NEET UG Exam : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों ने बुधवार को सुझाव दिया कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) यानी NEET-UG साल में कई बार आयोजित किया जाना चाहिए ताकि छात्रों पर दबाव कम हो और ये सुनिश्चित किया जा सके कि उनका पूरा एकेडमिक साल बर्बाद न हो। सूत्रों ने बताया कि समिति ने हाल ही में हुए NEET-UG पेपर लीक विवाद पर चर्चा की और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अधिकारियों से घटनाओं के क्रम, अब तक की गई जांच और कथित उल्लंघन के जवाब में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी ली।
NEET Paper
समिति ने सुनी अधिकारियों की बात
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर स्थायी समिति ने आज बैठक की और 'स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित नियामक संस्थानों के संगठनात्मक ढांचे, अधिकार क्षेत्र और कार्यक्षमता' विषय की विस्तृत जांच के तहत 'NMC अधिनियम, 2019 के तहत NEET परीक्षाओं के आयोजन' पर अधिकारियों के विचार सुने।
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और NMC के चेयरमैन अभिजात सी. सेठ उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने समिति के सामने अपने विचार रखे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर स्थायी समिति की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव करते हैं। हाल के हफ्तों में ये तीसरी बार है जब सरकारी अधिकारी पेपर लीक के आरोपों के कारण मई में आयोजित NEET-UG परीक्षा रद्द होने के मामले में संसदीय पैनल के सामने पेश हुए हैं।
सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा
परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी। NEET-UG, जो भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, अभी साल में एक बार एक ही सत्र में आयोजित की जाती है। इस साल 3 मई को आयोजित परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि सांसदों ने ऐसी घटनाओं के बार-बार होने पर चिंता जताई। सदस्यों ने कहा कि 2024 और फिर 2026 में भी इसी तरह के विवाद सामने आए थे, जिससे जवाबदेही पर सवाल उठे हैं और यह भी कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा सजा के प्रावधान पर्याप्त हैं।
एक सूत्र ने कहा कि सभी सांसदों ने इस मामले में आगे बढ़ने की ज़रूरत पर चर्चा की क्योंकि यह कोई एक बार की समस्या नहीं है, बल्कि यह बार-बार होने वाली समस्या बन गई है। चूंकि यह 2024 और फिर 2026 में हुआ, इसलिए सवाल यह है कि इसके लिए कौन जवाबदेह है, जवाबदेही कैसे तय की जाए और क्या सजा इतनी पर्याप्त है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
क्या साल में दो -तीन बार होगी नीट परीक्षा ?
सूत्रों के मुताबिक, सदस्यों ने NEET-UG को साल में दो या तीन बार आयोजित करने का सुझाव भी दिया, ताकि छात्रों को परीक्षा पास करने के कई मौके मिलें और वे ऐसी वजहों से परेशान न हों जो उनके कंट्रोल से बाहर हों। सूत्र ने कहा, "सदस्यों ने सुझाव दिया कि साल भर में कई NEET परीक्षाएं होनी चाहिए, कम से कम दो या तीन, क्योंकि जब किसी छात्र का पूरा शैक्षणिक वर्ष किसी और की गलती के कारण बर्बाद हो जाता है, तो इसका छात्रों पर बहुत गहरा असर पड़ता है।" पता चला है कि सरकारी अधिकारियों ने पैनल को बताया है कि इस सुझाव पर विचार किया जाएगा। छात्र समूहों की ओर से NEET को साल में कई बार आयोजित करने की मांग बार-बार उठाई जाती रही है।
जुलाई 2018 में, तत्कालीन केंद्रीय HRD मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की थी कि NTA साल में दो बार JEE Main और NEET-UG आयोजित करेगा। हालांकि इसे कभी लागू नहीं किया गया। वहीं, 2023 में नेशनल मेडिकल कमीशन ने कहा था कि NEET-UG को साल में दो बार आयोजित करना संभव नहीं होगा क्योंकि MBBS की सभी सीटें एक ही काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से भरी जाती हैं।
सीबीटी शुरू करने का हो रहा विचार
अधिकारियों ने पैनल को ये भी बताया कि सरकार अगले परीक्षा चक्र से NEET के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) शुरू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने बताया कि हालांकि सांसदों ने सुचारू बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए, और डिजिटल एक्सेस, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा प्रश्नपत्रों की उपलब्धता की आवश्यकता जैसे मुद्दों का हवाला दिया।
