कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान जल्द ही कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और एआईसीसी प्रभारियों में बड़े फेरबदल कर सकता है। दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मंथन तेज हो गया है।
साउथ इंडिया पर कांग्रेस का खास फोकस
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस दक्षिण भारत में संगठन को और मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। खास तौर पर केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जा सकते हैं। पार्टी का मानना है कि आगामी चुनावी चुनौतियों से पहले राज्यों में संगठन को ज्यादा एक्टिव और आक्रामक बनाने की जरूरत है।
कर्नाटक में नई जिम्मेदारी की तलाश
कर्नाटक कांग्रेस में भी बड़ा बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच पार्टी नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया सरकार में मंत्री सतीश जारकीहोली का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं एआईसीसी के हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद का नाम भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले ही नए अध्यक्ष को लेकर फैसला हो सकता है।
पंजाब में खराब प्रदर्शन के बाद मंथन
पंजाब कांग्रेस में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाए जाने की चर्चा तेज है। हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन और बढ़ती गुटबाजी ने नेतृत्व को चिंतित किया है। पार्टी का एक धड़ा जालंधर सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश की कमान सौंपने की पैरवी कर रहा है।वही जट सिख में सुखजिंदर सिंह रंधावा का भी नाम रेस में आगे चल रहा है.हाईकमान नहीं चाहता कि चुनाव से पहले अंदरूनी विवाद और बढ़े।
केरल में जातीय और समुदाय समीकरण अहम
केरल में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है। मौजूदा अध्यक्ष सनी जोसेफ सरकार में मंत्री बन चुके हैं, जिसके बाद नए चेहरे की तलाश शुरू हो गई है। यहां जातीय और समुदाय समीकरण को ध्यान में रखते हुए सांसद कोडिकुन्निल सुरेश, बेनी बेहानन और एंटो एंटनी जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर दलित और ईसाई चेहरे को प्राथमिकता देने को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
तमिलनाडु और राजस्थान में भी बदलाव की चर्चा
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थागई को हटाया जाना लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि हाईकमान उनके कामकाज से संतुष्ट नहीं है। वहीं राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा और उत्तर प्रदेश में अजय राय के नेतृत्व को लेकर भी समीक्षा जारी है। पार्टी नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या इन राज्यों में भी नई टीम की जरूरत है।
दिल्ली, छत्तीसगढ़ और असम पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और असम में भी संगठनात्मक बदलाव की संभावना है। पार्टी केवल प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि एआईसीसी स्तर पर भी कई प्रभारियों को बदलने की तैयारी में है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और असम के लिए नए प्रभारी नियुक्त किए जा सकते हैं।
संभावित बदलाव और नेताओं के नाम
- राजस्थान- गोविंद डोटासरा की जगह सचिन पायलट
- राजस्थान प्रभारी रंधावा को हटाया जा सकता है चर्चा है की उन्हें पंजाब अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
- सचिन पायलट को अगर राजस्थान PCC की जिम्मेदारी दी जाती है तो छत्तीसगढ़ महासचिव की जिम्मेदारी से उन्हें हटाया जा सकता है।
- गुजरात में विधानसभा चुनाव को देखते हुए महासचिव मुकुल वासनिक को हटाया जा सकता है।
- असम चुनाव में हार के बाद प्रभारी जितेंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है,ऐसे में असम के नए प्रभारी बनाये जा सकते है।
- गिरीश चोडंकर को गोवा PCC बनाया गया है, तमिलनाडु प्रभारी से उन्हें मुक्त किया जाएगा।
- महाराष्ट्र महासचिव रमेश चेन्नीथला केरल में मंत्री बन गए है ऐसे में अब उन्हें महाराष्ट्र प्रभारी की जिम्मेदारी से हटाया जाएगा।
- कई नॉन- परफ़ॉर्मर AICC सचिवों की भी छुट्टी हो सकती है।
- वरिष्ठ नेता बी के हरिप्रसाद को अगर कर्नाटक PCC की जिम्मेदारी मिलती है तो उनकी जगह हरियाणा प्रभारी किसी और नेता को बनाया जा सकता है।
2029 की तैयारी में कांग्रेस
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि संगठन को ग्राउंड लेवल तक मजबूत किए बिना आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन संभव नहीं है। इसी रणनीति के तहत राज्यों में नए चेहरों को जिम्मेदारी देने और संगठनात्मक ढांचे को फिर से सक्रिय करने की कवायद शुरू की गई है। राजनीतिक गलियारों में अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस हाईकमान कब और किन नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपता है।