Ukraine attack on Irani ships: ईरान-अमेरिका जंग के बीच युद्ध का एक और मोर्चा खुल गया है। यह मोर्चा ईरान के उत्तरी तरफ यानी कैस्पियन सागर में खुला है। दरअसल, पिछले दिनों ईरान के तेल टैंकरों पर अमेरिका ने नहीं बल्कि यूक्रेन ने हमले किए। इस हमले ने दुनिया भर को चौंका दिया। सवाल है कि आखिर यूक्रेन की ईरान के साथ कौन सी दुश्मनी है कि उसने उसके जहाजों को क्यों निशाना बनाया? ईरान की सीमा यूक्रेन से नहीं लगती। इन दोनों देशों में किसी तरह का टकराव और गतिरोध भी नहीं है। यूक्रेन, ईरान से करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर दूर है। हालांकि, जेलेंस्की ने ईरानी जहाजों पर हुए ड्रोन हमले का यह कहते हुए बचाव किया कि ये जहाज ईरान से सैन्य हथियार लेकर रूस की तरफ जा रहे थे।
ईरान पर हमला कर ट्रंप को खुश करना चाहते हैं जेलेंस्की?
वहीं, ईरान का कहना है कि लौह अयस्क ले जाने वाले उसके एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ और इस हमले में एक नाविक की जान गई और तीन अन्य घायल हो गए। इस यूक्रेनी हमले के बाद सोमवार को आई ईरान की प्रतिक्रिया ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि 'जाहिर तौर पर यूक्रेन के इस खतरनाक दुस्साहस का हमारी तरफ से जवाब दिया जाएगा।' ईरान ने अपने यहां मौजूद यूक्रेनी चार्ज डी अफेर्यर को तलब कर इस हमले का विरोध जताया है। सवाल है कि अचानक यूक्रेन इस युद्ध में क्यों कूदा? तो इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका है। एक्सपर्ट की राय है कि जेलेंस्की अपने हमलों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करना चाहते हैं। वह यह दिखाना चाहते हैं कि नाटो या यूरोप का कोई देश इस युद्ध में आपके साथ नहीं है लेकिन यूक्रेन इस युद्ध में आपके साथ खड़ा है।
जेलेंस्की का दावा-सैटेलाइट से ईरान की मदद कर रहा रूस
जेलेंस्की का यह भी दावा है कि रूस अपने सैटेलाइट डाटा और इनपुट से अमेरिका के खिलाफ ईरान की मदद कर रहा है। इन्हीं सैटेलाइट डाटा की मदद से ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर सटीक हमले कर पा रहा है। जेलेंस्की के इस दावे में सच्चाई हो सकती है क्योंकि ईरान के पास दूर तक मार करने वाले ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं लेकिन लक्ष्य पर सटीक वार करने के लिए जिस सैटेलाइट डाटा और इनपुट की जरूरत होती है। यह दोनों चीजें रूस उसे मुहैया करा सकता है। जेलेंस्की के इस दावे पर ट्रंप ने कहा है कि वह इस बारे में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बात करेंगे।
Zelenskyy
जेलेंस्की ने दुनिया भर को दिखाई अपनी सैन्य ताकत
एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि ईरान के खिलाफ अपनी आक्रामक कार्रवाई के बाद जेलेंस्की अमेरिका से पैट्रिएट मिसाइल, लंबी दूरी तक मार करने वाली टॉमहॉक मिसाइलें और अन्य हथियारों की मांग कर सकते हैं। इन हमलों के जरिए जेलेंस्की ने अमेरिका सहित दुनिया भर को अपना सामर्थ्य भी दिखाया है। जेलेंस्की दुनिया को बताना चाहते हैं कि ड्रोन हमलों के मामले में उनका देश एक्सपर्ट बन चुका है। वह अपने ड्रोन के जरिए मास्को, सेंटपीट्सबर्ग तक सफलतापूर्वक मार कर रहा है और दुश्मन के ड्रोन से अपना बचाव भी कर रहा है। जेलेंस्की चाहते हैं कि ट्रंप उन्हें लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें दें जिससे उनकी सेना रूस के अंदरूनी इलाकों में और भीषण हमले कर सके। बहरहाल, यूक्रेन ने अपने हमले से जता दिया है कि वह ईरान के उत्तरी इलाके यानी कैस्पियन सागर में उसके व्यापार को अस्थिर और असुरक्षित बना सकता है।
