भारत के साथ ट्रेड डील में पिछड़ने का डर या कुछ और? टैरिफ पर ट्रंप के U टर्न के पीछे क्या है वजह
भारत के खिलाफ ट्रंप ने जिस तरह से टैरिफ को हथियार बनाया था। वही, हथियार उनका नुकसान करने लगा था। यह बात उन्हें थोड़ी देर में समझ में आई। या कहिए कि वह समझकर भी इससे अनजान बनने का ढोंग कर रहे थे। उन्हें अपने टैरिफ अब यू-टर्न लेना पड़ा है और ट्रेड डील उसी शर्तों पर करना पड़ा है, जिस पर भारत चाह रहा था।
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Feb 3, 2026, 03:29 PM IST
India US Trade Deal: हाल के दिनों में एक समय ऐसा भी आया जब यह लगने लगा था कि शायद अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील न हो पाए। दोनों जगहों से ऐसे संकेत मिले कि यह डील ठंडे बस्ते में चली गई है और इस पर अब कोई बातचीत नहीं हो रही है। फिर यह भी सुनने में आता रहा कि नहीं दोनों पक्ष इस पर बातचीत कर रहे हैं। डील को अंतिम रूप दे दिया गया और इसकी घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात इस डील पर बड़ी घोषणा कर दी। इस डील के बार में अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल पर कहा कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करना सम्मान की बात है। वह मेरे सबसे अच्छे दोस्त और अपने देश के एक मजबूत एवं सम्मानित नेता हैं। हमने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने, ट्रेड सहित कई मुद्दों पर बातचीत की।'
ट्रेड डील के बारे में राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि 'इस बातचीत में पीएम मोदी रूस से तेल नहीं खरीदने पर सहमत हुए। वह अमेरिका, खासतौर से वेनेजुएला से तेल खरीदेंगे। इससे यूक्रेन में युद्ध रोकने में मदद मिलेगी। पीएम मोदी के अनुरोध पर हमने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील तत्काल प्रभाव से लागू करने पर सहमत हुए हैं। इस डील के मुताबिक यूएस भारतीय सामानों पर अपना जवाबी टैरिफ 25 प्रतिशत से टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर रहा है। भारत भी इसी तरह से अपना टैरिफ कम करेगा। इसके अलावा भारत, 500 अरब डॉलर से ज्यादा कीमत का अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य चीजें खरीदेगा।' ट्रंप की इस घोषणा के साथ भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर मुहर लग गई। खास बात यह है कि बीते 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच FTA पर हस्ताक्षर हुए और इसके एक सप्ताह के भीतर यूएस के साथ भी भारत की डील हो गई। अमेरिका के साथ हुई इस डील के ब्योरे अभी सामने नहीं आए हैं लेकिन एक्सपर्ट्स इसे भारत की बहुत बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं।
आखिर ट्रंप का दील पसीज क्यों गया?
भारत के खिलाफ ट्रंप ने जिस तरह से टैरिफ को हथियार बनाया था। वही, हथियार उनका नुकसान करने लगा था। यह बात उन्हें थोड़ी देर में समझ में आई। या कहिए कि वह समझकर भी इससे अनजान बनने का ढोंग कर रहे थे। उन्हें अपने टैरिफ अब यू-टर्न लेना पड़ा है और ट्रेड डील उसी शर्तों पर करना पड़ा है, जिस पर भारत चाह रहा था। सवाल है कि टैरिफ पर आखिर ट्रंप का मन पसीज क्यों गया? इसे वापस लेने के लिए भारत ने उनसे चिरौरी भी नहीं की, और न ही उनकी इच्छा के अनुसार पीएम मोदी ने उन्हें फोन किया। तो आखिर क्या हुआ कि अचानक से ट्रंप ने जवाबी टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। यह टैरिफ चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी कम है। ट्रंप प्रशासन जो भारत पर 500 प्रतिशत लगाने के धमकियां दे रहा था, वह इस ट्रेड डील के लिए आखिर उतावला क्यों हो गया?
