झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने असम विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सोमवार को 21 उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए साफ संकेत दिया है कि वह अब क्षेत्रीय दल की छवि से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करना चाहती है। यह कदम झामुमो की विस्तार रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
झामुमो के मुखिया हेमंत सोरेन (फोटो- jmm.jharkhand.1)
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मजबूत सीटों पर नजर
पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद झामुमो ने असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मजबूत सीट से प्रीति रेखा बारिया, बिस्वनाथ से तेहारू गौड़, खुमताई से अमित नाग, चबुआ से भुबेन मुरारी, गोसाईंगांव से फेड्रिक्सन हसदा, सोनारी से बलदेव तेली, डिगबोई से भरत नायक और भेरगांव से प्रभात दास पनिका समेत कई अन्य नेताओं को मैदान में उतारा है।
आदिवासी समुदाय पर नजर
झामुमो की रणनीति का केंद्र असम के चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय हैं। अनुमान है कि इस वर्ग की आबादी करीब 70 लाख के आसपास है, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनकी पारिवारिक और सामाजिक जड़ें झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि पार्टी को लगता है कि इन समुदायों के बीच उसकी स्वीकार्यता बढ़ सकती है और यह आधार उसके राजनीतिक विस्तार में मददगार साबित हो सकता है। पार्टी का मानना है कि चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का पर्याप्त समाधान नहीं हो पाया है। झामुमो का दावा है कि ये समुदाय अब मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं और पार्टी उनकी आवाज बनने का प्रयास कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, असम में 21 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला झामुमो की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जहां वह अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार कर राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
