Babkipur By Election 2026: राजनीतिक दलों के लिए चुनावी जीत की रणनीति बना चुके प्रशांत किशोर (PK) बिहार विधानसभा की बांकीपुर सीट से खुद उम्मीदवार हैं। इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। 2025 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा के नितिन नबीन जीते थे। नितिन के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी। इस सीट का उपचुनाव एक सामान्य चुनाव भर नहीं हैं। भाजपा के दबदबे वाली इस सीट पर पीके ने ताल ठोककर चुनाव को दिलचस्प तो बनाया ही है, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए भी यह सीट उसके 'MY'समीकरण के लिए एक 'अग्निपरीक्षा' की तरह है। भाजपा इस सीट को जीतकर जहां अपना दबदबा बनाए रखना चाहेगी तो वहीं पीके चुनावी जीत हासिल कर अपना और अपनी पार्टी का विधानसभा में खाता खोलना चाहेंगे। इस सीट का नतीजा राजनीतिक रूप से काफी अहमियत रखेगा।
भाजपा का गढ़ है बांकीपुर
रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस सीट पर पीके की जन सुराज पार्टी ने राजद के मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई है और इस चुनावी लड़ाई में मुस्लिम पीके के साथ हैं। राजद का साथ छोड़ जन सुराज के साथ मुस्लिमों के आने की वजह भी है। मुस्लिम वोटरों को लगता है कि भाजपा को हराने में पीके की पार्टी सबसे अच्छी स्थिति में है लेकिन राजद के परंपरागत वोटर यादव इस बार किसके पक्ष में वोट करते हैं, यह देखने वाली बात होगी। भाजपा को उम्मीद है कि वह इस बार बार भी इस सीट को जीतेगी। नितिन करीब दो दशक तक इस सीट से विधायक रहे हैं, उनसे पहले उनके पिता भी इस सीट से चुने जाते रहे। अपना गढ़ होने के बावजूद भाजपा ने इस उपचुनाव को हल्के में नहीं लिया है। चुनाव प्रचार में भगवा पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है और रैलियों और जनसंपर्क के लिए दिग्गज नेताओं को जमीन पर उतारा।
Nitin Nabin
बिहार में तीसरी राजनीतिक ताकत बनना चाहती है जन सुराज
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बांकीपुर में सियासी लड़ाई मौटे तौर पर त्रिकोणीय है। भाजपा के लिए यह सीट जहां प्रतिष्ठा का प्रश्न है तो विधानसभा चुनाव में बुरी तरह निराश हुए प्रशांत किशोर के लिए यह सीट उम्मीद की एक किरण है। जन सुराज पार्टी बिहार में तीसरी ताकत बनना चाहेगी। इस सीट पर मुख्य विपक्षी पार्टी राजद की परीक्षा होनी है। मुस्लिम और यादव समीकरण के बल पर बिहार में राज करने वाली यह पार्टी क्या इस बार अपने वोट बैंक में बिखराव को रोक पाएगी, यह बड़ा प्रश्न है। इस सीट पर राजद की यदि हार होती है तो मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उसके रुतबे में कमी आएगी।
जन सुराज पार्टी के वोट शेयर में उछाल-ओपिनियन पोल
बांकीपुर सीट को लेकर कुछ सर्वे भी आए हैं। वोटवाइव के ओपिनियन पोल में भाजपा को बढ़त बताया गया है। साथ ही इस सीट पर प्रशांत किशोर की एंट्री से चुनावी परिदृश्य बदलने की बात कही गई है। सर्वे के मुताबिक इस उपचुनाव में भाजपा को 44.9 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं जबकि जन सुराज पार्टी को 33.8 फीसद और राजद को 17.8 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है। जन सुराज पार्टी के वोट शेयर में उछाल सभी को हैरान कर रहा है। यह वही पार्टी है जिसे बीते विधानसभा चुनाव में केवल 4.97 प्रतिशत वोट मिले थे। इस सीट पर पीके की पार्टी के वोट शेयर में जहां जबर्दस्त वृद्धि देखने को मिली है, वहीं भाजपा के वोट शेयर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
PK
'राजद के वोट बैंक में लग सकती है सेंध'
2025 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा को 63.2 प्रतिशत वोट मिले। ओपिनियन पोल के मुताबिक वोट शेयर की अगर बात करें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा नुकसान राजद को होता दिख रहा है। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद को इस सीट पर 29.8 प्रतिशत वोट मिले थे जो घटकर 17.8 प्रतिशत हो गया है। अपने बढ़े हुए वोट शेयर के साथ पीके ने बांकीपुर सीट की लड़ाई को प्रतिस्पर्धी बना दिया है। यह सीट यदि भाजपा गंवा देती है तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगेगा और भाजपा की 'अपराजेय छवि' धूमिल होगी। बांकीपुर में 'MY' वोटों का यदि बंटवारा होता है तो इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा लेकिन अगर यादव मतदाता भी जन सुराज की ओर झुकने लगते हैं, तो बिहार की विपक्षी राजनीति में यह एक बहुत बड़ा बदलाव होगा।
Tejashwi Yadav
क्या PK तोड़ पाएंगे बिहार का जातीय गणित?
बांकीपुर की सामाजिक संरचना इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है। इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 3.69 लाख मतदाता हैं, जिनमें कायस्थ और यादव मिलाकर लगभग 25% वोटर हैं। परंपरागत रूप से बीजेपी ने नवीन परिवार के राजनीतिक प्रभाव के कारण कायस्थ वोटों पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है। वहीं मुस्लिम और चंद्रवंशी समुदाय मिलाकर लगभग 20% मतदाता हैं। इसके अलावा वैश्य, दलित, भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, कुर्मी और कुशवाहा समुदायों की हिस्सेदारी 3% से 8% के बीच है। बिहार की पारंपरिक पार्टियों के विपरीत, जन सुराज ने जातीय पहचान से आगे बढ़कर सुशासन, शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों पर चुनाव प्रचार किया है। इस लिहाज से यह उपचुनाव इस बात की परीक्षा भी है कि क्या विकास और सुशासन की राजनीति मतदाताओं को पारंपरिक जातीय निष्ठाओं से ऊपर उठने के लिए प्रेरित कर सकती है। प्रशांत किशोर के लिए असली सफलता केवल जन सुराज का वोट शेयर बढ़ाना नहीं होगी, बल्कि यह साबित करना होगा कि बिहार में मुद्दा आधारित राजनीति भी चुनावी आधार बना सकती है।
भाजपा अभी भी मजबूत स्थिति में
भले ही ओपिनियन पोल के अनुसार बीजेपी अंततः बांकीपुर सीट बचाने में सफल हो जाए, लेकिन यह उपचुनाव पहले ही बिहार की राजनीति का नैरेटिव बदल चुका है। प्रशांत किशोर ने दिखा दिया है कि जन सुराज न केवल बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में चुनौती पेश कर सकती है, बल्कि आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगाने की क्षमता रखती है। बीजेपी अभी भी चुनावी मुकाबले में मजबूत स्थिति में है। विपक्षी वोटों का बंटवारा और ऊंची जातियों का मजबूत समर्थन उसके पक्ष में दिखाई देता है। लेकिन जिस सीट को कभी लगभग अभेद्य माना जाता था, वहां इस बार बीजेपी को अपेक्षा से कहीं अधिक कड़ी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
