4 Year Girl Exploited, Murdered in Pune: पुणे के नसरापुर में छोटी मासूम बच्ची के साथ हुए अमानवीय अत्याचार के बाद उसका अंतिम संस्कार कड़े पुलिस बंदोबस्त के बीच किया गया। बच्ची के पार्थिव शरीर को पुणे स्थित वैकुंठ श्मशानभूमि लाया गया, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। घटना के बाद पूरे शहर में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ हैं। बहरहाल, इस घटना से एक बार फिर मासूम बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। तमाम कानूनों के बावजूद बच्चियां दरिंदगी का शिकार बन रही हैं। अब इसे लेकर बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है।
पुणे में मासूम से दरिंदगी पर लोगों में आक्रोश (AI image)
जानिए क्या है पूरा मामला
महाराष्ट्र के पुणे जिले में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 65 वर्षीय मजदूर ने चार वर्षीय बच्ची का यौन उत्पीड़न कर उसकी हत्या कर दी। यह हादसा भोर तहसील के एक गांव में हुई। घटना को लेकर आक्रोश और प्रदर्शन के बीच पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले में 15 दिन के अंदर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और इसकी सुनवाई त्वरित अदालत में होगी। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी को 7 मई तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।
अधिकारी ने कहा, आरोपी ने बच्ची को कथित तौर पर खाना दिलाने का लालच देकर फुसलाया और वह उसे मवेशियों के बाड़े में ले गया जहां उसने उसका यौन उत्पीड़न किया और फिर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि बच्ची के लापता होने पर उसके रिश्तेदारों ने उसकी तलाश शुरू की और इसी दौरान एक निजी आवास के सीसीटीवी फुटेज में आरोपी, बच्ची के साथ नजर आया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आदतन अपराधी है 65 साल का आरोपी शख्स
इस घटना से इलाके में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस चौकी पर एकत्र होकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मुंबई–बेंगलुरु हाईवे पर करीब साढ़े चार घंटे तक भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस पर भी दबाव बढ़ने लगा। स्थिति को सामान्य करने के लिए जब बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला, तो पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए परिजनों और भीड़ को एक तरफ हटाया और यातायात को फिर से सुचारु कराया। पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने लोगों को आश्वासन दिया कि मामले में 15 दिन के अंदर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और सुनवाई त्वरित अदालत में होगी। गिल ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ 1998 और 2015 में मामले दर्ज किए गए थे। बाद में वह दोनों मामलों में बरी हो गया था। वह मजदूर है और आम तौर पर गांव के आसपास घूमता रहता था।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने क्या कहा?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने पुणे, महाराष्ट्र में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या की अत्यंत वीभत्स घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। इसने कहा है कि यह जघन्य अपराध गहरी पीड़ा और आक्रोश उत्पन्न करता है और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उजागर करता है। आयोग ने इस घोर अमानवीय कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे अपराध बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं और समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
अध्यक्षा ने नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट (National Commission for Protection of Child Rights) को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर जांच की निगरानी सुनिश्चित करने तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
साथ ही, पीड़ित परिवार को त्वरित सहायता एवं मुआवजा, POCSO के तहत समयबद्ध चार्जशीट दाखिल करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया है। हर बालिका की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मौत की सजा की मांग
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता अनिल देशमुख ने इस घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकारों पर यौन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रस्तावित शक्ति अधिनियम को लागू करने के मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का भी आरोप लगाया। देशमुख ने कहा, "ऐसे अपराधी समाज में कैसे खुलेआम घूमते हैं? महा विकास आघाडी सरकार के कार्यकाल में जब मैं गृह मंत्री था, तब हमने शक्ति अधिनियम को मंजूरी दी थी जिसे केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा, जब राज्य में इस कानून की तत्काल आवश्यकता है तो केंद्र और राज्य सरकार इसे लागू करने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर समय बर्बाद कर रही है।
