जनगणना 2027 के 33 सवालों में कैसे छिपा है देश का भविष्य, आपके जवाब क्यों हैं जरूरी?
भारत में 2011 के बाद अब 2026 में जनगणना होने जा रही है, हालांकि यह पूरी 2027 में होगी और इसलिए इसे अखिल भारतीय डिजिटल जनगणना 2027 नाम दिया गया है। इसका पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच इसी साल होगा, जिसमें लोगों से 33 सवाल पूछे जाएंगे। आइए जानते हैं, इससे जुड़ी सारी जानकारियां।
- Authored by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jan 26, 2026, 06:41 PM IST
भारत में हर 10 साल में जनगणना होती है, आखिरी बार 2011 में हुई थी, इस तरह से 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन नहीं हुई, कोविड के कारण। अब देश में वो रुकी हुई जनगणना होने जा रही है। जो 2027 में पूरी हो होगी। इसका पहला चरण 2026 में होगा। इसके लिए सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। सवाल बता दिए हैं और तारीख भी तय कर दी है। अखिल भारतीय डिजिटल जनगणना 2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर के बीच होगा और इसमें कुल 33 प्रश्न लोगों से पूछे जाएंगे। इन प्रश्नों को लेकर कई तरह के सवाल हैं, मसलन कौन-कौन से सवाल होंगे, जवाब नहीं देने पर क्या होगा, क्या जवाब देना है, आदि?
कब से कब तक होगा जनगणना 2027 का पहला चरण?
सबसे पहले ये जानते हैं कि जनगणना का पहला चरण कब से कब तक होगा? जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और 30 सितंबर तक चलेगा। यानी कि पहला चरण कुल 6 महीने की अवधि में पूरा होगा। इस दौरान लाखों कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जाएगा, जो घर-घर जाकर एक मोबाइल ऐप के जरिए लोगों से जानकारी लेंगे। यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी।
जनगणना 2027 का गजट नोटिफिकेशन (फोटो- PIB)
पहले चरण में पूछे जाएंगे कौन-कौन से 33 सवाल?
जनगणना 2027 के पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। जिसमें घर की दीवारों से लेकर फर्श तक की जानकारी लोगों को देनी होगी। सबसे पहले वो 33 सवालों की लिस्ट देखिए।
- बिल्डिंग नंबर
- जनगणना मकान नंबर
- जनगणना मकान के फर्श की मुख्य सामग्री
- जनगणना मकान की दीवार की मुख्य सामग्री
- जनगणना मकान की छत की मुख्य सामग्री
- जनगणना मकान का उपयोग
- जनगणना मकान की स्थिति
- परिवार नंबर
- परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम
- परिवार के मुखिया का लिंग
- क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य से संबंधित है
- स्वामित्व की स्थिति
- परिवार के विशेष कब्जे में रहने वाले कमरों की संख्या
- परिवार में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या
- पीने के पानी का मुख्य स्रोत
- पीने के पानी के स्रोत की उपलब्धता
- रोशनी का मुख्य स्रोत
- शौचालय तक पहुंच
- शौचालय का प्रकार
- गंदे पानी की निकासी
- नहाने की सुविधा की उपलब्धता
- रसोई और LPG/PNG कनेक्शन की उपलब्धता
- खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मुख्य ईंधन
- रेडियो/ट्रांजिस्टर
- टेलीविजन
- इंटरनेट तक पहुंच
- लैपटॉप/कंप्यूटर
- टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन
- साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
- कार/जीप/वैन
- परिवार में खाया जाने वाला मुख्य अनाज
- मोबाइल नंबर (केवल जनगणना से संबंधित संचार के लिए)
जनगणना में आखिर क्यों पूछे जाएंगे ये 33 सवाल?
