CBSE देता है Re-checking और Re-evaluation का ऑप्शन, जानें दोनों में क्या होता है फर्क

Re Checking and Re evaluation : कई छात्रों को लगता है कि उनके उम्मीद से कम नंबर एग्जाम में आए हैं। ऐसे में सीबीएसई रीचेकिंग और री-इवैल्युएशन जैसी सुविधाएं देता है। मगर ज्यादातर छात्रों को इन दोनों के बीच का फर्क पता नहीं होता। कई छात्र दोनों को एक ही समझ बैठते हैं। ऐसे में कई बार ऐसा भी होता है कि गलत प्रोसेस चुनने से समय और पैसे दोनों का ही नुकसान हो जाता है।

Re Checking and Re Evaluation Difference: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के 10वीं और 12वीं बोर्ड रिजल्ट आने के बाद हर साल हजारों छात्र अपने नंबर्स को लेकर असंतुष्ट नजर आते हैं। इस बार भी ये दोनों विकल्प काफी चर्चा में बने हुए हैं वजह है इनकी फीस। हालांकि बोर्ड ने बवाल के बीच फीस कम करने का फैसला भी लिया है। इस बीच कई छात्रों को रीचेकिंग और री इवैल्युएशन में फर्क कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चलिये आपको बताते हैं कि दोनों में फर्क क्या होता है।

re checking and re Evaluation

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रीचेकिंग और री इवैल्युएशन

कई छात्रों को लगता है कि उनके उम्मीद से कम नंबर एग्जाम में आए हैं। ऐसे में सीबीएसई रीचेकिंग और री-इवैल्युएशन जैसी सुविधाएं देता है। मगर ज्यादातर छात्रों को इन दोनों के बीच का फर्क पता नहीं होता। कई छात्र दोनों को एक ही समझ बैठते हैं। ऐसे में कई बार ऐसा भी होता है कि गलत प्रोसेस चुनने से समय और पैसे दोनों का ही नुकसान हो जाता है।

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