Dhoraiya Assembly Constituency (धोरैया विधानसभा सीट): बिहार के बांका जिले की धोरैया विधानसभा सीट इस बार फिर से सियासी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित यह सीट बांका लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। धोरैया और राजौन प्रखंडों को मिलाकर बनी यह सीट अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक महत्व के कारण पूरे जिले में खास पहचान रखती है।
क्या है धोरैया सीट का समीकरण
धोरैया का राजनीतिक इतिहास
धोरैया विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास बताता है कि यहां की जनता ने कभी किसी एक पार्टी को लगातार प्राथमिकता नहीं दी। 1951 में इस सीट की स्थापना के बाद अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें कांग्रेस, सीपीआई और जदयू (समता पार्टी सहित) ने पांच-पांच बार जीत दर्ज की है। 1969 में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की थी।
इस बार कैसा है चुनावी हाल
2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने पहली बार इस सीट पर कब्जा जमाया था। भूदेव चौधरी ने जदयू के मनीष कुमार को हराकर इस सीट पर राजद का झंडा फहराया था। इस बार जदयू ने मनीष कुमार पर फिर से भरोसा जताया है, जबकि राजद ने भूदेव चौधरी की जगह त्रिभुवन प्रसाद को टिकट दिया है। जन स्वराज पार्टी से सुमन पासवान मैदान में हैं।
रहा है JDU का दबदबा
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो जदयू का इस क्षेत्र में लम्बे समय तक दबदबा रहा है। हालांकि 2020 में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इससे पहले वह लगातार पांच चुनाव जीत चुकी थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भी एनडीए उम्मीदवार को यहां बढ़त मिली थी। ऐसे में इस बार भी NDA के पक्ष में माहौल माना जा रहा है।
धोरैया में कब होंगे चुनाव (Dhoraiya Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 13 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 21 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 23 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 11 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
धोरैया का धार्मिक महत्व
धोरैया की धार्मिक पहचान भी बेहद समृद्ध है। यहां का धनकुंड नाथ महादेव मंदिर स्थानीय आस्था का प्रमुख केंद्र है, जिसका इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना बताया जाता है। माना जाता है कि मुगल काल में भी यह मंदिर एक प्रसिद्ध पूजा स्थल था और आज भी इसके स्थापत्य में उस युग के अवशेष देखे जा सकते हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में स्थित प्राचीन काली मंदिर, राजौन के धनसार गांव का दुर्गा मंदिर और बटसार का दुर्गा बाजार मंडप धार्मिक रूप से अत्यंत प्रसिद्ध हैं। बताया जाता है कि दुर्गा बाजार की पूजा परंपरा बनारस शैली पर आधारित है और 1970 के दशक से इसकी ख्याति बिहार और झारखंड तक फैली हुई है। भौगोलिक रूप से धोरैया उपजाऊ क्षेत्र है। इसके आसपास आधा दर्जन नदियां बहती हैं, जिससे यहां की भूमि कृषि के लिए अनुकूल बन गई है। यही कारण है कि इस इलाके की अर्थव्यवस्था आमतौर पर खेती-किसानी पर निर्भर है।
