बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पहले चरण का मतदान 6 और दूसरे चरण के तहत 11 नवंबर को मतदान होगा। इसके बाद 14 नवंबर को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस चुनावी मौसम में हम आपके लिए 'मुख्यमंत्री' सीरीज लेकर आए हैं। जिसमें हम एक-एक कर बिहार के सभी मुख्यमंत्रियों के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं। इस कड़ी में अब तक 11 मुख्यमंत्रियों की बात हो चुकी है। आज बात राज्य के 12वें मुख्यमंत्री केदार पांडे के बारे में। केदार पांडे 1 साल तीन महीने से ज्यादा तक इस पद पर रहे। चलिए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं -
बिहार के 12वें मुख्यमंत्री केदार पांडे
केदार पांडे का शुरुआती जीवन
केदार पांडे का जन्म 14 जून 1920 को मौजूदा बिहार में पश्चिमी चंपारण जिले के तौलाहा गांव में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा परोराहा गांव में हुई। बाद में वह आगे की पढ़ाई के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय चले गए और यहां से M.Sc. व LL.B. की डिग्री हासिल की। साल 1945 में उन्होंने अपने वकालत के करियर की शुरुआत की। हालांकि, इससे पहले ही उन्होंने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता भी ले ली।
ये भी पढ़ें - मुख्यमंत्री : कभी वोट मांगने नहीं गए, फिर भी चुनाव नहीं हारे 'श्रीबाबू'; CM रहते अनशन पर बैठे और नेहरू से मनवा ली बात
यंग टर्क्स ग्रुप के सदस्य रहे केदार पांडे
केदार पांडे बिहार के प्रसिद्ध यंग टर्क्स ग्रुप के सदस्य थे, जिसमें उनके अलावा बिंदेश्वरी दुबे, भगवत झा आजाद, चंद्रशेखर सिंह, सत्येंद्र नारायण सिंह, अब्दुल गफूर और सीताराम केसरी भी शामिल थे। सीताराम केसरी आग चलकर 90 के दशक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, जबकि अन्य सभी बिहार के मुख्यमंत्री रहे। साल 1948 में उनकी शादी हुई और उनकी पत्नी का नाम कमला पांडे था। उनके दो बेटे और दो बेटियां भी हुईं। केदार पांडे 1946 से 1957 तक ट्रेड यूनियन आंदोलनों में शामिल रहे।
चुनावी राजनीति में केदार पांडे
केदार पांडे ने दूसरे बिहार विधानसभा चुनाव यानी 1957 में पहली बार बगहा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें सफलता मिली। 1957 से 1962 तक उन्होंने गृह राज्य मंत्री, पुलिस, सिंचाई और बिजली विभाग जैसे कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 1967 से 1977 तक वह नौतन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते और उद्योग व कृषि मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। भोला पासवान शास्त्री की 222 दिन की सरकार गिरने के बाद राज्य में 70 दिन तक राष्ट्रपति शासन रहा।
ये भी पढ़ें - मुख्यमंत्री : तीसरे मुख्यमंत्री विनोदानंद झा के 'मछली कांड' ने कराई फजीहत 'कामराज्ड' होकर CM की कुर्सी गंवाई
मुख्यमंत्री बने केदार पांडे
19 मार्च 1972 को केदार पांडे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह 2 जुलाई 1973 तक मुख्यमंत्री के पद पर रहे। 1 साल 105 दिन मुख्यमंत्री रहने के बाद वह मुख्यमंत्री पद से हटे और कांग्रेस ने विधान परिषद सदस्य अब्दुल गफूर को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। वह मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। 1977 में वह बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष बने। आपातकाल के बाद 1977-79 के बीच वह 11 महीनों तक जेल में भी रहे।
ये भी पढ़ें - मुख्यमंत्री : 5 और 51 दिन के CM; एक चुनाव हारकर बना 'हीरो', तो दूसरा जोड़तोड़ का बड़ा 'खिलाड़ी'
1980 में कांग्रेस ने केदार पांडे को बेतिया लोकसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीत गए। 12 नवंबर 1980 से 14 जनवरी 1982 तक केदार पांडे देश के रेल मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे। 3 जुलाई 1982 को उनका दिल्ली में निधन हो गया।