इसी रास्ते रूसी अनाज एवं स्टील ईरान पहुंचते हैं
कैस्पियन सागर से ईरान, रूस सहित पांच देशों की सीमा लगती है। पर्शियन गल्फ और ओमान की खाड़ी में अपने बंदरगाहों की अमेरिका द्वारा नाकेबंदी किए जाने के बाद व्यापार के एक समुद्री मार्ग के रूप में कैस्पियन सागर की अहमियत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। रूस, ककासस, मध्य एशिया, चीन (वाया रेल) और पूर्वी यूरोप के साथ ईरान यदि अपना व्यापार बढ़ाता है तो यह समुद्री मार्ग उसकी मदद कर सकता है। यह ईरान के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बन सकता है। इसी कैस्पियन सागर के रास्ते रूसी अनाज एवं स्टील ईरान पहुंचते हैं। इस समुद्री मार्ग की अहमियत देखते हुए ईरान ने इस सागर में कई अपने बंदरगाह बनाए हैं। कजाकिस्तान का तेल और गैस भी कैस्पियन सागर से होकर ब्लैक सी तक पहुंचता है। खास बात यह है कि कैस्पियन सागर के आस-पास जितने भी देश हैं उनमें से किसी देश के साथ ईरान की अनबन नहीं हैं। सभी के साथ उसके अच्छे रिश्ते हैं। इसलिए, यूक्रेन के हमले तक यह समुद्री मार्ग उसके लिए सुरक्षित बना हुआ था। कैस्पियन सागर की एक और खासियत यह भी है कि यह लैंडलॉक्ड है। यानी इसका पानी समुद्र से नहीं मिलता। एक तरह से कहें तो कैस्पियन सागर में रूस और ईरान का दबदबा है और यहां अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की नौसेना नहीं पहुंच सकती।
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पहले भी यूक्रेन के निशाने पर रहा है कैस्पियन सागर
ईरान के उत्तरी बंदरगाहों को रूस के अस्त्राखान बंदरगाह से जोड़ने वाला कैस्पियन सागर मार्ग पहले भी यूक्रेन के निशाने पर रहा है। पिछले वर्ष अगस्त में 'पोर्ट ओल्या-4 नामक एक मालवाहक जहाज को नष्ट कर दिया गया था। बताया गया था कि उस जहाज में शाहेद-136 ड्रोन के पुर्जे और ईरानी हथियार/गोला-बारूद लदा हुआ था। कुल मिलाकर, यह जानते हुए भी ईरानी जहाजों पर हमले की कीमत यूक्रेन को चुकानी पड़ सकती है, जेलेंस्की ने हमले के आदेश दिए। जेलेंस्की के मन में कहीं न कहीं ये बात चल रही होगी कि जब उनका देश 2022 से रूस जैसे सुपरपावर के हमलों का सामना करता आ रहा है तो ईरान बहुत ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकता। वह उनकी तरफ ड्रोन और मिसाइलें भर दाग सकता है। इसलिए ईरान को लेकर जेलेंस्की ज्यादा फिक्रमंद नहीं लगते। दूसरा, वह इसी सप्ताह वाशिंगटन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात ट्रंप से होनी है। इस मुलाकात में वह अमेरिका से आर्थिक एवं सैन्य मदद की मांग कर सकते हैं। यूक्रेन के इस हमले के बाद अब सभी की नजरें ईरान की तरफ से होने वाले पलटवार पर है।
