बंगाल का 'राज' और 'काज' दोनों बदले: अब नबन्ना नहीं, राइटर्स बिल्डिंग से चलेगी सरकार; जानें 'लाल कोठी' का इतिहास

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत और दूसरे का आरंभ हो रहा है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही बंगाल के 'शक्ति केंद्र' का पता भी बदलने वाला है। 15 साल तक राज्य की सत्ता का गवाह रहा हावड़ा का 'नबन्ना' अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है और शासन की कमान एक बार फिर कोलकाता की उस ऐतिहासिक 'लाल कोठी' में लौटने वाली है। आइए जानते हैं राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 का साल एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। दशकों तक वामपंथियों और फिर तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग रहे इस राज्य में अब भगवा लहर ने अपनी जगह बना ली है। सुवेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने के लिए तैयार हैं। लेकिन बंगाल में यह बदलाव सिर्फ चेहरों का नहीं है, बल्कि प्रतीकों का भी है। इसी कड़ी में सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि राज्य का पॉवर सेंटर अब हावड़ा के 'नबन्ना' से हटकर वापस कोलकाता की ऐतिहासिक ‘राइटर्स बिल्डिंग’ में लौटेगा।

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नबन्ना से राइटर्स बिल्डिंग लौट रही है सत्ता

इतिहास की जड़ों में राइटर्स बिल्डिंग

कोलकाता के हृदय स्थल बीबीडी बाग में स्थित यह इमारत करीब 250 साल पुरानी है। इसकी नींव तब रखी गई थी जब भारत की राजधानी दिल्ली नहीं बल्कि कलकत्ता हुआ करती थी। 1777 में थॉमस लियोन द्वारा डिजाइन की गई यह इमारत शुरू में ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर क्लर्कों के रहने और बैठने के लिए बनाई गई थी, जिन्हें उस समय 'राइटर' कहा जाता था। इसी कारण इसका नाम 'राइटर्स बिल्डिंग' पड़ा। 1854 में इसे पूरी तरह कंपनी ने खरीद लिया और धीरे-धीरे यह ब्रिटिश हुकूमत का सबसे ताकतवर गढ़ बन गई।

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