Uttarakhand Disaster Management Model: उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी प्रभावी कार्यशैली और नवाचारों के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर पहचान बनाई है। ओडिशा के पुरी में 3 से 5 जून 2026 तक भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) Working Group की दूसरी तकनीकी बैठक में राज्य के आपदा प्रबंधन मॉडल को विशेष सराहना मिली। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों और साझेदार राष्ट्रों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ तथा तकनीकी प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत आधारभूत ढांचे, पूर्व चेतावनी प्रणालियों, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और आपदा प्रबंधन से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं पर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।
ओडिशा के पुरी में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में गूंजा उत्तराखंड का नाम
इन्होंने ने किया राज्य का प्रतिनिधित्व
उत्तराखंड की ओर से एसडीआरएफ के सेनानायक अर्पण यदुवंशी और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने उत्तराखंड में विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों, तकनीकी नवाचारों, क्षमता विकास कार्यक्रमों और प्रभावी राहत एवं बचाव तंत्र की विस्तृत जानकारी साझा की। प्रस्तुति के दौरान राज्य की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों से जुड़े खतरों, सड़क अवरोधों तथा चारधाम यात्रा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूद चुनौतियों को रेखांकित किया गया। साथ ही बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली, आधुनिक पूर्व चेतावनी तंत्र और त्वरित राहत व्यवस्था को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
SDRF की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता
बैठक में सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू अभियान और धराली आपदा के दौरान किए गए प्रबंधन कार्यों को उत्तराखंड की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन परिस्थितियों में तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली, जोखिम कम करने के प्रयासों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की भी सराहना की गई। वहीं एसडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी आपदा प्रबंधन मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया।
SDRF सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने क्या कहा?
एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में आपदा जोखिम कम करने, पूर्व तैयारी, क्षमता निर्माण और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णयों के माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में लगातार कार्य हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्वतीय राज्यों में आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी, प्रशिक्षित मानव संसाधन और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों के निरंतर प्रयासों की बड़ी उपलब्धि
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के मार्गदर्शन में संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी भी सम्मेलन में साझा की गई। यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने बताया कि भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणालियां आपदा जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में तकनीक आधारित समाधान और अधिक प्रभावी साबित होंगे। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहित करने और सामुदायिक स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने के लिए साझा रणनीतियों पर भी चर्चा की। उत्तराखंड के मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना को राज्य की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के निरंतर प्रयासों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
