नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के विवादों के बीच कर्नाटक सरकार ने छात्रों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सेज में दाखिले यानी सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया को नहीं रोकेंगे। फैसले के अनुसार, एडमिशन प्रक्रिया NEET UG 2026 के नतीजों का इंतजार किए बिना जारी रहेगी। इसके अलावा इस पूरे मुद्दे को लेकर कर्नाटक में सियासी पारा भी चढ़ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
इंजीनियरिंग दाखिलों पर नहीं लगेगा ब्रेक
सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक दावे किए जा रहे थे कि कर्नाटक सरकार दोबारा होने वाले NEET के नतीजों के बिना ही MBBS सीटों का आवंटन कर देगी। इस अफवाह पर विराम लगाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर ने वास्तविक स्थिति साफ की। उन्होंने घोषणा की कि सरकार केवल इंजीनियरिंग और अन्य गैर-मेडिकल कोर्सेज की काउंसलिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। डॉ. सुधाकर ने आगे कहा, "साल 2023 से मेडिकल और अन्य कोर्सेज के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया एक साथ आयोजित की आई है। लेकिन इस बार हमने नीट के नतीजों का इंतजार न करने का फैसला किया है। छात्रों का समय बर्बाद न हो, इसलिए हम इंजीनियरिंग और दूसरे कोर्सेज के लिए सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया को जारी रखेंगे।"
NEET पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे मुख्यमंत्री
इस बीच, नीट परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में यूथ कांग्रेस ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नीट का पेपर लीक हो चुका है, लेकिन न तो शिक्षा मंत्री और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं। शिक्षा मंत्री द्वारा बस एक नई तारीख की घोषणा कर देना और इस संवेदनशील मामले से पल्ला झाड़ लेना बेहद शर्मनाक है।
'NEET बंद हो, दोबारा शुरू हो राज्य स्तरीय परीक्षाएं'
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार से NEET परीक्षा को पूरी तरह बंद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और अन्य राज्यों में पहले मेडिकल दाखिले राज्य स्तरीय सामान्य प्रवेश परीक्षा (CET) के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ होते थे। लेकिन साल 2016 में नीट को अनिवार्य कर दिया गया। सीएम ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में प्रश्न पत्र 5 बार लीक हो चुका है। इससे अमीर छात्र तो बार-बार महंगी कोचिंग ले लेते हैं, लेकिन गरीब, ग्रामीण, दलित और पिछड़े वर्गों के होनहार छात्र इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था के कारण पिछड़ जाते हैं।
बीजेपी सरकारों के दौरान हुए पेपर लीक का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए याद दिलाया कि कर्नाटक में पहले भी बीजेपी सरकारों के दौरान इंजीनियरिंग और सब-इंस्पेक्टर (PSI) भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। उस मामले में एडीजीपी (ADGP) रैंक के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को जेल जाना पड़ा था, जो राज्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी। उन्होंने कहा कि जब भी बीजेपी केंद्र या राज्य की सत्ता में होती है, ऐसी घटनाएं आम हो जाती हैं।
बेरोजगारी और छात्रों की आत्महत्या पर जताई गहरी चिंता
सिद्धारमैया ने देश में बढ़ती बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज 20 से 29 वर्ष की आयु के 67 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं, जबकि हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि नीट पेपर लीक के कारण रात-दिन मेहनत करने वाले छात्र अंदर से पूरी तरह टूट चुके हैं और कुछ ने तो हताशा में आकर आत्महत्या तक कर ली है।
