Nusrat Fateh Ali Khan: डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता बन गए सिंगर, इस गाने के समय रो-रोकर हो गया था बुरा हाल

  • Authored by: अभय
  • Updated Oct 29, 2025, 04:51 PM IST

Nusrat Fateh Ali Khan Doctor To Singer: सोचिए एक ऐसी आवाज की जो सुनते ही रूह कांप उठे। वो आवाज न रुकती है न थकती है बस बहती चली जाती है जैसे कोई नदी जो समंदर से मिलने को बेताब हो। ये आवाज थी नुसरत फतेह अली खान की। आज इस खास स्टोरी में हम आपको उनकी लाइफ से हर पहलू के बारे में बताने वाले हैं।

सोचिए जरा, एक ऐसी आवाज जो सुनते ही रूह कांप उठे, आंखों में आंसू भर आएं और मन में एक अजीब सी बेचैनी पैदा हो जाए। वो आवाज नुसरत फतेह अली खान की थी। आज भी जब दुनिया भर के लोग उनके कव्वाली गाते हैं तो लगता है जैसे कोई जादू हो रहा हो। पाकिस्तान के फैसलाबाद में 1948 में पैदा हुए नुसरत साहब को शहंशाह-ए-कव्वाली कहा जाता था। लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ संगीत की नहीं थी, बल्कि एक ऐसी कहानी थी जिसमें सपने टूटे, रिश्ते निभाए गए और इमोशंस की बाढ़ आ गई। बॉलीवुड के लिए उनका सफर तो ऐसा था जैसे कोई तूफान आ गया हो, जो आज भी गूंज रहा है। आइए, उनकी जिंदगी के उन पन्नों को पलटें जो आपको हंसाएंगे, रुलाएंगे और सोचने पर मजबूर कर देंगे।

Nusrat Fateh Ali Khan

Image Source: Reddit

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पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे

नुसरत साहब का बचपन वैसा नहीं था जैसा हम सोचते हैं। उनके खानदान में कव्वाली की परंपरा 600 साल से चली आ रही थी। दादा-परदादा सब कव्वाल थे। उनके पिता फतेह अली खान खुद भी मशहूर कव्वाल थे, लेकिन वो नुसरत को डॉक्टर बनाना चाहते थे। क्यों? क्योंकि उस जमाने में कव्वालों को समाज में कम इज्जत मिलती थी। नुसरत के पिता सोचते थे कि बेटा इंजीनियर बने या डॉक्टर, तभी नाम रोशन होगा। नुसरत को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया। लेकिन दिल तो संगीत का दीवाना था। छोटे-छोटे में ही वो अपने पिता के साथ तबला बजाते और चुपके से गाने सुनते। पिता जी को शक हो जाता तो डांट पड़ती। लेकिन महज 16 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद नुसरत साहब पर जिम्मेदारियां एकदम से बढ़ गईं। इसके बाद उन्होंने चाचा मुबारक अली खान के साथ काम करना शुरू किया और फैसला कर लिया था, अब कव्वाली ही उनकी जिंदगी होगी। वो पहले तबला बजाते, फिर धीरे-धीरे लीड सिंगर बन गए।

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