Gujarat: परंपरा बन गई है वंशवाद की राजनीति? इन सीटों पर BJP और Congress ने नेता पुत्रों को बांटे टिकट

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 21, 2022, 02:04 PM IST

Gujarat Assembly Elections 2022: त्रिवेदी ने कहा कि कुछ जगह ऐसे कई ‘‘दबंग’’ नेता हैं जिनके सामने उनके राजनीतिक दलों का कोई अन्य नेता खड़ा होने की हिम्मत नहीं करता। उन्होंने कहा, ‘‘वे लगातार जीत दर्ज करते हैं और उन्हें टिकट दिया जाता है क्योंकि दल उनका विकल्प नहीं खोज पाते। उनकी जगह केवल उनके बेटों, बेटी या पत्नी को ही टिकट दी जाती है।’’

Gujarat Assembly Elections 2022: राजनीतिक दलों द्वारा कई मौकों पर वंशवाद का विरोध किए जाने के बावजूद टिकट देते समय वे अक्सर वंशवाद की राजनीति करते ही नजर आते हैं, जो देश में होने वाले हर चुनाव की एक परम्परा सी बन गई है। यही परम्परा गुजरात विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल रही है, जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने राज्य की 182 विधानसभा सीटों में से 20 पर मौजूदा एवं पूर्व विधायकों के बेटों को उम्मीदवार बनाया है। इनमें से कांग्रेस के 13 और भाजपा के सात उम्मीदवार हैं। गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में एक और पांच दिसंबर को चुनाव होंगे, जबकि मतगणना आठ दिसंबर को की जाएगी।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

विश्लेषकों के अनुसार, राजनीतिक दल कई बार पूर्व व मौजूदा विधायकों के बच्चों को टिकट देने के लिए मजबूर होते हैं। इसका कारण ‘‘जीत की प्रबल क्षमता’’ या उन निर्वाचन क्षेत्रों में विकल्प का अभाव है, जहां इन नेताओं का दबदबा होता है। आदिवासी नेता एवं 10 बार के कांग्रेस विधायक मोहन सिंह राठवा के पार्टी के साथ अपने दशकों पुराने संबंध तोड़ने और पिछले महीने भाजपा में शामिल होने का फायदा उनके बेटे को मिला। सत्तारूढ़ पार्टी ने उनके बेटे राजेंद्र सिंह राठवा को छोटा उदेपुर सीट से टिकट दिया है।

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