नरम-गरम रिश्ते और मनमुटाव...6 साल में चौथी बार पास आए चाचा-भतीजा, पर क्या मैनपुरी उप-चुनाव के बाद बना रहेगा 'अपनापन'?

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 22, 2022, 04:23 PM IST

Mainpuri Bypolls 2022: 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 403 सीटों में सिर्फ 111, सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को आठ और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को छह सीटें मिलीं, जिससे प्रदेश में सरकार बनाने का अखिलेश का सपना टूट गया। इसके बाद उनका सुभासपा और शिवपाल से राजनीतिक रिश्‍ता टूट गया था।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को सैफई में एक मंच पर आकर लोगों को संबोधित किया तो छह वर्ष में यह चौथा मौका था, जब दोनों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे का सहयोग करने की घोषणा की। हालांकि, दोनों के समर्थक इस नयी सुलह को लेकर अभी संशय में हैं।

akhilesh shivpal yadav

2016 में सपा की सरकार का नेतृत्व कर रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव समेत कुछ नेताओं को अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया था। (सोर्स: @yadavakhilesh)

अखिलेश के मुख्यमंत्री रहते हुए 2016 में पहली बार दोनों के बीच मतभेद सार्वजनिक हुए थे और तब से दोनों के रिश्ते कभी गरम तो कभी नरम रहे हैं। इस बार सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी संसदीय क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव ने चाचा-भतीजा को मनमुटाव दूर करने का मौका फिर से उपलब्ध कराया है। मैनपुरी में सपा ने अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके खिलाफ कभी शिवपाल के करीबी रहे रघुराज शाक्य को मैदान में उतारा है।

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