CBSE New curriculum : नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत एजुकेशन सिस्टम में कई बड़े बदलाव हुए हैं। जहां पहले ब्लैकोर्ड पर सफेद चौक से रट्टामार पढ़ाई होती थी, वहीं अब बच्चों के हाथ में सिर्फ किताबें नहीं बल्कि एआई की असली समझ भी होगी। अब बच्चों को तोता नहीं बनाया जाएगा। सीबीएसई भी बीते कुछ समय में एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलावों की तरफ बढ़ रहा है। अब एआई स्टडी से लेकर सीबीएसई के बोर्ड में कंप्यूटेशनल थिंकिंग (Computational Thinking) और थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला (Three Language Formula) तक आने वाला है। कुल मिलाकर कहें तो सीबीएसई ने अपने नए कैरिकुलम को काफी हद तक बदलकर रख दिया है। चलिये विस्तार से बात करते हैं CBSE के इस नए कैरिकुलम के बारे में...
थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला क्या है ? What is Three Language Formula
सबसे पहले बात करें तीन भाषाई फॉर्मूले की तो सीबीएसई के नए सर्कुलर के अनुसार थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला अपनाया है। यानी कि अब बच्चों को तीन भाषाएं सिखाई जाएंगी। इसके तहत अंग्रेजी को विदेशी भाषा के ऑप्शन में शामिल किया गया है। नए नियम के मुताबिक बच्चों को अब तीसरी भाषा में या तो अंग्रेजी या फिर कोई विदेशी भाषा (CBSE New Curriculum) को चुनना होगा। वहीं दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में बड़ा बदलाव किया है, जिसमें कि स्कूल में बच्चों को तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं पढ़ाना जरूरी है। हालांकि ये दूसरी भारतीय भाषा कौन सी होगी, ये तय करना बोर्ड ने स्कूलों पर छोड़ा हुआ है।
मल्टीलिंगुएल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
भारत में हिंदी, मराठी, बंगाली, तेलुगू, गुजराती, तमिल, उर्दू, कन्नड़, ओडिया और मलयालम जैसी भाषाएं बोली जाती हैं। सीबीएसई का ये थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला कक्षा 6 से लागू किया जा रहा है। इस नीति के तहत छात्रों को जो तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, उनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। नई शिक्षा नीति के तहत मल्टीलिंगुएल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ये व्यवस्था की जा रही है।
कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) को मिलेगा बढ़ावा Computational Thinking
CBSE के नए करिकुलम में Computational Thinking (CT) को भी एक बड़े बदलाव के तौर पर शामिल किया गया है। इसका मकसद बच्चों में सोचने और समस्या हल करने की क्षमता को मजबूत बनाना है। आसान शब्दों में कहें तो कंप्यूटेशन थिंकिंग का मतलब है- किसी भी समस्या को तार्किक तरीके से समझना, फिर उसे छोटे हिस्सों में बांटना, पैटर्न पहचानना और स्टेप बाय स्टेप उसका समाधान निकालना। ठीक वैसे ही जैसे कंप्यूटर काम करता है। खास बात ये है कि इसे क्लास 3 से लेकर 8 तक अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। इसे नए करिकुलम में 1 अप्रैल 2026 से शामिल किया गया है ताकि बच्चे शुरुआत से ही डिजिटल और लॉजिकल स्किल्स सीख सकें।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर ये होगा कि पढ़ाई रटने से हटकर स्किल बेस्ड और सोच आधारित हो जाएगी। बच्चे सिर्फ जवाब को याद ही नहीं रखेंगे बल्कि खुद से समाधान निकालना भी सीख सकेंगे। इससे उनकी क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी और फैसले लेने की क्षमता अच्छी होगी। साथ ही ये बदलाव उन्हें आने वाले समय की AI और टेक्नोलॉजी की दुनिया के लिए तैयार करेगा।
AI से बदल जाएगा पढ़ाने का तरीका AI Study in CBSE Curriculum
CBSE ने अपने करियकुल में कक्षा 3 से लेकर 8 तक CT और AI को शामिल किया है। इसका मकसद बच्चों में लॉजिकल थिंकिंग को बढ़ाना, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को विकसित करना, टेक्नोलॉजी और एआई की बेसिक समझ देना है। AI की बात करें तो बोर्ड ने इसे पढ़ाई का अहम हिस्सा बहना दिया है। लेकिन इसे सीधे भारी भरकम टेक्निकल सब्जेक्ट की तरह नहीं बल्कि बेसिक समझ और स्किल डेवलपिमेंट के रूप में शुरू किया गया है। क्लास 3 से 8 तक AI को इंट्रोडक्टरी लेवल पर शामिल किया गया है ताकि बच्चे शुरुआत से ही टेक्नोलॉजी को समझ सकें।
CBSE के करिकुलम बदलने से टेक्नोलॉजी के लिये तैयार होंगे बच्चे
AI में क्या-क्या पढ़ेंगे बच्चे ?
- AI क्या है और ये कहां इस्तेमाल होता है।
- रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरण (Google Assistant, YouTube Suggestions)
- बेसिक डेटा की समझ (Basic Data Understanding)
- सिंपल कोडिंग (Simple Coding)
- एआई के एथिक्स (AI Ethics) प्राइवेसी और इसका सुरक्षित इस्तेमाल
करिकुलम बदलने से क्या होगा ?
सीबीएसई में ये सारे बदलाव सिर्फ सिलेस बदलने के लिए नहीं बल्कि पूरी पढ़ाई का तरीका बदलने के लिए किए गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर बच्चों की सोच, स्किल और भविष्य पर पड़ेगा। अब बच्चों को रट्टा मार नहीं बल्कि लॉजिकल और एनालिटिकल थिंकिंग के बारे में बताया जाएगा। बच्चे आने वाली टेक्नोलॉजी के लिये तैयार होंगे।
