18वें और 19वें मुख्यमंत्री : भागवत झा आजाद और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के सीएम बनने की कहानी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में किस पार्टी को जीत मिलेगी और कौन मुख्यमंत्री बनेगा, यह तो 14 नवंबर को ही पता चलेगा। लेकिन इससे पहले हम आपके लिए लेकर आए हैं हमारी स्पेशल मुख्यमंत्री सीरीज। जिसके तहत आज हम बात कर रहे हैं बिहार के 18वें मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद व 19वें मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के बारे में, चलिए जानते हैं -

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का प्रचार जोरों पर है। पहले चरण के तहत 6 नवंबर को मतदान होना है और इसके लिए प्रचार अपने अंतिम चरण में है। महागठबंधन और NDA दोनों बड़े गठबंधनों ने बिहार में अपनी पूरी ताकत झौंक दी है। दोनों गठबंधनों के साथ ही अन्य छोटे दलों के भी बड़े-बड़े नेता चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी पूरी ताकत झौंके हुए हैं। बिहार चुनाव पर हमारी विशेष कवरेज जारी है और मुख्यमंत्री सीरीज के तहत हम बिहार के सभी मुख्यमंत्रियों के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं। आज इस सीरीज में हम बिहार के 18वें मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद और 19वें सीएम सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के बारे बात करेंगे। भागवत झा जहां 1 साल 24 दिन तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे, वहां सत्येन्द्र नारायण सिन्हा का कार्यकाल 270 दिन का ही रहा। चलिए जानते हैं दोनों के बारे में विस्तार से -

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बिहार के 18वें और 19वें मुख्यमंत्री की पूरी कहानी

भागवत झा आजाद की कहानी

भागवत झा आजाद 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 1989 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। बिहार की राजनीति में उन्हें 'शेर-ए-बिहार' नाम से जाना गया। वह एक बड़े राजनेता होने के साथ ही साहित्यकार भी थे। अपनी किताब मृत्युंजयी में उन्होंने लोक दृष्टि विकसित करने के लिए जन-संघर्ष को अनिवार्य बताया है। विकट से विकट परिस्थितियों में भी उनका मनोबल कभी नहीं गिरा और इसी वजह से स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ही उनके नाम के साथ 'आजाद' शब्द जुड़ गया।

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