जब भी हमारे सामने मीठे या चीनी (Sugar) का नाम आता है, तो अधिकतर लोगों के दिमाग में सबसे पहले गन्ने के लंबे-लंबे खेतों का दृश्य आ जाता है। इसके पीछे की वजह है कि- भारत में चीनी का मुख्य स्रोत पारंपरिक रूप से गन्ना ही रहा है (Sugarcane Sugar), लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में मिठास का यह सफर केवल गन्ने तक सीमित नहीं है? आज के आधुनिक दौर में कृषि विज्ञान और खाद्य तकनीक ने ऐसे कई प्राकृतिक विकल्प ढूंढ निकाले हैं, जिनसे बेहतरीन गुणवत्ता वाली चीनी तैयार की जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी है। आज के युवाओं और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में रुचि रखने वाले इनोवेटर्स के लिए इन विकल्पों के बारे में जानना बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानें चीनी किन-किन चीजों से बनती है।
Sugar किन-किन चीजों से बनती है (Photo - AI)
चुकंदर से बनती है शुगर
गन्ने के बाद दुनिया में चीनी उत्पादन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत 'शुगर बीट' यानी चीनी वाला चुकंदर है। इसका सबसे अधिक इस्तेमाल ठंडे देशों में किया जाता है। यूरोपीय देशों, रूस और अमेरिका जैसे ठंडे जलवायु वाले क्षेत्रों में गन्ने की खेती संभव नहीं होती। यही कारण है कि वहां चुकंदर से ही चीनी बनाई जाती है। चुकंदर से चीनी बनाए जाने की बात सुनने के बाद अगर आपके मन में उसकी मिठास को लेकर सवाल उठ रहा है तो बता दें कि चुकंदर की जड़ों में प्रचुर मात्रा में सुक्रोज (Sucrose) पाया जाता है। इससे तैयार चीनी का स्वाद और रूप रंग बिल्कुल गन्ने से बनी चीनी जैसा ही सफेद और दानेदार होता है। अब अगर इसकी वैश्विक हिस्सेदारी के बारे में बात करें तो दुनिया के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 20% से 25% हिस्सा चुकंदर से ही प्राप्त होता है।
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खजूर और ताड़ चीनी बनाने का पारंपरिक और प्राकृतिक ऑप्शन
दक्षिण पूर्व एशिया और भारत के कई राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत में खजूर और ताड़ के पेड़ों से चीनी व गुड़ बनाने की सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है। बता दें कि ताड़ या खजूर के पेड़ के रस को एकत्र करके उबाला जाता है और फिर सुखाकर दानेदार चीनी का रूप दिया जाता है। खजूर या ताड़ से बनी चीनी स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहतर होती है। यह चीनी रिफाइंड नहीं होती, जिसके कारण इसमें आयरन, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज सुरक्षित रहते हैं।
नारियल के फूल के रस से बनी चीनी
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक आज की युवा पीढ़ी के बीच 'कोकोनट शुगर' तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह सीधे नारियल के फल से नहीं, बल्कि नारियल के पेड़ पर आने वाले फूलों के रस से तैयार की जाती है। जी हां, आपने सही सुना नारियल से भी चीनी बनाई जाती है। इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम होता है, जिससे यह सामान्य चीनी की तुलना में ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाती। इसका स्वाद हल्का कारमेल जैसा होता है।
मक्के से बनी चीनी
चीनी का निर्माण गन्ने के अलावा मक्के से भी किया जाता है। बता दें कि इसका अधिक इस्तेमाल पैकेड फूड और कोल्ड ड्रिंक्स उद्योग में मक्के का उपयोग मिठास के बड़े स्रोत के रूप में किया जाता है। इसका निर्माण मक्के के स्टार्च को प्रोसेस करके एक तरल चीनी के रूप में किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि यह गन्ने की चीनी की तुलना में काफी सस्ती और घुलनशील होती है, इसलिए सॉफ्ट ड्रिंक्स, बेकरी प्रोडक्ट्स और सॉस में इसका अत्यधिक इस्तेमाल होता है।
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मेपल के पेड़ से बनी चीनी
आपने मेपल सिर्प का नाम नाम जरूरी सुना होगा। यह कनाडा और उत्तर अमेरिका में 'मेपल ट्री' के तने से निकलने वाले मीठे तरल से बनाया जाता है, इसलिए इसे मेपल सिरप और मेपल शुगर कहा जाता है। इसका स्वाद बेहद विशिष्ट और प्राकृतिक होता है। यह एक महंगा और प्रीमियम स्वीटनर माना जाता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से बेकरी, पैनकेक और कॉकटेल में किया जाता है।
युवाओं के लिए क्यों जरूरी है यह जानकारी?
यह युवाओं में एग्री-स्टार्टअप्स के अवसर पैदा करती है। भारत में एग्री-टेक और एग्रो-प्रोसेसिंग क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। गन्ना केंद्रित उद्योग से इतर नारियल, ताड़ और खजूर से प्राकृतिक चीनी बनाने के स्टार्टअप्स में अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में अगर युवा इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने की सोच रहे है तो यह एक बेहतरीन विकल्प है। इसके साथ ही आज के उपभोक्ता ऑर्गेनिक और अनरिफाइंड मिठास के विकल्पों की तलाश में हैं। इन विभिन्न स्रोतों की जानकारी युवाओं को न्यूट्रिशन, फूड टेक्नोलॉजी और फिटनेस फील्ड में नए विचार देती है।
