CBSE On screen marking system major loopholes: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी CBSE ने हाल ही में अपनी नई On-Screen Marking (OSM) प्रणाली को लेकर सफाई दी है। बोर्ड का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पारदर्शी, तेज और निष्पक्ष है। लेकिन इस सफाई के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और शिक्षक अब भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे सवाल उठ रहे हैं कि अगर यह सिस्टम इतना सफल है, तो आखिर इतने विवाद क्यों सामने आ रहे हैं? दरअसल, इस बार CBSE 12वीं के रिजल्ट के बाद हजारों छात्रों ने उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायत की। कई ऐसे छात्र भी सामने आए जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षाएं जैसे JEE क्वालिफाई कर लीं, लेकिन बोर्ड परीक्षा में अपेक्षा से काफी कम अंक प्राप्त हुए। इससे छात्रों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर संदेह बढ़ा है।
फिजिक्स की कोचिंग देने वाले physicsheadquarters.com के अनुराग त्यागी कहा कहना है कि शिक्षकों के एक वर्ग ने ऑफ द रिकॉर्ड माना कि On-Screen Marking के दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं। कुछ शिक्षकों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के धुंधले होने, सिस्टम के धीमे काम करने और लंबे समय तक स्क्रीन पर कॉपियां जांचने में दिक्कत की बात कही। शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी बाधाएं मूल्यांकन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग में क्या-क्या खामियां?
• धुंधली और अस्पष्ट स्कैन कॉपियां
• सिस्टम लैग और स्लो स्पीड
• तकनीकी गड़बड़ियां और बार-बार लॉगआउट
• लंबे समय तक स्क्रीन पर जांचने की परेशानी
• मैनुअल जजमेंट में असंगतता
कम अंक नहीं, भरोसा टूटना सबसे बड़ी समस्या!
• JEE क्वालिफाई छात्र भी बोर्ड में फेल क्यों?
• हजारों छात्रों के अप्रत्याशित कम अंक क्यों?
• शिक्षक खुद उठा रहे हैं स्कैन, लैग और चेकिंग की समस्याओं पर सवाल!
अनुराग त्यागी का कहना है कि केवल प्रेस नोट जारी करने से छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा। CBSE छात्रों को उनकी जांची गई कॉपियां आसानी से उपलब्ध कराए, री-इवैल्यूएशन फीस को खत्म करे और शिकायतों की समीक्षा कराए। बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता केवल दावों से नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को खुला और जवाबदेह बनाने से आती है। अगर छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका और मूल्यांकन प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ सकें, तो विवाद और अविश्वास दोनों कम हो सकते हैं।
फ्री में हो रीचेकिंग और वेरिफिकेशन
अनुराग त्यागी ने सवाल उठाया कि अगर CBSE की ऑनलाइन चेकिंग इतनी सटीक है, तो Answer Copy और Rechecking के नाम पर ₹700+ क्यों लिए जा रहे हैं। गलती नहीं है तो Verification मुफ्त होना चाहिए। ये शिक्षा नहीं, फीस वसूली लगती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CBSE केवल सफाई देकर छात्रों की चिंताओं को शांत कर पाएगा, या फिर उसे मूल्यांकन व्यवस्था में और बड़े सुधार करने होंगे। क्योंकि इस समय मुद्दा सिर्फ कम अंक नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर भरोसे का है जिसने लाखों छात्रों का भविष्य तय किया।
