सोलर रोबोट बनाने वाला स्टार्टअप कैसे बना वेंटिलेटर का मसीहा, जानें नोक्कार्क रोबोटिक्स और IIT Kanpur के दो छात्रों की अनोखी कहानी

बिना पानी के सोलर पैनल साफ करने वाले रोबोट्स बनाने वाली दो IIT Kanpur के पूर्व छात्रों की कंपनी ने कोविड-19 महामारी के दौरान केवल 90 दिन में वेंटिलेटर बनाने का ऐसा कमाल किया, जिसने लाखों लोगों की जिंदगी बचाई। आइए उनके सफर के बारे में विस्तार से जानें।

कोविड-19 महामारी के संकट ने जहां पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, वहीं इसी दौर में भारतीय युवाओं के इनोवेशन और जज्बे ने एक नया इतिहास भी रचा था। जो स्टार्टअप कंपनी शुरुआत में पानी के बिना सोलर पैनल साफ करने वाले रोबोट बना रही थी, महामारी के दौरान उसने अचानक अपनी दिशा बदल ली। आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के दो विजनरी ग्रेजुएट—निखिल कुरेले और हर्षित राठौर ने संकट के उस कठिन दौर में केवल 90 दिनों के भीतर आईसीयू-ग्रेड वेंटिलेटर तैयार कर दिखाया और यह स्वदेशी वेंटिलेटर आगे चलकर भारत के अस्पतालों के लिए जीवन रक्षक साबित हुआ। आइए आज उसी रोबोटिक्स स्टार्टअप कंपनी के बारे में जानते हैं, जो अब देश की बड़ी मेडिकल टेक कंपनी में बदल गई है।

'IIT के Alumni की स्टार्टअप कंपनी ने 90 दिन में बनाया वेंटिलेटर

'IIT के Alumni की स्टार्टअप कंपनी ने 90 दिन में बनाया वेंटिलेटर (Phot0 - AI)

नोक्का रोबोटिक्स से हुई थी शुरुआत

वर्ष 2020 की शुरुआत तक नोक्का रोबोटिक्स (Nocca Robotics) का मेडिकल क्षेत्र या अस्पतालों से दूर-दूर तक कोई रिश्ता- नाता नहीं था। आईआईटी कानपुर से पढ़े निखिल कुरेले और हर्षित राठौर ने 2017 में अपनी अच्छी-खासी नौकरियां छोड़कर नोक्का रोबोटिक्स नाम से एक स्टार्टअप की स्थापना की थी। उनकी कंपनी का मुख्य काम सोलर पैनलों को बिना पानी के साफ करने वाले रोबोट्स तैयार करना था। यह तकनीक भारत के तेजी से बढ़ते रिन्यूबल एनर्जी के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही थी और 2020 तक उनका बिजनेस काफी सुचारू रूप से चल रहा था। लेकिन फिर कोविड-19 महामारी आई और इस कंपनी की दिशा बदल गई।

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