जिन 9 सीटों को महागठबंधन ने 'फ्रेंडली फाइट' कहा, उन सब पर मिली हार; क्या इसी फ्रेंडली फाइट ने हरा दिया बिहार?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA ने 202 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटों के साथ करारी हार का सामना करना पड़ा। RJD और कांग्रेस की सीट बंटवारे में तनातनी, कथित फ्रेंडली फाइट, कमजोर रणनीति और नेतृत्व भ्रम ने पूरे गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचाया। नौ सीटों पर आपसी टकराव के साथ ही जनता तक अपनी बात न पहुंचा पाने के कारण महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। प्रचार में कमी और देर से फैसले भी हार की बड़ी वजह बने।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब इतिहास हो चुका है। यह चुनाव NDA के लिए ऐतिहासिक जीत का रहा, तो महागठबंधन को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा। जहां NDA की सभी योजनाएं सफल होती दिखीं, वहीं महागठबंधन न तो योजनाएं बनाने में सफल रहा न ही नेरेटिव बनाने में। इसके अलावा कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट का नाम देकर गठबंधन की पार्टियों ने एक-दूसरे को जो नुकसान पहुंचाया वह ऐतिहासिक भूल से कम नहीं। क्योंकि जहां महागठबंधन ने फ्रेंडली फाइट के नाम पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे, उन सभी सीटों पर गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। शायद महागठबंधन का यही कंफ्यूजन पूरे बिहार में फैल गया, जहां जनता को उनमें अपने लिए कोई स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आई।

Bihar Election loss analysis.

बिहार चुनाव में क्यों हारा महागठबंधन, ये भी एक वजह!

महागठबंधन की दो प्रमुख पार्टियों RJD औ कांग्रेस के लिए यह हार चिंताजनक है। लेकिन उससे भी बड़ी बात ये है कि दोष किसी एक को नहीं दिया जा सकता। क्योंकि महागठबंधन की दोनों ही बड़ी पार्टियों का प्रदर्शन महा-निराशाजनक रहा। RJD ने बिहार में कुल 146 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 17.12 फीसद यानी 25 सीटों पर जीत दर्ज की। उधर कांग्रेस ने अपने लिए बिहार में 60 सीटें मांगी, जो उसे मिली भी। लेकिन कांग्रेस ने 10 फीसद की स्ट्राइक रेट के साथ 6 सीटों पर ही सफलता हासिल की। ऐसे में महागठबंधन की दोनों बड़ी पार्टियां किसी एक पर हार का ठीकरा भी नहीं फोड़ सकतीं।

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