इटावा के इस्लामिया इंटर कॉलेज में आयोजित 33वें सारस्वत समारोह के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने बताया कि न्याय को आम आदमी की समझ के करीब लाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय अब अपने फैसलों का 16 विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद करवा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि हालांकि अंग्रेजी सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक भाषा बनी हुई है, लेकिन अनुवाद की यह पहल देश के उस बड़े वर्ग के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो अंग्रेजी भाषा में सहज नहीं हैं। उनके अनुसार, भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और सोच को आकार देने वाली शक्ति है।
सुप्रिम कोर्ट के फैसलों का 16 भाषाओं में होगा अनुवाद (Photo- PTI)
हिंदी के गौरव न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्ता को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
TOI के अनुसार, समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दिवंगत न्यायाधीश प्रेम शंकर गुप्ता के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति गुप्ता ने अपने न्यायिक करियर के दौरान मिसाल पेश करते हुए लगभग 4000 फैसले हिंदी भाषा में लिखे थे। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने वाला यह आंदोलन अब देशव्यापी स्वरूप ले रहा है, जिसके तहत न्यायिक प्रणाली में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को सुनिश्चित करने के ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने इटावा को 'गंगदेव नगरी' के रूप में संबोधित करते हुए इसे प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी बताया और कहा कि जिस भाषा और संस्कृति में हमारा पालन-पोषण होता है, उसे सहेजना हमारा नैतिक दायित्व है।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षा का महत्व
मुख्य न्यायाधीश ने इस्लामिया इंटर कॉलेज के छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि यहां से निकले युवा आज देश के उच्च पदों पर आसीन होकर राष्ट्र को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी वास्तविक विरासत वही है, जो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को सौंपते हैं। इस अवसर पर उन्होंने तीन साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन भी किया। गौरतलब है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सैफई हवाई पट्टी पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश को 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया गया। उनका यह संबोधन न्यायपालिका के उस बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां कानून की जटिल भाषा को सरल बनाकर जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
