Lights Camera Action EP-1: 50's का दशक बॉलीवुड के आज के दौर से बिल्कुल उल्टा था। जहां आज के नौजवान हीरो बनने के लिए प्रोडक्शन हाउसेज के बाहर लाइनें लगाकर रखते हैं, वहीं 50 के दशक में फिल्मकारों को ढूंढ-ढूंढकर कलाकार लाने पड़ते थे क्योंकि उस वक्त अच्छे घरों के बच्चे इस पेशे से दूर ही रहते थे। यही कारण है कि 50 और 60 के दशक में कई ऐसे एक्टर बॉलीवुड इंडस्ट्री में आए जो पेट भरने के पैसे भी नहीं कमा पा रहे थे। ऐसा ही एक कलाकार साल 1955 में फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बना, जिसने अपना पहला ऑडिशन दिलीप कुमार साहब (Dileep Kumar) के तंग कपड़े पहनकर दिया था। लाइट, कैमरा, एक्शन के पहले एपिसोड में हम आज इसी स्टार के बारे में बात करेंगे...
पाकिस्तान बंटवारे के बाद भारत पहुंचा बलराज दत्त नाम का खूबसूरत नौजवान
Light Camera Action EP-1: दिलीप कुमार के तंग कपड़े पहनकर ऑडिशन देने पहुंचा 6 फुट 1 इंच का ये नौजवान, रेडियो में करता था काम
बात 40's की है जब अंग्रेजों ने भारत-पाकिस्तान नाम के दो मुल्क बनाने का फैसला लिया और हिन्दुस्तान के सीने पर रेडक्लिफ लकीर खींच दी। इस लकीर ने लाखों लोगों को इधर से उधर जाने को मजबूर कर दिया। क्योंकि पाकिस्तान मुसलमानों के लिए बना मुल्क था, जिस कारण लाखों हिन्दुओं को अपना सबकुछ छोड़कर रातों-रात भारत की तरफ पलायन करना पड़ा। जब लाखों लोग पाकिस्तान से भारत की तरफ बढ़ रहे थे तो उस भीड़ में एक नौजवान भी था जिसका नाम बलराज दत्त था। बलराज दत्त के माता-पिता आज के पाकिस्तान के झेलम जिले के कुर्द गांव में शान से रहते थे, जहां उन्हें दीवान साहब बोला जाता था। भारत-पाक बंटवारे की वजह से बलराज दत्त को अपनी जमीनें और घर छोड़कर हिन्दुस्तान आना पड़ा और खानदानी रुत्बा वहीं पर रह गया। ('Don 3' में रणवीर सिंह को रिप्लेस कर सकते हैं ये 2 बड़े सुपरस्टार !! नाम जानकर झूम उठेंगे फैन्स)
घरवालों का पेट पालने के लिए किया मैकेनिक का काम
Light Camera Action EP-1: दिलीप कुमार के तंग कपड़े पहनकर ऑडिशन देने पहुंचा 6 फुट 1 इंच का ये नौजवान, रेडियो में करता था काम
बलराज दत्त पाकिस्तान में सिर्फ अपना रुत्बा और रुबाब ही नहीं बल्कि जमीन-जायदाद भी छोड़कर आया था। हिन्दुस्तान में उसे अपने परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करनी पड़ी। शुरुआती दौर में बलराज दत्त ने कई छोटी-मोटी जॉब्स कीं और एक वक्त तो ऐसा भी आया जब बलराज ने मुंबई के परिवहन डिपार्टमेंट में मैकेनिक की नौकरी भी की लेकिन किस्मत इस युवा लड़के को कुछ और ही बनाना चाहती थी। कुछ समय के बाद बलराज की किस्मत ने करवट ली और इसे रेडियो सिलोन में काम मिल गया।
रेडियो सिलोन के लिए बलराज दत्त ने लिया दिलीप कुमार का इंटरव्यू
मैकेनिक का काम करते-करते बलराज दत्त ने कॉलेज ज्वाइन किया और पढ़ाई जारी रखने के लिए रेडियो सिलोन में भी नौकरी ज्वाइन कर ली। बस यहीं से बलराज दत्त की किस्मत ने करवट ली और एक दिन उसे मौका मिला उस दौर के सबसे बड़े एक्टर दिलीप कुमार का इंटरव्यू लेने का।
Light Camera Action EP-1: दिलीप कुमार के तंग कपड़े पहनकर ऑडिशन देने पहुंचा 6 फुट 1 इंच का ये नौजवान, रेडियो में करता था काम (Image Source: Social Media/Sunil Dutt Movies)