डील के पीछे EU-भारत FTA बड़ी वजह
एक्सपर्ट्स की राय है कि इस ट्रेड डील के पीछे भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई वह ट्रेड डील है जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। इस डील ने ट्रंप प्रशासन की नींद उड़ा दी। हाल के दिनों में कनाडा, ब्रिटेन और दुनिया के तमाम देश या तो आपस में या भारत के साथ ट्रेड डील कर रहे थे। देशों की तैयार होती इस नई श्रृंखला, लामबंदी और गुटबाजी ने ट्रंप और उनके प्रशासन को दोबारा सोचने के लिए विवश कर दिया। खास तौर से भारत के साथ 'ट्रेड डील वाली बस' पर ट्रंप को छोड़ सभी सवार हो रहे थे, ऐसे में ट्रंप प्रशासन को लगा कि देरी करने पर यह 'बस' छूट सकती है, और एक बार अगर 'बस' छूट गई तो मंजिल पर पहुंचना आसान नहीं होगा। भारत बहुत बड़ा बाजार है। इस बाजार को गंवाना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ पीएम मोदी।
दुनिया में हो रही ट्रेड डील से हिले ट्रंप!
ट्रंप को लगा था कि भारत पर टैरिफ लगाकर वह उसे झुका लेंगे लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि आपको जितना टैरिफ लगाना है, लगाईए, भारत टैरिफ की धमकियों से न तो डरेगा औ न ही अपने राष्ट्रीय हितों एवं कारोबारी हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। इस बीच, 50 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद भारत ने इससे होने वाले नुकसान की भरपाई और अपने उत्पादों को नए बाजार दिलाने के लिए तेजी से काम करना शुरू कर दिया। ब्रिटेन के बाद उसने ईयू से ट्रेड डील कर ली। कनाडा और ब्राजील से भी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। मतलब भारत के साथ देशों की ट्रेड डील से अमेरिका में यह संदेश गया कि सभी विकसित और बड़ी अर्थव्यस्थाओं वाले देश, या तो भारत के साथ ट्रेड डील कर चुके हैं या करने वाले हैं, एक यूएस ही है जो इस डील को आगे बढ़ाकर भी इसे कर नहीं पाया।
रूस से तेल नहीं खरीदने पर भारत ने कुछ नहीं कहा
मीडिया और लोगों के बीच इस चर्चा ने ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अब ट्रंप चूंकि अपने टैरिफ पर इतनी डींगे हांक चुके थे, और बड़ी-बड़ी बातें कर चुके थे, कि अपनी बात से अचानक से पलटना उनके लिए भी किरकिरी वाली बात थी। इस पर बीच का रास्ता निकाला गया कि ट्रंप की बात भी रह जाए और यह ट्रेड डील भी हो जाए। अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा है कि भारत, अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। पीएम मोदी इसके लिए तैयार हो गए हैं लेकिन पीएम मोदी की तरफ से जो पोस्ट आया उसमें रूस से तेल न खरीदने के बारे में कोई जिक्र नहीं है, और न ही इसमें 500 अरब डॉलर से ज्यादा अमेरिकी उत्पाद खरीदने के बारे में कोई बात कही गई है।
पीएम नरेंद्र मोदी।
2024 में दोनों देशों के बीच 212.3 अरब डॉलर का व्यापार
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट में जो एक बात कॉमन है, वह यह है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील हो गई है, इसमें में अब कोई शक या दो राय नहीं है। बाकी बातें जिसके बारे में ट्रंप ने कहा है कि उसकी सच्चाई क्या है, इसे वही बेहतर जानते हैं। फिलहाल, इस डील का लंबे समय से इंतजार था। भारत के लिए भी यह डील बहुत जरूरी थी। अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है। अनुमान है कि साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 230 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। साल 2024 में दोनों देशों के बीच 212.3 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। यही नहीं दोनों देशों ने 2030 तक अपना द्विपक्षीय कारोबार 500 अरब डॉलर तक करने का लक्ष्य रखा है। भारत भी अमेरिकी बाजार और अर्थव्यवस्था की अनदेखी नहीं कर सकता। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए उसे यूएस का पूरा साथ चाहिए। उम्मीद है कि यह डील भारत के इस सपने को पूरा करने में एक अहम भूमिका निभाएगी।
