दिल्ली सरकार राजधानी में लगातार बढ़ते बिजली उपभोक्ताओं और सब्सिडी के भारी-भरकम बजट को संतुलित करने के लिए एक नई नीति पर विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी छोड़ने (ऑप्ट-आउट) का सीधा विकल्प दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को सब्सिडी त्यागने का मौका देना है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और बिना सब्सिडी के अपना बिजली बिल भर सकते हैं।
केजरीवाल सरकार ला रही नई ऑप्ट-आउट पॉलिसी (फाइल फोटो)
वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक विशेष वेबसाइट और डिजिटल पोर्टल विकसित करने की योजना है। इसके जरिए उपभोक्ता स्वेच्छा से सब्सिडी का लाभ छोड़ सकेंगे। वहीं, जिन उपभोक्ताओं को रियायती दर पर बिजली की आवश्यकता है, उन्हें इस योजना का लाभ जारी रखने के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक बार पंजीकरण कराना अनिवार्य हो सकता है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: 'अपना फर्ज निभा रहे राहुल गांधी...', पैलेट गन मामले में कांग्रेस नेता के समर्थन खुलकर बोले उमर अब्दुल्ला
एक दशक में उपभोक्ताओं की संख्या में 40 फीसदी की बढ़ोतरी
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी की सरकार वर्तमान में 200 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी तरह मुफ्त बिजली देती है। वहीं, 201 से 400 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक (अधिकतम 800 रुपये) की सब्सिडी दी जाती है। पिछले एक दशक में उपभोक्ताओं की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल उपभोक्ताओं का आंकड़ा 73 लाख के पार पहुंच गया है।
सरकार का लक्ष्य
उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या के कारण दिल्ली सरकार का बिजली सब्सिडी बिल पिछले दस वर्षों में दोगुने से भी अधिक हो गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए सब्सिडी का बजट लगभग 3,500 रुपये करोड़ रखा गया है। इसके अलावा, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि मौजूदा नीति का लाभ उन लोगों तक ज्यादा पहुंच रहा है जो उच्च खपत श्रेणी में आते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अब लक्षित और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