बात उस वक्त की है जब दिलीप कुमार डायरेक्टर रमेश सहगल की एक फिल्म कर रहे थे। उसके दौरान बलराज दत्त ने दिलीप कुमार साहब का एक इंटरव्यू लिया, जिसे रमेश सहगल ने सुना। रमेश सहगल इस लड़के की आवाज से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने जब इस खूबसूरत नौजवान को देखा तो फिल्मों के लिए ऑडिशन देने की सलाह दे डाली। रमेश सहगल की सलाह पर बलराज एक दिन काम के बाद स्क्रीन टेस्ट के लिए पहुंच गया।
दिलीप कुमार के तंग कपड़े पहनकर बलराज दत्त ने दिया 1st ऑडिशन
Light Camera Action EP-1: दिलीप कुमार के तंग कपड़े पहनकर ऑडिशन देने पहुंचा 6 फुट 1 इंच का ये नौजवान, रेडियो में करता था काम (Image Source: Social Media/Sunil Dutt Movies)
जब बलराज दत्त अपने पहले स्क्रीन टेस्ट के लिए पहुंचा तो निर्देशक के सहायक ने उसे कैरेक्टर के मुताबिक कपड़े बदलने की सलाह दी और दिलीप कुमार के पहने हुए कपड़े दिए। बलराज दत्त लम्बा-चौड़ा नौजवान था, जिसकी लम्बाई दिलीप कुमार से काफी ज्यादा थी। कसमसाते हुए बलराज दत्त ने दिलीप कुमार साहब के कपड़े पहने और अपना स्क्रीन टेस्ट रिकॉर्ड कराया। भले ही बलराज को दिलीप साहब के कपड़े तंग आए हो लेकिन ये ट्रेजडी किंग की तरफ से अनदेखा और अनसुना आशीर्वाद था, जो बलराज की जिंदगी बदलने वाला था।
बलराज दत्त के हाथ लगी फिल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म'.... बन गई किस्मत
निर्देशक रमेश सहगल को बलराज दत्त का स्क्रीन टेस्ट पसंद आया और उन्होंने इस लड़के को 'रेलवे प्लेटफॉर्म' नाम की एक फिल्म ऑफर की। फिल्म दर्शकों को पसंद आई और बॉक्स ऑफिस पर भी इसने ठीक-ठाक बिजनेस किया। फिल्म रिलीज होने से पहले बलराज दत्त के साथ एक और बड़ी चीज हुई, जिससे इसकी पहचान बदल गई। क्योंकि उन दिनों बलराज साहनी नाम के बड़े अभिनेता पहले से काम कर रहे थे, जिन्हें पूरा भारत जानता था जिस कारण मेकर्स ने बलराज दत्त को सुनील दत्त नाम की नई पहचान दी। बदली हुई ये पहचान बलराज दत्त के साथ आखिरी सांस तक रही और सारा जमाना पाकिस्तान से आए इस लड़के को आज भी सुनील दत्त के नाम से ही जानता है।
एक्टिंग के साथ-साथ सुनील दत्त ने आजमाया प्रोडक्शन में भी हाथ
Light Camera Action EP-1: दिलीप कुमार के तंग कपड़े पहनकर ऑडिशन देने पहुंचा 6 फुट 1 इंच का ये नौजवान, रेडियो में करता था काम (Image Source: Social Media/Sunil Dutt Movies)
सुनील दत्त ने 50 के दशक से बॉलीवुड में काम करना शुरू किया था और 2000 के बाद तक एक्टिंग में सक्रिय रहे। उन्होंने कई दफा फिल्मों से ब्रेक भी लिया लेकिन जाते-जाते अपने बेटे संजय दत्त के साथ 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' जैसी सुपरहिट फिल्म कर गए जो सालों-साल लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी। बताया जाता है कि सुनील दत्त वक्त के बहुत पाबंद थे और समय पर हर काम करने के लिए जाने जाते थे। उनके हुनर को संयम और संतुलित जीवन का भरपूर साथ मिला और उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया। सुनील दत्त ने अपने बैनर अजंता आर्ट्स के अंतर्गत 'मुझे जीने दो', 'रेश्मा और शेरा', 'मन के गीत' और 'दर्द का रिश्ता' जैसी सफल फिल्में बनाईं और बेटे संजय दत्त को भी 'रॉकी' जैसी सफल मूवी से लॉन्च किया, जो आगे चलकर इंडस्ट्री के सफल एक्टर साबित हुए।
