लोलार्क षष्ठी पर संतान उत्पत्ति की कामना के साथ लाखों की संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंचे हैं। इस खास तिथि पर लोलार्क कुंड में स्नान का विधान है। मान्यता ऐसी है कि लोलार्क कुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है। इसी मनोकामना के साथ लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ काशी के भदैनी स्थित लोलार्क कुंड पहुंची है। मंदिर के आसपास आस्था का जनसैलाब उमड़ा है।
5 किमी तक लगी लाइन
लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में दो लाख से अधिक श्रद्धालु कतारबद्ध हैं। कुंड के बाहर गुरुवार की रात से ही श्रद्धालुओं की लाइन लग गई थी। सूर्योदय के बाद डमरू ध्वनि के बीच कुंड की आरती उतारी गई, इसके बाद श्रद्धालुओं के जत्थे को कुंड की ओर छोड़ा गया।
सुरक्षा में लगे 11 ACP और 1200 जवान
इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस विभाग की ओर से 11 ACP की तैनाती की गई है। लगभग 1200 जवान कुंड के आसपास तैनात हैं। इसके अलावा NDRF के जवानों की भी तैनाती की गई है। कुंड के बाहर लगभग पांच किलोमीटर तक बैरिकेडिंग की गई है। ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है। लोलार्क कुंड स्नान को काशी के लक्खा मेले में शुमार किया जाता है।
स्नान के बाद एक फल का करना होता है त्याग
मान्यता है कि 50 फीट गहरी और 15 फीट चौड़े इस कुंड में लोलार्क सृष्टि के दिन स्नान करने से ही लोगों की गोद भर जाती है। स्नान करने के बाद दंपति एक फल कुंड में दान करता है। जब तक मनोकामना पूरी नहीं होती है, दंपति उसे फल का सेवन नहीं करता है। स्नान करने के बाद कपड़े कुंड पर ही छोड़ दिए जाते हैं। फिलहाल कुंड में एक रास्ते के जरिए ही स्नान कराया जा रहा है कुंड के बाहर 5 किलोमीटर लंबी लाइन लगी है, अनुमान यह है कि लगभग 4 से 5 लाख श्रद्धालु आज इस खास मौके पर कुंड में स्नान करेंगे
