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मोदी vs राहुल: चुनावी जनसभाओं-रैलियों में कौन रहा टॉप स्कोरर? जानिए कैसे दो नारों के बीच उलझा रहा लोकसभा चुनाव

Lok Sabha Election: चुनाव आयोग की ओर से 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की घोषणा की गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी आचार संहिता लागू होने से पहले ही देश के कई राज्यों का तूफानी दौरा कर रहे थे। 75 दिन की इस अवधि में पीएम मोदी ने 180 रैलियां और रोड शो किए हैं। पीएम मोदी की रैलियों के साथ उनके रोड शो और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने का आंकड़ा देखें तो यह संख्या 206 है।

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Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव के लिए 75 दिन का मैराथन अभियान अब थम चुका है। सातवें चरण के मतदान के लिए हुए आखिरी प्रचार में पार्टियों ने जमकर ताकत झोंकी और गुरुवार शाम चुनाव प्रचार पर पूरी तरह ब्रेक लग गया। अब 1 जून को इस चरण के मतदान होंगे और इसके बाद इंतजार होगा मतगणना वाले दिन यानी 4 जून का। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद से 75 दिन के इस तूफानी चुनाव प्रचार में सभी पार्टियों ने पूरी ताकत झोंकी। बड़ी-बड़ी रैलियां, चुनावी जनसभाएं और रोडशो के जरिए मतदाताओं के मन में उतरने की पुरजोर कोशिश हुई। एनडीए की तरफ से चुनाव अभियान को जहां पीएम मोदी ने लीड किया तो इंडिया गठबंधन की तरफ से मुख्य चेहरा कांग्रेस नेता राहुल गांधी रहे।

बता दें, चुनाव आयोग की ओर से 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की घोषणा की गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी आचार संहिता लागू होने से पहले ही देश के कई राज्यों का तूफानी दौरा कर रहे थे। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ देश के दक्षिण छोर से शुरू हुआ उनका प्रचार अभियान उत्तर में स्थित पंजाब के होशियारपुर में आकर समाप्त हुआ। 75 दिन की इस अवधि में पीएम मोदी ने 180 रैलियां और रोड शो किए हैं। पीएम मोदी की रैलियों के साथ उनके रोड शो और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने का आंकड़ा देखें तो यह संख्या 206 है। इसके साथ ही उन्होंने इस दौरान 80 से ज्यादा मीडिया चैनलों, अखबारों, यूट्यूबरों, ऑनलाइन मीडिया माध्यमों को अपना साक्षात्कार दिया।

विपक्ष को अकेले टक्कर देते रहे पीएम मोदी

लोकसभा चुनाव में विपक्ष के इंडिया गठबंधन की तरफ से फायर ब्रांड नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल ने भी जमकर चुनाव प्रचार किया, लेकिन पीएम मोदी की जनसभाओं और रोडशो को देखें तो वह पूरे विपक्ष को अकेले ही टक्कर देते नजर आए। औसतन हर दिन पीएम मोदी ने दो से ज्यादा रैलियां और रोड शो के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं, पीएम मोदी मार्च में चुनाव की घोषणा से पहले फरवरी और मार्च की 15 तारीख तक 15 रैलियां कर चुके थे। पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा 22 जनसभाएं और कुल 31 चुनावी कार्यक्रम यूपी में किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक में 11, तेलंगाना में 11, तमिलनाडु में 7, आंध्र प्रदेश में 5 और केरल में 3 रैलियां की हैं। पीएम मोदी ने बिहार में 20 चुनावी कार्यक्रम और महाराष्ट्र में 19 चुनावी कार्यक्रम के साथ पश्चिम बंगाल में 20 रैलियों को संबोधित किया। इसके साथ ही पीएम ने ओडिशा और मध्य प्रदेश में 10 चुनावी कार्यक्रम किए। वहीं, पीएम का फोकस झारखंड पर भी रहा, जहां उन्होंने 7 कार्यक्रम किए।

बीजेपी व एनडीए की तरफ से चुनावी रैलियां-

नेता चुनावी रैली, जनसभा, इंटरव्यू, रोडशो
नरेंद्र मोदी206
अमित शाह 188
जेपी नड्डा 134
राजनाथ सिंह101

इंडिया गठबंधन की तरफ से चुनावी रैलियां-

नेता चुनावी रैली, जनसभा, इंटरव्यू, रोडशो
राहुल गांधी107
अखिलेश यादव 73
ममता बनर्जी61
मल्लिकार्जुन खड़गे 100+
प्रियंका गांधी 108
तेजस्वी यादव 251

दो नारों के बीच उलझा रहा चुनाव

चुनाव कोई भी हो, उसमें एजेंडा सेट करने का काम चुनावी नारे ही करते हैं। ये नारे ही होते हैं जो मतदाताओं के मूड को बदलने के लिए सबसे बड़ा चुनावी हथियार होते हैं। फिर चाहें 2014 का लोकसभा चुनाव हो या 2019 का या फिर 2024 का। 2014 में 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसे नारे ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत दिलाने में काफी योगदान दिया था, तो 2019 में 'मैं भी चौकीदार' कैंपेन से बीजेपी ने दोबारा सत्ता हासिल की थी। वहीं, 2024 की बात करें तो 'अबकी बार 400 पार' और 'फिर एक बार मोदी सरकार' नारों ने मतदाताओं का ध्यान अपनी तरफ खूब आकर्षित किया। वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस का 'हाथ बदलेगा हालात' और 'न्याय योजना' लोगों की जुबान पर छाया रहा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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