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क्या ईरान जंग के कारण दो मोर्चों पर खुद फंस गया अमेरिका? दोस्त यूरोप हुआ डिफेंसलेस, दुश्मन रूस मजबूत

ईरान के साथ जंग के बीच अमेरिका अब यूरोप से पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम वापस मंगवा रहा है, जिन्हें पश्चिम एशिया में तैनात किया जा रहा है। पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम के हटाए जाने के बाद अब यूरोप, रूस के सामने अकेला पड़ता दिख रहा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अमेरिका, ईरान के साथ जंग के कारण जहां अपने दोस्तों को अकेला छोड़ रहा है, वहीं उसके प्रतिद्वंदी मजबूत हो रहे हैं।

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यूरोप से अमेरिका हटा रहा पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम
Curated by: Shishupal Kumar
Updated Mar 21, 2026, 12:42 IST
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शायद ईरान के साथ जंग में जाने से पहले अमेरिका ने नहीं सोचा था कि उसे इस जंग में गहरी चोट लगेगी और जंग लंबा खिंचेगा। लेकिन अब अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर घिरा दिख रहा है। उसके उन्नत से उन्नत हथियार तो ध्वस्त हो ही रहे हैं, और सालों से जिन दोस्तों का साथ था, वे भी अब अकेले पड़ते दिख रहे हैं। अमेरिका पश्चिम एशिया की जंग में अपने आप को बचाने के लिए जहां दोस्तों के तैनात डिफेंस सिस्टम मंगवा रहा है, तो वहीं उसका चिर प्रतिद्वंदी रूस मजबूत होता जा रहा है। चीन की ताकत भी बढ़ रही है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिका के लिए यह जंग गले की फांस बन जाएगी, जो उसे एक साथ कई मोर्चों पर फंसा देगी।

रूस से दुश्मनी और यूरोप की सुरक्षा

115वीं सदी से ही रूस को पश्चिमी यूरोप में एक बर्बर खतरे के रूप में माना जाता रहा है। समय के साथ यह दुश्मनी बढ़ती गई। शीत युद्ध के दौरान यूरोप अमेरिका के साथ रहा और बाद में भी रूस के साथ तनाव बढ़ता रहा। NATO के अधिकांश सदस्य यूरोप से हैं। अमेरिका ने रूस को परास्त करने के लिए यूरोप में अपने एक से एक हथियार तैनात किए और कमांड सेंटर बनाए। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए। दुश्मनी चरम पर है और अब अमेरिका, यूरोप को अकेला छोड़कर निकलता हुआ दिख रहा है। दरअसल, रूस के आक्रामक रुख के बाद अमेरिका ने जर्मनी, ग्रीस समेत कुल 19 देशों को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम से लैस किया था। यूक्रेन युद्ध के बाद जब रूस यूरोप के देशों को धमकाने लगा, तो इसकी तैनाती भी बढ़ने लगी। लेकिन अब खबर है कि अमेरिका ईरान के साथ जंग में अपने डिफेंस को मजबूत करने के लिए इन पैट्रियट मिसाइलों को वापस ला रहा है, क्योंकि ईरान की मिसाइलें इस डिफेंस सिस्टम को लगातार निशाना बनाकर हमला कर रही हैं और अमेरिका तथा खाड़ी के उसके सहयोगी देश उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

क्या है पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम

क्या है पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम

क्या है पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम

पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसका उपयोग दुश्मन की मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा विकसित किया गया है और दुनिया के सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टमों में गिना जाता है। पैट्रियट सिस्टम एक नेटवर्क की तरह काम करता है, जिसमें शक्तिशाली रडार, कंट्रोल स्टेशन और मिसाइल लॉन्चर शामिल होते हैं। जब कोई दुश्मन मिसाइल या विमान किसी देश की सीमा की ओर बढ़ता है, तो इसका रडार उसे काफी दूर से पहचान लेता है। इसके बाद कंट्रोल सिस्टम खतरे का आकलन करता है और लॉन्चर से इंटरसेप्टर मिसाइल दागी जाती है, जो लक्ष्य को हवा में ही नष्ट कर देती है। इस पूरी प्रक्रिया में बहुत कम समय लगता है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।

रूस के सामने यूरोप हुआ डिफेंसलेस?

ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने बड़ी संख्या में अपनी पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलें यूरोप से हटाकर पश्चिम एशिया की ओर भेज दी हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि इस कदम के कारण रूस के संभावित खतरे के खिलाफ यूरोप की हवाई सुरक्षा में चिंताजनक खालीपन पैदा हो सकता है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय और तीन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की ओर से तुर्की की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इसके बाद जर्मनी से दो पैट्रियट मिसाइल सिस्टम तुर्की भेजे गए, ताकि वहां की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में हवाई सुरक्षा बढ़ाने के लिए यूरोप के अलग-अलग ठिकानों से पैट्रियट सिस्टम के लिए मिसाइलों को स्थानांतरित किया गया है। संवेदनशील सैन्य मामलों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि ईरान युद्ध की वजह से यूरोप और अन्य क्षेत्रों में पैट्रियट मिसाइलों का भंडार तेजी से कम हो रहा है। एक अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि मिसाइलों का स्टॉक “वास्तव में घट रहा है” और यह स्थिति “काफी चिंताजनक” बनती जा रही है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन चिंताओं को खारिज करने की कोशिश की है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एपी को दिए बयान में कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और संसाधन मौजूद हैं। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने यह भी कहा कि नाटो के पास अभी भी यूरोप की रक्षा करने के लिए पर्याप्त क्षमता है।

ईरान जंग से रूस हो रहा लगातार मजबूत

ईरान जंग से रूस हो रहा लगातार मजबूत

जंग के बीच रूस हो रहा ताकतवर

यूक्रेन युद्ध में चार साल से फंसे रूस की ताकत ईरान युद्ध से पहले घटती जा रही थी-यूक्रेन के साथ समझौते का दबाव था, तेल की बिक्री पर प्रतिबंध था और यूक्रेन को अमेरिका तथा यूरोप से हथियार मिल रहे थे। रूस इन समस्याओं से जूझ ही रहा था कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। पलटवार में ईरान ने इजराइल पर तो हमले किए ही, साथ ही खाड़ी के उन देशों पर भी हमला बोल दिया, जो अमेरिका के साथ हैं। अब हुआ यह कि खाड़ी देशों से तेल-गैस की आपूर्ति प्रभावित हो गई और रूस के तेल पर लगे प्रतिबंध ढीले पड़ने लगे। यूक्रेन पर न अमेरिका ध्यान दे रहा है, न यूरोप। अब यूरोप भी रूसी मिसाइलों से असुरक्षित होने लगा है। ऐसे में ईरान युद्ध से अमेरिका को जो हासिल होगा, वह तो अलग है, लेकिन इस युद्ध से एक बात तो तय दिख रही है कि अमेरिका और उसके दोस्त कमजोर होते दिख रहे हैं और दुश्मन मजबूत हो रहे हैं।

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