अब आपके मन में सवाल होगा कि जनगणना तो आबादी को काउंट करने का सिस्टम है, फिर ये इतने सारे सवाल क्यों? घरवालों की संख्या पूछो और जाओ। दरअसल इन सवालों में देश का भूत, वर्तमान और भविष्य छिपा है। जनगणना मतलब सिर्फ लोगों की संख्या जानना ही नहीं होता है, इसका मकसद, आबादी के साथ-साथ उनकी हालत भी जानना होता है। जनगणना के सवालों के जरिए सरकार यह समझना चाहती है कि देश में लोग कहां रहते हैं, कैसे रहते हैं और किन सुविधाओं की उन्हें जरूरत है। उम्र, लिंग, शिक्षा, आवास, पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना पकाने का ईंधन जैसे सवाल इसलिए शामिल होते हैं ताकि यह तय किया जा सके कि किस क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी, बिजली या रोजगार की जरूरत ज्यादा है। जनगणना से मिलने वाले आंकड़े को संसद और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन, आरक्षण नीति, विकास योजनाओं के बजट आवंटन और आपदा प्रबंधन जैसे बड़े फैसलों में इस्तेमाल किया जाता है।
जनगणना 2027 एक नजर में
अगर इन 33 सवालों के जवाब नहीं दिए तो क्या होगा?
अब एक सवाल और मन में आता होगा, अगर हमने इन 33 सवालों के जवाब नहीं दिए तो क्या होगा? जनगणना से नाम कट जाएगा, सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, नागरिकता छीन जाएगा? दरअसल जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले ये सवाल लोगों के लिए होते हैं, लोगों का कर्तव्य है कि वो इन सवालों का जवाब दें, ताकि सरकार को सही तस्वीर मिले। ताकि भविष्य की योजनाओं में उन कमियों को दूर किया जा सके, जिनका सामना लोग कर रहे हैं। नागरिकता का इससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन जनगणना में न केवल बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए, बल्कि सही जानकारी भी देना चाहिए।
जनगणना क्यों है हर देश के लिए जरूरी?
जनगणना किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक हैं। इससे गांव, कस्बे और वार्ड स्तर तक देश के सबसे व्यापक और भरोसेमंद प्राथमिक आंकड़े उपलब्ध होता है। इसके माध्यम से आवास की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और संपत्तियां, जनसंख्या संरचना, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, साक्षरता व शिक्षा, आजीविका, प्रवासन और प्रजनन जैसे अनेक पहलुओं पर सूक्ष्म और विस्तृत जानकारी मिलती है। भारत में जनगणना कराने के लिए जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करते हैं। इसी कानून के तहत भारत में जनगणना होती है।
जनगणना कार्य में लगे हुए कार्मचारी (फोटो- PIB)
सरकार के अलावा किसी को जानकारी नहीं
आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जनगणना के दौरान ली जाने वाली जानकारी, सिर्फ सरकार के पास ही रहती है। यह जानकारी इतनी गोपनीय होती है कि कोर्ट के लिए भी यह सुलभ नहीं है। जनगणना अधिनियम 1948 से इसकी गोपनियता का अधिकार जनता को मिलता है।
भारत में जनगणना का इतिहास
1872 से भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर जनगणना की शुरुआत हुई। समय के साथ भारतीय जनगणना देश की आबादी से जुड़ी जानकारी का सबसे भरोसेमंद स्रोत बन गई। जनसंख्या, समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को समझने के लिए शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए यह बेहद उपयोगी रही है। भारत की विविधता की असली तस्वीर हर दस साल में होने वाली जनगणना से सामने आती है, जिससे देश को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। भारत में जनगणना की परंपरा बहुत पुरानी है। इसका उल्लेख प्राचीन काल में कौटिल्य के अर्थशास्त्र और मुगल काल में अकबर के दरबार में अबुल फजल की आइन-ए-अकबरी में भी मिलता है। आधुनिक दौर की पहली जनसंख्या जनगणना 1865 से 1872 के बीच कराई गई थी, हालांकि यह पूरे देश में एक साथ नहीं हुई। इसके बाद 1881 में भारत की पहली संगठित और एकसमान जनगणना की गई, जिसे आधुनिक भारतीय जनगणना की शुरुआत माना जाता है।
