Kaal Trighori: इंडियन हॉरर में नया मील का पत्थर बनी 'काल त्रिघोही'! सिर्फ जंपस्केयर तक नहीं है सीमित

Kaal Trighori Review: अरबाज़ ख़ान ने हॉरर में डेब्यू करते हुए अपने किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया। 2 घंटे 39 मिनट की रनटाइम के दौरान कहानी लगातार आपको अपने सस्पेंस में बांधे रखती है।

Kaal Trighori Review: निर्देशक नितिन एन वैद्य ने काल त्रिघोही के जरिए साबित किया है कि भारतीय हॉरर सिर्फ़ जम्प-स्केयर तक सीमित नहीं रह गई है। यह फिल्म एक डीप-साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, जो आपको पुराने मिथकों और हवेली के डरावने गलियारों में घसीट लेती है। 2 घंटे 39 मिनट की रनटाइम के दौरान कहानी लगातार आपको अपने सस्पेंस में बांधे रखती है।

Kaal Trighori Review

Image Source: IMDB

कहानी और सस्पेंस

फिल्म का प्लॉट एक सौ साल में एक बार आने वाले खगोलीय संयोग के इर्द-गिर्द घूमता है — जब चैत्र अमावस्या, चैत्र पूर्णिमा और बैसाखी अमावस्या एक ही महीने में आती हैं। इस दुर्लभ अलाइनमेंट से जागृत होती है पौराणिक शक्ति ‘त्रिघोही’, जिसका जिक्र सदियों पुरानी लोककथाओं में मिलता है।

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