Why do police cars have red and blue lights : आपने पुलिस की गाड़ियों में हमेशा नीली और लाल रंग की लाइटें ही देखी होंगी। मगर क्या आपको पता है कि इन लाइटों को लगाने के पीछे की वजह क्या है ? ये लाइटें सिर्फ सजावट के लिए नहीं होती बल्कि इनके पीछे की वजह काफी खास होती है। चलिये जानते हैं कि पुलिस की गाड़ी पर नीली और लाल रंग की लाइटें क्यों होती हैं ?
Red and Blue light in police car
जब भी पुलिस की नीली और लाल बत्ती वाली गाड़ी निकलती है तो सभी गाड़ियां तुरंत रास्ता देने लगते हैं। इन लाइटों का उद्देश्य होता है लोगों को सतर्क करना और इमरजेंसी स्थिति की जानकारी देना। लाल रंग को हमेशा खतरे या फिर चेतावनी का संकेत माना जाता है। पुलिस की गाड़ियों में लाल लाइटें इसलिये लगाई जाती हैं ताकि दूर से ही लोगों को समझ में आ जाए कि कोई जरूरी या फिर आपातकालीन स्थिति है। रात के समय लाल रोशनी ज्यादा दूर तक नजर आती है, जिससे सड़क पर मौजूद लोग सतर्क हो जाते हैं।
नीले और लाल रंग का फायदा
नीली लाइटों का इस्तेमाल इसलिये किया जाता है क्योंकि ये सामान्य ट्रैफिक लाइट्स से अलग दिखती हैं। नीला रंग जल्दी ही लोगों का ध्यान आकर्षित करता है और ये संकेत देता है कि वाहन किसी सरकारी या फिर इमरजेंसी सेवा से जुड़ा हुआ है। कई देशों में पुलिस वाहन की पहचान नीली फ्लैशिंग लाइट से ही होती है।
जह लाल और नीली लाइट एक साथ फ्लैश करती हैं तो ज्यादातर लोगों का ध्यान खींचती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार अलग-अलग रंगों की चमकती रोशनी इंसान का ध्यान तेजी से खींचती है। यही वजह है कि पुलिस वाहन को भीड़ या फिर ट्रैफिक में रास्ता काफी जल्दी मिल जाता है।
क्या कहता है साइंस ?
इन लाइटों का एक बड़ा फायदा सुरक्षा भी है। अगर सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाए या फिर पुलिस की चेकिंग चल रही हो तो फ्लैशिंग लाइट दूर से ही लोगों को सतर्क कर देती है। इससे दूसरी गाड़ियां धीरे चलने लगती हैं और हादसों का खतरा कम होता है। साइंस के मुताबिक नीली रोशनी रात में ज्यादा साफ नजर आती है, जबकि लाल रोशनी धुंध या फिर खराब मौसम में भी ध्यान खींचती है। दोनों रंगों का कॉम्बिनेशन इसलिये चुना गया ताकि हर मौसम और स्थिति में पुलिस वाहन आसानी से नजर आए।
भारत में पहले वीआईपी (VIP) गाड़ियों में लाल बत्ती का इस्तेमाल होता था लेकिन बाद में सरकार ने इसे सीमित कर दिया। अब ज्यादातर लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट्स पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं के वाहनों में ही इस्तेमाल की जाती हैं।
