थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, सीबीएसई से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की उस नीति पर रोक लगाने का कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए दो क्षेत्रीय भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने आज 27 मई को सीबीएसई की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भारत की कम से कम दो मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा जारी एक हालिया परिपत्र के अनुसार, एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भारत की कम से कम दो मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम सीबीएसई द्वारा अपनी अध्ययन योजनाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

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