CBSE के थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला से बढ़ी 9वीं के छात्रों की टेंशन, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

What is CBSE three language formula: सीबीएसई ने कक्षा नौवीं की भाषा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत सीबीएसई के छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। “थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला” को लेकर अब छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है।

What is CBSE three language formula: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के तहत कक्षा नौवीं की भाषा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। बोर्ड ने कहा कि एक जुलाई 2026 से नौवीं में तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। बोर्ड के अनुसार, एनसीईआरटी द्वारा जारी नए पाठ्यक्रम के अनुरूप यह बदलाव किया जा रहा है। सीबीएसई ने कहा कि नौवीं के विद्यार्थियों के लिए फिलहाल आर3 पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए 2026-27 संस्करण की छठवीं की आर3 किताबों का उपयोग किया जाएगा।

CBSE के थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला से बढ़ी 9वीं के छात्रों की टेंशन

CBSE के थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला से बढ़ी 9वीं के छात्रों की टेंशन

अब छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी होंगी

बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत सीबीएसई के छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। यह व्यवस्था सरकारी और निजी दोनों विद्यालयों पर लागू होगी। नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत लागू किए जा रहे “थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला” को लेकर अब छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है। खासतौर पर CBSE से जुड़े 9वीं कक्षा के छात्र इस बदलाव को लेकर काफी तनाव में दिखाई दे रहे हैं। कई स्कूलों में छात्रों और पैरेंट्स के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर अब कौन-कौन सी भाषाएं पढ़नी होंगी और इसका पढ़ाई पर कितना असर पड़ेगा। राज्यों और छात्रों को अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार भाषाएं चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।

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