वंदे भारत ट्रेनें देश की आधुनिक ट्रेनें हैं। इनमें कई आधुनिक सुविधाएं तो मिलती ही हैं, इनकी स्पीड भी अच्छी है। यह ट्रेनें अलग-अलग शहरों के बीच की दूरी को तेजी से तय करती है। वंदे भारत तेज, समय की पाबंद और सुविधाओं के मामले में देश में टॉप पर हैं। देश के दो प्रमुख शहरों के बीच चलने वाली वंदे भारत को और भी ज्यादा स्पीड मिलने वाली है और इससे दोनों शहरों के बीच लगने वाला समय भी कम हो जाएगा।
इस रूट पर वंदे भारत ट्रेन की बढ़ेगी स्पीड
इन शहरों की दूरी होगी कम
दक्षिण भारत के दो प्रमुख शहर बेंगलुरू और चेन्नई रोजगार देने वाले प्रमुख शहर हैं। जहां एक ओर चेन्नई ऑटोमोबाइल का मैनुफेक्चरिंग हब है, वहीं बेंगलुरू टेक और स्टार्टअप के लिए मशहूर है। इन दोनों शहरों के बीच लोगों की आवाजाही काफी ज्यादा होती है। इन दो शहरों के बीच दूरी 360 किमी है और अभी इस रूट पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को 4.25 घंटे का समय लगता है। इस नए स्पीड अपडेट के बाद यह समय 25 मिनट और कम लगेगा, यानी अब सिर्फ 4 घंटे में चेन्नई से बेंगलुरू और बेंगलुरू से चेन्नई पहुंच जाएंगे। शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन भी 20 मिनट का समय कम ही लेगी।
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6 प्वाइंट में समझें कैसे बढ़ेगी स्पीड
- पिछले साल चेन्नई-जोलारपेट्टई मार्ग को 130 किमी प्रति घंटे की स्पीड पर अपग्रेड किया गया।
- वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस की चार ट्रेनों को इस अपग्रेड से लाभ मिलेगा।
- वंदे भारत ट्रेन ने ट्रायल रन के दौरान 183 किमी प्रति घंटे की अधिकतम स्पीड हासिल की थी, लेकिन ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी प्रति घंटे पर सीमित है।
- दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) का बेंगलुरु डिवीजन आज यानी गुरुवार 5 दिसंबर को बेंगलुरु-जोलारपेट्टई सेक्शन पर स्पीड ट्रायल कर रहा है।
- इस रूट पर अभी मौजूदा स्पीड लिमिट 110 किमी प्रति घंटे है, जिसे बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटे किया जाएगा।
- रेलवे सुरक्षा आयुक्त से एक बार मंजूरी मिल जाने के बाद नई स्पीड को लागू कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही जनता को रेलवे ट्रैक पर न जाने की सलाह दी गई है। यही नहीं स्टेशन प्लेटफार्म पर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर पर काफी ज्यादा भीड़ है। इसमें प्रमुख टेक पार्क, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और कई आवासीय टाउनशिप शामिल हैं।
