासा (NASA) के एक ऐसे मिशन पर टिकी हैं, जो भविष्य की दिशा बदल देगा। आर्टेमिस II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चांद की कक्षा (Orbit) में जाने के लिए तैयार हैं। 1 अप्रैल, बुधवार को शाम 6:24 बजे (EDT) यानी भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की अल सुबह 3:54 मिनट पर इस मिशन के लॉन्च का समय तय किया गया है। लेकिन इस मिशन की खास बात सिर्फ रॉकेट या स्पेसक्राफ्ट नहीं है, बल्कि वे चार इंसान हैं जो अपने पीछे अपने परिवारों को छोड़कर एक ऐसी साहसिक यात्रा पर निकल रहे हैं, जहां जोखिम और रोमांच की कोई सीमा नहीं है। आइए इस ऐतिहासिक मिशन, इसके जांबाज नायकों और 10 दिनों के उस रोमांचक सफर का पूरा लेखा-जोखा समझते हैं।
कौन हैं ये अंतरिक्ष यात्री?
इस चालक दल में तीन नासा के अंतरिक्ष यात्री, कमांडर रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं, साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के जेरेमी हैनसेन भी इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा हैं। ये न केवल कुशल पायलट, इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं, बल्कि पैरेंट्स और जीवनसाथी भी हैं जो अपने बच्चों के भविष्य और मानवता के सपनों के बीच संतुलन बना रहे हैं।
Artemis II के अंतरिक्ष यात्री
1. रीड वाइसमैन: एक सिंगल फादर का साहस (कमांडर)
50 वर्षीय रीड वाइसमैन अमेरिकी नौसेना के अनुभवी पायलट हैं। 2014 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर छह महीने बिताने वाले वाइसमैन आज एक अलग चुनौती का सामना कर रहे हैं। 2020 में अपनी पत्नी को कैंसर के कारण खोने के बाद, उन्होंने अपनी दो किशोर बेटियों को अकेले पाला है। वे कहते हैं, "एक अकेला पैरेंट होना मेरे जीवन का सबसे कठिन लेकिन सबसे संतोषजनक दौर रहा है।" वाइसमैन ने अपने बच्चों से जोखिम के बारे में कभी कुछ नहीं छिपाया। वे बताते हैं कि एक बार उन्होंने अपनी बेटियों के साथ टहलते हुए उन्हें बताया था कि वसीयत कहां रखी है और अगर उन्हें कुछ हो जाता है, तो आगे क्या करना है। उनके लिए, यह बातचीत डर के बारे में नहीं, बल्कि भरोसे और सच्चाई के बारे में है। चांद पर जाते समय वे अपने साथ एक छोटी नोटबुक ले जा रहे हैं ताकि वे अपने विचारों को वहां लिख सकें।
2. क्रिस्टीना कोच: रिकॉर्ड तोड़ने वाली 'इलेक्ट्रिकल इंजीनियर' (मिशन स्पेशलिस्ट)
क्रिस्टीना कोच (47) वह नाम है जिसने अंतरिक्ष में किसी महिला का सबसे लंबे समय तक (328 दिन) रहने का रिकॉर्ड बनाया है। अब वह चांद की यात्रा करने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। क्रिस्टीना के कमरे में बचपन में अपोलो 8 की 'अर्थराइज' (Earthrise) फोटो का पोस्टर लगा होता था। जब उन्हें पता चला कि वह फोटो किसी ऑटोमैटिक कैमरे ने नहीं, बल्कि एक इंसान ने खींची थी, तभी उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठान ली थी। क्रिस्टीना के लिए यह मिशन भावनात्मक जुड़ाव का भी है। वे अपने साथ अपने प्रियजनों के हाथ से लिखे नोट्स ले जा रही हैं। उनके पति उनके इस जोखिम भरे सफर में उनके सबसे बड़े सहयोगी हैं। क्रिस्टीना मजाक में कहती हैं कि इस बार वह ISS की तरह चांद से फोन करके पति को यह नहीं बता पाएंगी कि अलमारी में सामान कहां रखा है, उन्हें खुद ही ढूंढना होगा।
3. जेरेमी हैनसेन: कनाडा का पहला 'चंद्र यात्री' (मिशन स्पेशलिस्ट)
50 वर्षीय जेरेमी हैनसेन पूर्व फाइटर पायलट हैं। हालांकि यह उनका पहला अंतरिक्ष सफर है, लेकिन वे नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने वाले पहले कनाडाई रहे हैं। वे चांद की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनकर इतिहास रचेंगे। हैनसेन ने अपने परिवार को तैयार करने के लिए उनके साथ 'आर्टेमिस I' का लॉन्च वीडियो देखा ताकि वे रॉकेट की आवाज और धुएं को देखकर डरे नहीं। हैनसेन अपनी पत्नी और तीन बच्चों के लिए चांद के आकार के चार पेंडेंट ले जा रहे हैं, जिन पर "Moon and Back" लिखा है। साथ ही, वे अपनी यात्रा में कनाडाई संस्कृति की पहचान के रूप में 'मेपल सिरप' और 'मेपल कुकीज' भी साथ रखेंगे।
