Sunjay Kapur Will Controversy: बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) के एक्स पति संजय कपूर (Sunjay Kapur) अब इस दुनिया में नहीं रहे। साल 2025 में उनका निधन हो गया था। संजय कपूर के निधन के बाद से ही संपत्ति उनकी संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। इसको लेकर एक के बाद एक अपडेट सामने आ रहे हैं। कभी तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर (Priya Sachdev Kapur) कोई आरोप लगा देती है, तो कभी करिश्मा कपूर के पक्ष से कोई विवाद खड़ा हो जाता है। इन सब के बीच अब करिश्मा कपूर के बच्चों ने अपनी सौतेली मां प्रिया कपूर पर केस करने का फैसला किया है।
Image Source: Karishma kapoor And Priya Kapur Instagram
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समायरा-कियान ने की क्रिमिनल एक्शन की मांग
करिश्मा कपूर के एक्स पति संजय कपूर के निधन के बाद संपत्ति का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच करिश्मा कपूर के बच्चों ने संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर पर क्रिमिनल एक्शन की मांग की है। एनडीटीवी की खबर के अनुसार, समायरा और कियान ने दिल्ली हाईकोर्ट में दावा किया है कि उनके पिता संजय कपूर की वसीयत फर्जी है, जिसके आधार पर उन्हें विरासत से बाहर किया गया। दोनों ने कोर्ट से मांग की है कि अब इस मामले में धारा 338 और 340 के तहत कार्रवाई हो। करिश्मा कपूर के बच्चों ने कोर्ट को बताया कि वसीयत पर जिस दिन 21 मार्च को हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है, उस दिन संजय कपूर और प्रिया कपूर गुरुग्राम में मौजूद ही नहीं थे। उनके मुताबिक, उस समय दोनों दिल्ली में थे और करिश्मा कपूर से व्हाट्सएप पर बच्चों की पुर्तगाली नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर बात कर रहे थे।
प्रिया ने कोर्ट में कही ये बात
प्रिया कपूर की तरफ से कोर्ट में ये भी कहा गया कि वसीयत पहली बार 10 फरवरी 2025 को तैयार हुई थी, फिर 17 मार्च को इसमें बदलाव किया गया और आखिर में 21 मार्च को गुरुग्राम के AIPL ऑफिस में दो गवाहों दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा की मौजूदगी में संजय ने दस्तावेज पर साइन किए। एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार 17 मार्च को संजय कपूर अपने बेटे कियान के साथ गोवा में छुट्टियां मना रहे थे। उसी शाम वे दिल्ली लौटे, क्योंकि उनकी मां रानी कपूर को गिरने से चोट लगी थी। बच्चों का आरोप है कि यह समयरेखा वसीयत में बताए गए संशोधन की तारीखों से मेल नहीं खाती।
गवाहों पर भी उठा सवाल बात
गवाहों दिनेश कुमार अग्रवाल और नितिन शर्मा के बयानों में भी वसीयत के गुरुग्राम में हस्ताक्षर होने का कोई जिक्र नहीं मिलता। समायरा और कियान ने कोर्ट में दलील दी कि गवाहों के बयानों में गुरुग्राम का नाम न आना इस बात का सबूत है कि वसीयत वहां साइन नहीं हुई। न तो संजय कपूर और न ही प्रिया कपूर उस दिन गुरुग्राम में मौजूद थे। बच्चों का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से जालसाजी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रिया कपूर, संजय कपूर, दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा के मोबाइल फोन जब्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रिया ने न सिर्फ फर्जी वसीयत तैयार की, बल्कि एक झूठी डिजिटल ट्रेल भी बनाई। वसीयत की एग्जीक्यूटर श्रद्धा सूरी मारवाह की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि जून में उन्होंने एक ई-मेल में पूछा था कि वसीयत किस वकील ने तैयार की, जबकि बाद में पता चला कि वसीयत किसी वकील ने नहीं, बल्कि गवाह नितिन शर्मा ने ड्राफ्ट की थी। इसके अलावा, वसीयत में कई स्पेलिंग और व्याकरण की गलतियां हैं, जो बच्चों के अनुसार उनके पढ़े-लिखे पिता कभी नहीं करते। अब इसकी अगली सुनवाई 20 जनवरी को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट गगनदीप सिंह के सामने होगी। अगर आपराधिक धाराएं लगीं, तो जांच और भी गहराई से हो सकती है।
