What is Balkan Region: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) सेक्शन में अक्सर ऐसे भौगोलिक और ऐतिहासिक क्षेत्रों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं, जिन्होंने दुनिया की दिशा तय की हो और अक्सर इस तरह के सवालों के जवाब उम्मीदवारों के पास नहीं होते हैं। ऐसा ही एक अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण भू-भाग है बाल्कन क्षेत्र (Balkan Region)। क्या आप जानते हैं यह क्या होता है? और क्यों यूपीएससी की तैयारी के लिए यह जरूरी है?
UPSC के लिए क्यों जरूरी है बाल्कन क्षेत्र (Photo - AI/Newsroom Verified)
बाल्कन क्षेत्र के बारे में क्यों पढ़ना है जरूरी
दक्षिण-पूर्वी यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप में स्थित यह क्षेत्र अपनी जटिल जातीय विविधता, राजनीतिक उथल-पुथल और रणनीतिक अवस्थिति के कारण हमेशा से वैश्विक राजनीति के केंद्र में रहा है। विश्व इतिहास में इसे 'यूरोप का बारूद का ढेर' कहा गया है, और वर्तमान समय की भू-राजनीतिक हलचल को देखते हुए यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए इसे गहराई से समझना अनिवार्य हो जाता है।
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क्यों कहा जाता है यूरोप का बारूद का ढेर
बाल्कन क्षेत्र जिसे यूरोप का बारूद का ढेर कहा जाता है, इसके पीछे की वजह क्या है, क्यों इस क्षेत्र को यह नाम मिला है। दरअसल यहां की राजनीतिक स्थिति अत्यंत अस्थिर थी और जरा सी चिंगारी भी पूरे यूरोप में एक भयंकर महायुद्ध भड़का सकती थी। यही कारण है कि इस क्षेत्र को यूरोप का बारूद का ढेर कहा जाता है।
बाल्कन क्षेत्र क्या है?
बाल्कन दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक ऐतिहासिक और भौगोलिक क्षेत्र है, जो चारों तरफ से समुद्रों जैसे एड्रियाटिक, एजियन, ब्लैक और आयोनियन सागर से घिरा हुआ है। इसमें एक या दो नहीं, बल्कि 10 से अधिक देश शामिल है। साथ ही इसमें 3 ऐसे देश हैं, जिसका कुछ हिस्सा बाल्कन क्षेत्र में शामिल है।
प्रमुख क्षेत्र
• अल्बानिया (Albania)
• बोस्निया (Bosnia)
• बुल्गारिया (Bulgaria)
• क्रोएशिया (Croatia)
• कोसोवो (Kosovo)
• मोंटेनेग्रो (Montenegro)
• उत्तरी मैसेडोनिया (North Macedonia)
• सर्बिया (Serbia)
• स्लोवेनिया (Slovenia
• हर्जेगोविना (Herzegovina)
कुछ हिस्से वाले देश
• ग्रीस (Greece)
• रोमानिया (Romania)
• तुर्की (Turkiye)
प्रथम विश्व युद्ध और बाल्कन संकट
यूरोपीय इतिहास में बाल्कन क्षेत्र का सबसे बड़ा महत्व प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। आइए जानते हैं कैसे -
19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में ओटोमन (तुर्क) साम्राज्य के कमजोर होने पर बाल्कन राज्यों ने खुद को स्वतंत्र घोषित करना शुरू किया। बाल्कन क्षेत्र के प्रत्येक राष्ट्र में उग्र राष्ट्रवाद की भावना पनपी। वे सभी सीमाओं का विस्तार करना चाहते थे और एक-दूसरे के खिलाफ क्षेत्रीय दावे ठोक रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप बाल्कन युद्ध हुए। इसके बाद रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी और ब्रिटेन जैसी बड़ी यूरोपीय शक्तियां अपने प्रभाव क्षेत्र और व्यापारिक हितों को बढ़ाने के लिए बाल्कन की राजनीति में हस्तक्षेप करने लगी। देखते ही देखते, सर्बियाई राष्ट्रवादियों द्वारा ऑस्ट्रियाई राजकुमार आर्चड्यूक फ्रांसिस फर्डिनेंड की सारायेवो (बोस्निया की राजधानी) में हत्या ने इसी सुलगते बाल्कन क्षेत्र में आग का काम किया, जो अंतत - प्रथम विश्व युद्ध की चिंगारी बनी।
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UPSC परीक्षा की दृष्टि से यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अब अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल जरूर होगा कि आयोग द्वारा इस टॉपिक से किस प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं। आइए एक नजर इस पर भी डालें-
विश्व इतिहास - 19वीं और 20वीं सदी के यूरोप के इतिहास में 'राष्ट्रवाद का विकास' और 'प्रथम विश्व युद्ध के कारणों' के तहत बाल्कन समस्या एक मुख्य विषय है।
अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं भू-राजनीति - वर्तमान में यूरोपीय संघ (EU) और नाटो (NATO) के विस्तार में बाल्कन देशों की भूमिका, क्षेत्रीय सुरक्षा और रूस-पश्चिम के बीच कूटनीतिक खिंचतान को समझने के लिए यह क्षेत्र बेस का काम करता है।