4. विक्टर जे. ग्लोवर: आधुनिक अंतरिक्ष जगत के 'करिश्माई' पायलट
49 वर्षीय विक्टर ग्लोवर चांद की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। तीन मास्टर डिग्री धारक ग्लोवर को उनके साथी "IKE" (I Know Everything) कहते हैं। वे न केवल एक बेहतरीन पायलट हैं, बल्कि अपनी टीम के सबसे करिश्माई सदस्य भी माने जाते हैं। ग्लोवर चांद की तैयारी के लिए 1960 के दशक के अपोलो और जेमिनी मिशन के मूल पत्रों का अध्ययन कर रहे हैं। वे अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठी और परिवार की विरासत की चीजें ले जा रहे हैं।
नासा का आर्टेमिस II स्पेस लॉन्च सिस्टम
10 दिनों का रोमांच: पल-पल का सफर
अब आइए समझते हैं कि इस स्पेस मिशन क्या-क्या होगा। आर्टेमिस II मिशन लगभग 10 दिनों का होगा। यह चांद पर उतरेगा नहीं, बल्कि उसके चारों ओर एक चक्कर लगाकर वापस आएगा।
पहला और दूसरा दिन: पृथ्वी की कक्षा में जांच
लॉन्च के बाद, ओरियन (Orion) कैप्सूल पृथ्वी की एक ऊंची अंडाकार कक्षा में प्रवेश करेगा। यहां चालक दल जीवन रक्षक प्रणालियों, संचार और नेविगेशन की गहन जांच करेगा। अंतरिक्ष यात्री पहली बार इस चरण में मैन्युअल कंट्रोल लेकर स्पेसक्राफ्ट की टेस्टिंग भी करेंगे।
तीसरा और चौथा दिन: चंद्रमा की ओर कूच
जांच पूरी होने के बाद, ओरियन का इंजन 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन' (Translunar Injection) प्रक्रिया को अंजाम देगा। यह ओरियन को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकालकर चांद की ओर धकेल देगा। यह वह समय होगा जब ये चार इंसान पृथ्वी से अब तक की सबसे अधिक दूरी पर होंगे।
पांचवां से आठवां दिन: चंद्रमा का चक्कर और वापसी
ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा। यह एक 'फ्री-रिटर्न' ट्रैजेक्ट्री (Free-return trajectory) होगा, यानी चांद का गुरुत्वाकर्षण खुद-ब-खुद कैप्सूल को वापस पृथ्वी की ओर मोड़ देगा। इस दौरान यात्री चांद की सतह को बहुत करीब से देख पाएंगे।
नौवां और दसवां दिन: स्प्लैशडाउन
वापसी का सफर सबसे चुनौतीपूर्ण होगा। ओरियन करीब 40,233 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इस दौरान कैप्सूल की हीट शील्ड अत्यधिक तापमान झेलेगी। अंत में, यह प्रशांत महासागर में गिरेगा, जहां रिकवरी टीमें चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालेंगी।
लॉन्च की उलटी गिनती: केनेडी स्पेस सेंटर में हलचल
रोक्को पेट्रोन लॉन्च कंट्रोल सेंटर में काउंटडाउन घड़ी टिक-टिक कर रही है। इंजीनियर SLS (Space Launch System) रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट के सिस्टम की जांच कर रहे हैं। रॉकेट में लाखों गैलन सुपर-कूल्ड लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन भरने की तैयारी चल रही है। चारों अंतरिक्ष यात्री वर्तमान में सख्त स्वास्थ्य निगरानी और क्वारंटाइन में हैं। वे एक नियंत्रित नींद और खास न्यूट्रीशन प्लान का पालन कर रहे हैं ताकि लॉन्च के दिन उनकी ऊर्जा और हाइड्रेशन का स्तर बना रहे। मौसम विभाग के अनुसार, लॉन्च के दिन मौसम अनुकूल रहने की 80% संभावना है, हालांकि बादलों और तेज हवाओं पर नजर रखी जा रही है।
मानवता के लिए एक छोटा कदम
यह मिशन सिर्फ चांद के चारों ओर चक्कर लगाने के बारे में नहीं है। जैसा कि कमांडर वाइसमैन कहते हैं, यह आने वाले दशकों में चंद्रमा पर इंसानों के रहने और मंगल ग्रह पर चलने की दिशा में एक "छोटा कदम" है। जब ये चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल के अंदर बैठेंगे, तो वे अपने साथ पूरी दुनिया की उम्मीदें और विज्ञान की नई सीमाओं को पार करने का साहस लेकर जाएंगे।
