Lucknow Aliganj Building Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आलीशान और व्यस्त अलीगंज इलाका एक ऐसी खौफनाक त्रासदी का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। यहां स्थित एक तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग की लपटों ने 15 लोगों की हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए लील लिया, जबकि कई अन्य लोग इस हादसे में गंभीर रूप से झुलस गए। लेकिन इस अग्निकांड की राख के नीचे से अब वो कड़वे सवाल सुलग रहे हैं, जो सीधे तौर पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हैं।
लखनऊ अग्निकांड: रिहायशी इमारत में मौत का 'कॉमर्शियल' खेल; 15 मौतों के बाद जागा सिस्टम, खुले लापरवाही के काले पन्ने
कागजों पर 'घर', हकीकत में 'कमर्शियल कॉम्प्लेक्स'
जांच में जो सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक खुलासा हुआ है, वह यह है कि उत्तर लखनऊ के उषा मेहता मार्ग स्थित यह तीन मंजिला इमारत सरकारी रिकॉर्ड में महज एक रिहायशी (आवासीय) भवन के तौर पर दर्ज थी। एलडीए और नगर निगम के दस्तावेजों के मुताबिक, इस इमारत का नक्शा एक परिवार के रहने के उद्देश्य से पास कराया गया था। लेकिन नियमों को ठेंगे पर रखकर, जिस जगह को आशियाना होना था, उसे मौत के एक भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक केंद्र में तब्दील कर दिया गया।
2014 से चल रहा था अवैध खेल
शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि इस पूरी लापरवाही की जड़ें काफी पुरानी हैं। संपत्ति के मालिक तीन भाइयों- वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला ने कथित तौर पर साल 2014 के आस-पास ही इस आवासीय भवन का व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया था। बिना किसी कमर्शियल कन्वर्जन, बिना जरूरी एनओसी (NOC) और बिना किसी सुरक्षा मानकों के, पिछले 12 सालों से इस रिहायशी इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे थे।
दूसरी मंजिल पर 'एनीमेशन सेंटर' और फंसे हुए मासूम छात्र
हादसे के वक्त इस मौत की इमारत में मौजूद अधिकांश लोग वो मासूम छात्र थे, जो अपने बेहतर भविष्य के सपने लेकर यहां संचालित हो रहे एक 'एनीमेशन कोचिंग सेंटर' में पढ़ने आए थे।
-आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी इमारत धुएं के गुबार में तब्दील हो गई।
-सबसे भीषण मंजर दूसरी मंजिल पर देखने को मिला, जहां एनीमेशन सेंटर के छात्र मौजूद थे।
-इमारत में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया और दम घुटने व जलने से छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
फायर सेफ्टी और सिस्टम से 5 तीखे सवाल
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे ने एक बार फिर महानगरों में अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों, बेसमेंट ऑफिसों और रिहायशी इलाकों में खुले कमर्शियल संस्थानों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
सुरक्षा ताक पर क्यों?: क्या इस बहुमंजिला अवैध कमर्शियल परिसर में फायर फाइटिंग सिस्टम और स्प्रिंकलर चालू हालत में थे?
आपातकालीन निकास कहां था?: बिना इमरजेंसी एग्जिट के इतने बड़े कोचिंग संस्थान को संकरी रिहायशी बिल्डिंग में चलने की अनुमति किसने दी?
निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति क्यों?: साल 2014 से चल रहे इस अवैध कारोबार का आज तक कभी फायर या एलडीए की टीम ने ऑडिट क्यों नहीं किया?
अधिकारियों पर कार्रवाई कब?: रिहायशी मकानों में धड़ल्ले से चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर समय रहते एक्शन क्यों नहीं लिया जाता?
हादसे का ही इंतजार क्यों?: क्या सिस्टम को अपनी जिम्मेदारी याद आने के लिए हमेशा किसी बड़ी त्रासदी या मासूमों की लाशों की जरूरत होती है?
अब तक की कार्रवाई और कड़ा सबक
हादसे के बाद प्रशासनिक अमले में मचे हड़कंप के बीच पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, शासन के निर्देश पर लापरवाही बरतने वाले चार जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
बता दें कि लखनऊ का यह अग्निकांड सिर्फ एक शार्ट-सर्किट या दुर्घटना की कहानी नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार, मिलीभगत और नियमों की अनदेखी के उस कॉकटेल की कहानी है, जिसकी कीमत अंततः बेगुनाह नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। अलीगंज की इस त्रासदी से अगर अब भी सबक नहीं लिया गया, तो देश के हर शहर के रिहायशी इलाकों में चल रहे ऐसे अवैध कोचिंग सेंटर और ऑफिस आने वाले समय में टाइम बम साबित हो सकते हैं। फिलहाल, मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच जारी है।
