पटना

बिहार के गांव-गांव तक बिछेगा सड़कों का जाल, 45 हजार KM ग्रामीण रोड का होगा निर्माण; PMGSY के तहत ये है प्लान

बिहार में PMGSY योजना के तहत 45 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण का खाका तैयार किया गया है। इसके लिए बिहार को जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करके भेजी जाएगी, ताकि जल्द फंड जारी हो सके।

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सड़क (फोटो क्रेडिट Istock)

पटना : केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने बुधवार को यहां कहा कि बिहार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण की शुरुआत हो गई है। इसके तहत 76 हजार करोड़ रुपए खर्च करके 45 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके लिए बिहार को जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करके भेजने की आवश्यकता है, ताकि जल्द फंड जारी हो सके। रिपोर्ट प्राप्त होते ही केंद्र सरकार राशि जारी कर देगी।

कमलेश पासवान ने बुधवार को राज्य सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी के अलावा संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इससे संबंधित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पहला राज्य है, जिसने पीएमजीएसवाई से जुड़ी अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है। ‎ ‎ उन्होंने कहा कि बिहार ने मनरेगा से जुड़ी जो भी मांग रखी है, उस पर विचार किया जाएगा।‎

‎बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बिहार की तरफ से मनरेगा के बकाए समेत अन्य प्रस्ताव रखे और इन्हें जल्द पूरा करने की मांग की। इसमें मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी मद में 200 करोड़ रुपए और सामग्री मद के करीब दो हजार करोड़ रुपए शामिल हैं।

मनरेगा के तहत खेल मैदानों का निर्माण

बताया गया कि बैठक में अतिपिछड़ा, दलित और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के बकाए सभी घर का आवंटन जल्द करने का भी अनुरोध किया गया। ‎बिहार में अनुसूचित जनजाति समुदाय के 24 लाख परिवार बेघर हैं, जिन्हें आवास आवंटित कराने की जरूरत है। बिहार में बेघर परिवारों के सर्वे में 94 लाख परिवार सामने आए हैं। ‎मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राज्य सरकार मनरेगा के माध्यम से 6,800 खेल मैदानों का निर्माण करा रही है। इसके लिए भी केंद्र सरकार से राशि की मांग की गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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