'अध्यादेश' की चोट को सह न पाए केजरीवाल !, जो पहले नहीं थे पसंद उनके दर लगा रहे हैं चक्कर

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jun 8, 2023, 11:52 AM IST

Ordinance on IAS Transfer Posting: सियासी मजबूरी कहें या सियासी जरूरत या नैतिकता से समझौता या नैतिक बल के जरिए लड़ाई। अरविंद केजरीवाल जब राजनीति में आए तो इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन दिल्ली का बॉस कौन प्रकरण पर वो सियासी हमलों का सामना करने के लिए शायद अपने ही आदर्शों से हटकर वही राह चुन ली है जिसका वो विरोध किया करते थे।

Ordinance on IAS Transfer Posting: दिल्ली का बॉस कौन, सीएम या लेफ्टिनेंट गवर्नर। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली की गद्दी पर काबिज हुई। आप सरकार और एलजी के बीच टकराव की शुरुआत एलजी नजीब जंग से शुरू हुई और वर्तमान एलजी वी के सक्सेना(delhi lg v k saxena) के साथ चरम पर है। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ ने कहा कि आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार है। उस फैसले के बाद केजरीवाल सरकार ने कुछ ट्रांसफर किए जिस पर एलजी की तरफ से आपत्ति जताई गई। पीठ के फैसले के एक दिन बाद केजरीवाल सरकार फिर से सुप्रीम कोर्ट(supreme court on ias transfer) पहुंची। उसके बाद केंद्र सरकार की अध्यादेश जारी किया गया। अब उसी अध्यादेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल विपक्षी दलों से मिलकर समर्थन जुटा रहे हैं ताकि अध्यादेश को राज्यसभा में पराजित किया जा सके। वो यह कह भी चुके हैं कि अगर राज्यसभा में अध्यादेश पराजित हुआ तो 2024 से पहले ही एक बड़ी लड़ाई मोदी सरकार के खिलाफ हम जीत जाएंगे। यहां हम बताएंगे कि केजरीवाल की मुहिम कहां तक पहुंची है।

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अध्यादेश के मुद्दे पर विपक्षी एकता की कोशिश में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल

इन राज्यों के सीएम से मिले केजरीवाल

  • पश्चिम बंगाल- ममता बनर्जी
  • तमिलनाडु- एम के स्टालिन
  • झारखंड-हेमंत सोरेन

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