NCERT Social Science New Book: सिर्फ एक छोटा-सा विचार भी बड़े बिजनेस की नींव बन सकता है। इसके लिए हमेशा ज्यादा पूंजी, आलीशान ऑफिस या बड़ी फैक्ट्री की जरूरत नहीं होती। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) इसी सोच को अब स्कूली शिक्षा से जोड़ने की तैयारी है। इस कड़ी में NCERT की कक्षा 9वीं की नई सोशल साइंस की किताब में स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़ा एक अध्याय शामिल किया गया है। अध्याय 6 ‘फ्रॉम आइडियाज टू स्टार्टअप्स’ में छात्रों को एंटरप्रेन्योरशिप यानी नये व्यापार शुरू करने के बारे में बताया गया है।
NCERT की किताब में शामिल हुई ओबेरॉय होटल्स और लिज्जत पापड़ की कहानी
इस अध्याय में छात्रों को कंपनियों के उदाहरण के जरिए बताया गया है कि कैसे क्वालिटी, ऑर्गनाइजेशन और लगातार कोशिश छोटे से काम को एक मशहूर ब्रांड बना देती है। इनमें से एक हैं मोहन सिंह ओबेरॉय, जिन्होंने 50 रुपये की सैलरी से अपना करियर शुरू किया और आगे चलकर भारत की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में एक बड़े नाम बने। 1898 में पंजाब में जन्मे ओबेरॉय ने अपना पहला होटल खरीदने के लिए अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखे थे और बाद में एक बड़ा होटल बिजनेस खड़ा किया।
80 रुपये उधार लेकर शुरू किया था बिजनेस
वहीं लिज्जत पापड़ की कहानी एंटरप्रेन्योरशिप का एक अलग ही उदाहरण पेश करती है। साल 1959 में मुंबई की एक चाल में रहने वाली सात महिलाओं ने 80 रुपये उधार लेकर पारंपरिक रेसिपी से पापड़ बनाना शुरू किया। कोई फैक्ट्री न होने के कारण महिलाएं सुबह आटा घर ले जाती थी और घर के काम करने के साथ-साथ पापड़ बेलती और शाम तक तैयार पापड़ वापस पहुंचा देती थी। कहा जाता है कि पहले दिन उन्होंने कुल 5 पैकेट बनाए, उसे बाजार में बेचा तो महज 50 पैसे कमाए थे। उस समय आठ आने की रकम भी काफी हुआ करती थी।
इसके बाद मुनाफा धीरे धीरे 1 रुपये, 10 रुपये और 600 रुपये तक पहुंच गया। कमाई के साथ साथ सातों सहेलियों का उत्साह और बढ़ता गया, लेकिन उन्होंने पैसे आने पर मार्केटिंग या एडवरटाइजिंग के बजाए पापड़ की क्वालिटी सुधारने पर जोर दिया। यही कारण है कि धीरे धीरे उनका बिजनेस और बढ़ने लगा। इसके बाद उन्होंने को-ऑपरेटिव सोसाइटी रजिस्टर करवा लिया। यही सोसाइटी पापड़ का पूरा बिजनेस करती है।
मात्र 50 रुपये ओर 80 रुपये से शुरू हुए इस बिजनेस की सफलता छात्रों को बताती है कि कारोबार की सफलता केवल पैसों पर निर्भर नहीं करती। सही सोच, मेहनत, योजना और बाजार की जरूरतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
