Amitabh Bachchan को दिल्ली हाईकोर्ट में होना पड़ेगा पेश, पर्सनैलिटी राइट्स केस में अदालत ने दिया निर्देश

  • Authored by: अभय
  • Updated Oct 10, 2026, 12:55 PM IST

Amitabh Bachchan Personality Rights Case: अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने नया निर्देश दिया है। अब एक्टर को लेकर अदालत ने अहम बात कही है।

Amitabh Bachchan Personality Rights Case: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) लंबे समय से अपने नाम, तस्वीर और आवाज के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने नया निर्देश दिया है, जिसके बाद अभिनेता का पर्सनैलिटी राइट्स केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल, बिग बी ने अलग-अलग लोगों और कंपनियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि कुछ लोग उनकी पहचान का इस्तेमाल बिना अनुमति के व्यावसायिक फायदे के लिए कर रहे हैं। अब इस मामले में कुछ पक्षों के साथ समझौते की कोशिश हुई है, लेकिन इसे लेकर जरूरी औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हो पाई हैं। अब कोर्ट ने इस मामले में एक नई बात कही है, जिसको लेकर खूब चर्चा हो रही है।

Amitabh Bachchan Personality Rights Case

अमिताभ बच्चन के केस में कोर्ट ने कही ये बात (Image Source: IMDb)

कोर्ट ने कही ये बात

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने शुक्रवार को ये निर्देश जारी किया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अदालत को बताया कि नवंबर 2022 में कोर्ट ने अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की रक्षा करते हुए एकतरफा अंतरिम रोक का आदेश दिया था। इसके बावजूद, मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के जरिए आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की कोशिश की। दोनों पक्षों ने बताया कि कुछ प्रतिवादियों के साथ आपसी सहमति से समझौता हो गया है। हालांकि, अमिताभ बच्चन की तरफ से कुछ व्यवस्थागत दिक्कतों के कारण समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हो सके। ऐसे में अमिताभ बच्चन के वकील ध्रुव आनंद ने जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और समझौते को अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए और समय मांगा। अदालत ने इसके लिए 16 नवंबर तक का समय दे दिया। साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि अगर समझौता पूरा नहीं होता या किसी वजह से यह अंतिम रूप नहीं ले पाता, तो अमिताभ बच्चन को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा, बशर्ते वो मुकदमे में उठाए गए किसी भी दावे या मुद्दे पर आगे कार्रवाई करना चाहते हों। अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'समय दिया जाता है। मामले को 16.11.2026 को सूचीबद्ध किया जाए। अगर समझौता नहीं होता या अधूरा रहता है, तो मुकदमे में उठाए गए किसी भी दावे या मुद्दे पर आगे कार्रवाई करने की इच्छा होने पर वादी को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा। इससे अदालत को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 10 नियम 2 और आदेश 5 नियम 3 के साथ-साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।'

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