Sultanganj Vidhan Sabha 2025: कभी कांग्रेस का थी गढ़, 25 सालों से लहरा रहा JDU का परचम; आखिर क्या है सुल्तानगंज सीट का समीकरण?

Sultanganj Assembly Constituency (सुल्तानगंज विधानसभा सीट): बिहार चुनाव की तैयारियां अब लगभग पूरी हो चुकी हैं, पार्टियां भी सारी औपचारिकताएं पूरी कर चुकी हैं। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में बिहार में मतदान होंगे और 14 नवंबर को यह साफ हो जाएगा कि किसकी सरकार बनेगी। लेकिन इन सबके बीच भागलपुर की सुल्तानगंज विधानसभा सीट का समीकरण समझ लेना भी जरूरी है। कभी कांग्रेस का गढ़ रही यह सीट पिछले 25 सालों से जदयू के कब्जे में है। आइए जानते हैं सुल्तानगंज विधानसभा सीट के समीकरण को।

Sultanganj Assembly Constituency (सुल्तानगंज विधानसभा सीट): भागलपुर जिले की सुल्तानगंज सीट बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली क्षेत्र के रूप में भी जानी जाती है। गंगा तट पर बसा यह इलाका अजगैबीनाथ मंदिर के कारण आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल श्रावण माह में यहां से देवघर तक की कांवड़ यात्रा लाखों श्रद्धालुओं को जोड़ती है। इस दौरान न केवल धार्मिक माहौल चरम पर होता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ी ताकत मिलती है। आइए इस सीट पर एक नजर डाल लेते हैं।

Sultanganj Assembly Constituency.

क्या है सुल्तानगंज सीट का समीकरण

सुल्तानगंज का कांग्रेस से जदयू तक का सफर

सुल्तानगंज का राजनीतिक इतिहास उतना ही दिलचस्प है जितना इसका सांस्कृतिक महत्व। यह सीट कभी कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, जिसने यहां से 7 बार जीत दर्ज की। लेकिन साल 2000 के बाद से यह क्षेत्र जदयू (JDU) के मजबूत कब्जे में आ गया। चाहे वह समता पार्टी के दौर की बात हो या जनता दल (यूनाइटेड) की, नीतीश कुमार की पकड़ इस सीट पर लगातार बनी रही। अब तक 6 बार जदयू यहां से विजयी रही है, जबकि जनता दल, जनता पार्टी और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने भी इस सीट से प्रतिनिधित्व किया है। 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के ललित नारायण मंडल ने कांग्रेस के ललन कुमार को 11,265 वोटों से हराया था। एलजेपी को मात्र 10,222 वोट मिले थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जदयू ने इस क्षेत्र में 26,749 वोटों की बढ़त हासिल की, जो यह दर्शाता है कि सुल्तानगंज अब भी नीतीश कुमार के राजनीतिक प्रभाव में है।

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