अविश्वास प्रस्ताव पर नरेंद्र मोदी की कप्तानी पारी! सेट करना चाहा 2024 के लिए 'मैदान', समझें- BJP का प्लान

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Aug 11, 2023, 12:02 AM IST

Narendra Modi on No-confidence Motion: दरअसल, मोदी सरकार ने नौ साल के अब तक के कार्यकाल में दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया। हालांकि, यह भी विफल रहा जिसका पहले से अंदाजा था। केंद्र के खिलाफ इस मोशन को लोकसभा ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। इस पर वोटिंग ही नहीं हुई क्योंकि विपक्ष पीएम के जवाब देने के समय ही सदन से वॉकआउट कर गया था।

Narendra Modi on No-confidence Motion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष को जमकर घेरा, लपेटा और धोया। गुरुवार (10 अगस्त, 2023) को संसद के निचले सदन लोकसभा में उनके भाषण से ये संकेत तो सबको साफ मिल गए, मगर उन्होंने इसके साथ ही आगामी चुनावों के लिए नैरेटिव सेट करने का पुरजोर प्रयास किया। सवा दो घंटे से अधिक समय (लगभग 132 मिनट्स) के अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जिस कदर विरोधियों को पानी पी-पीकर कोसा उसने राजनीतिक गलियारों में स्पष्ट संदेश दिया कि उन्होंने नो-कॉन्फिडेंस मोशन (अविश्वास प्रस्ताव) का नैरेटिव बदलने की पूरी कोशिश की। पीएम ने चुन-चुनकर एक-एक मसले पर अपनी बात रखी। फिर चाहे वह अविश्वास प्रस्ताव हो, विवपक्षी गठजोड़ 'इंडिया' को जवाब हो, कांग्रेस के पूर्व चीफ राहुल गांधी पर प्रहार हो या फिर मणिपुर हिंसा पर अपना बयान हो।

मोदी की स्पीच में 98 बार गलतियां हुईं। 22 दफा ठहाके लगे, जबकि 13 बार विपक्षी सदस्यों की तरफ से टोकाटाकी की गई और इस दौरान मोदी ने हिंसा की आग में झुलसे नॉर्थ ईस्ट के मणिपुर का जिक्र 29 बार किया। वैसे, सदन से पीएम मोदी के ये जुबानी हमले 2024 के आम चुनाव और उनसे पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कुछ और सूबों के विधानसभा चुनाव के नैरेटिव से जुड़ी पिच को बनाने वाली जमीन या पृष्ठभूमि समझे गए। प्रधानमंत्री की हालिया स्पीच एक किस्म की "कप्तानी पारी" थी, जो कि नैरेटिव सेट करने वाली थी। पीएम के भाषण के केंद्र में कांग्रेस और राहुल गांधी रहे।

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